Prashant Kishor न मोदी न नीतीश … PK सीधे राहुल गांधी से क्यों ले रहे पंगा, किस बात की है टीस?
प्रशांत किशोर ने एक बार फिर अपनी बेबाकी से सियासी हलचल मचा दी है। इस बार उन्होंने न नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया और न ही नीतीश कुमार को, बल्कि उनकी सीधी नाराजगी राहुल गांधी से दिखी। PK ने राहुल की रणनीति, नेतृत्व शैली और विपक्ष की एकजुटता को लेकर सवाल उठाए हैं। जानिए क्या है PK की टीस और इसके पीछे की राजनीतिक वजहें।

बिहार की सियासत में गोपाल खेमका मर्डर कांड के बाद बवाल मचा हुआ है. बिहार में लॉ एंड ऑर्डर को लेकर राहुल गांधी से लेकर प्रमोद तिवारी जैसे नेताओं ने सवाल उटाया है. लेकिन प्रशांत किशोर बीते कुछ दिनों से राहुल गांधी पर क्यों हमलावर हैं?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को खुली चुनौती दी है. पीके ने कहा, ‘राहुल गांधी महाराष्ट्र वाले मुद्दे पर क्यों चुप हैं? मुंबई में लाचार और बेबस बिहारियों को मारा जा रहा है, फिर भी वह शिवसेना के साथ वहां गठबंधन में हैं.’ मैं राहुल गांधी को बिहार के किसी भी गांव में एक रात बिताने का चैलेंज देता हूं. पीके ने कांग्रेस की सियासी हैसियत पर भी तीखे तंज कसे. राहुल के पटना पहुंचने से पहले ही बिहार की सियासत में गोपाल खेमका मर्डर कांड से बवाल मचा हुआ है. बिहार में लॉ-एंड-ऑर्डर को लेकर राहुल गांधी से लेकर प्रमोद तिवारी जैसे नेताओं ने सवाल उठाए हैं. लेकिन राहुल गांधी पर पीके ने तंज कसते हुए कहा है कि मुंबई में बिहारियों के साथ जो मारपीट की घटनाएं हो रही हैं, उसके लिए बीजेपी भी उतनी ही कसूरवार है, जितनी शिवसेना और कांग्रेस.

सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है कि कांग्रेस और जन सुराज के बीच कोई बड़ा डील होने वाला था, जो अब नहीं हो पाएगा. इसलिए पीके बीते कुछ दिनों से राहुल गांधी पर हमलावर हो गए हैं. बता दें कि 26 जून 2025 को एक इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘राहुल जी दिल्ली में बैठकर बिहारियों का मजाक उड़ाते हैं और यहां आकर बड़े-बड़े ज्ञान देते हैं. अगर उनमें हिम्मत है तो बिहार के किसी गांव में एक रात बिताकर दिखाएं.’ पीके ने राहुल से माफी मांगने की भी मांग की, यह कहते हुए कि कांग्रेस ने बिहारियों के साथ ‘ऐतिहासिक अन्याय’ किया है. उन्होंने तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर बिहारियों को ‘मजदूरी के लिए पैदा हुआ’ बताया गया था. पीके ने कहा, ‘राहुल गांधी को इसके लिए बिहारियों से माफी मांगनी चाहिए.’

इसके अलावा, पीके ने कांग्रेस की बिहार में सियासी स्थिति पर तंज कसते हुए कहा, ‘कांग्रेस का बिहार में कोई वजूद नहीं. पिछले 25-30 साल से यह लालू यादव की बैग ढोने वाली पार्टी बनकर रह गई है. अगर राहुल में दम है, तो लालू से बराबर सीटें मांगें या अकेले चुनाव लड़े.’ उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को जितने वोट मिलेंगे, वह ‘लालू जी की भिक्षा’ पर निर्भर होंगे.
क्या है यह सियासी रणनीति?

प्रशांत किशोर की यह आक्रामक रणनीति उनकी जन सुराज पार्टी को बिहार में एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने का हिस्सा मानी जा रही है. जन सुराज, जिसे अक्टूबर 2024 में लॉन्च किया गया, सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. पीके ने एनडीए (बीजेपी-जेडीयू) और इंडिया ब्लॉक (राजद-कांग्रेस) दोनों को निशाने पर लिया है, यह दावा करते हुए कि बिहार की जनता पुराने दलों से तंग आ चुकी है.
लेकिन पीके का राहुल गांधी पर इतना जोरदार हमला कई सवाल खड़े करता है. क्या यह सिर्फ सियासी बयानबाजी है, या इसके पीछे कोई गहरी रणनीति? कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पीके कांग्रेस को कमजोर दिखाकर राजद-कांग्रेस गठबंधन में दरार डालने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, कुछ का कहना है कि यह जन सुराज को युवा और ओबीसी वोटरों के बीच लोकप्रिय बनाने का दांव है.
कांग्रेस-जन सुराज डील की अटकलें
सियासी हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि क्या कांग्रेस और जन सुराज के बीच कोई गुप्त डील हो सकती है. हालांकि, पीके की तीखी बयानबाजी इसे खारिज करती दिखती है. 15 जून 2025 को पीके ने लालू यादव के जन्मदिन समारोह में अंबेडकर की तस्वीर को उनके पैरों के पास रखने के मुद्दे पर राहुल को चुनौती दी थी. उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी एक बयान देकर लालू की आलोचना करें, तभी मैं मानूंगा कि कांग्रेस राजद की गुलाम नहीं.’
इसके बावजूद, कुछ सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस, जो बिहार में कमजोर स्थिति में है, जन सुराज के साथ किसी तरह का समझौता कर सकती है. लेकिन पीके की स्वतंत्र छवि और उनकी एनडीए-इंडिया दोनों को चुनौती देने की रणनीति इसकी संभावना को कमजोर करती है. विश्लेषकों का कहना है कि पीके का मकसद जन सुराज को एक तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करना है, न कि किसी मौजूदा गठबंधन का हिस्सा बनना.
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