Bihar Murder पर मर्डर, फिर भी चुप्पी साधे हैं मुख्यमंत्री, लॉ एंड ऑर्डर पर आखिरी बार कब बोले थे CM नीतीश?
बिहार में मर्डर की वारदातें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कानून‑व्यवस्था पर खुलकर कुछ कहने से मौन रहते आ रहे हैं। हाल ही की खबरों में स्थानीय राजनीतिक लोग सवाल उठा रहे हैं कि राज्य में हिंसा और अपराध के बीच CM की चुप्पी क्यों? जानिए कि आखिरी बार उन्होंने कानून‑व्यवस्था पर कब कुछ कहा था और उसके बाद क्या प्रतिक्रियाएँ आईं।

आपराधिक घटनाओं को लेकर बिहार एक बार फिर से सुर्खियों में है. राजधानी पटना में एक के बाद एक हाईप्रोफाइल हत्या की घटनाओं ने सबको हिलाकर रख दिया है.
बिहार एक बार फिर से गलत वजहों के चलते सुर्खियों में है. प्रदेश के अन्य हिस्सों की बात तो छोड़ दी जाए, राजधानी पटना में ही लोग खुद को महफूज महसूस नहीं कर रहे हैं. गोपाल खेमका को थाने से महज कुछ ही दूरी पर मौत के घाट उतार डाला गया. पुलिस ने इस मामले को कुछ ही दिनों में सुलझा लेने का दावा किया. इसके बाद भी अपराधी बेखौफ रहे. खेमका हत्याकांड के बाद एक रेत कारोबारी और अब किराना दुकान चलाने वाले एक शख्स की भी हत्या कर दी गई. सिर्फ जुलाई महीने में ही प्रदेश भर में हत्या की तकरीबन 3 दर्जन मामले सामने आ चुके हैं. बिहार में कुछ ही महीनों के बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में विपक्षी दलों को सरकार पर हमला बोलने का बड़ा मौका मिल गया है. इन सब घटनाक्रमों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि बिहार की राजधानी में इतनी बड़ी घटनाएं हुईं, पर ‘सुशासन बाबू’ के नाम से मशहूर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अभी तक कोई बयान सामने नहीं आया है. सीएम नीतीश कुमार ने आखिरी बार लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन पर कब सार्वजनिक तौर पर अपना पक्ष रखा था?

दरअसल, 4 जुलाई को गोपाल खेमका, 10 जुलाई को रेत कारोबारी रामानंद यादव और 11 जुलाई की रात को तृष्णा मार्ट चलाने वाले विक्रम झा की हत्या कर दी गई. ये तीनों हत्याएं पटना में की गईं, जिसके बाद कानून-व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है. बता दें कि इंडस्ट्रियलिस्ट गोपाल खेमका की हत्या के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लॉ एंड ऑर्डर को लेकर मुख्यमंत्री आवास स्थित संकल्प कक्ष में एक हाई-लेवल मीटिंग की थी. इस दौरान उन्होंने डीजीपी को निर्देश दिया कि अपराध के कारणों की पूरी तहकीकात कर दोषी की पहचान की जाए और बिना किसी भेदभाव के इस मामले में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. सीएम नीतीश ने साफ किया था कि घटना के पीछे अगर किसी प्रकार की साजिश है, तो उसकी भी जांच की जाए और उसके बाद सख्त एक्शन लिया जाए.

लॉ एंड ऑर्डर सुप्रीम प्रायरिटी: सीएम नीतीश
कानून-व्यवस्था को लेकर की गई उच्चस्तरीय बैठक में सीएम नीतीश ने बिहार के डीजीपी से विस्तार से जानकारी ली थी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि क्राइम कंट्रोल में किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए. लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने पर भी बात हुई थी. बैठक में डीजीपी ने अपराध नियंत्रण को लेकर उठाए जा रहे कदम के बारे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विस्तृत जानकारी दी थी. समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि लॉ एंड ऑर्डर सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. अपराध करने वाला कोई भी हो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए. इसके अलावा आपराधिक घटनाओं की जांच में तेजी लाने और इसे कम समय में पूरा करने के भी निर्देश दिए गए थे. इसका उद्देश्य अपराधियों को जल्द से जल्द न्याय के कठघरे तक लाना है.
बिहार में लगातार आपराधिक घटनाएं हो रही हैं. अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है. महज 11 दिन के अंदर 31 लोगों की हत्या का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. राजधानी पटना में तो अपराधी आए दिन कारोबारियों को निशाना बना रहे हैं. 4 जुलाई को मशहूर कारोबारी गोपाल खेमका के मर्डर से शुरू हुआ हत्याओं का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है. उनके बाद रेत कारोबारी और 11 जुलाई की रात किराना दुकान संचालक की गोली मारकर हत्या कर दी गई. प्रदेश के अलग-अगल जिलों में सिलसिलेवार हुई हत्याएं की पूरी जानकारी यहां पढ़िए.
यह भी पढ़ें: Bhartiya TV के साथ पढ़ें हिंदी न्यूज़: हिंदी समाचार, Today Hindi News, Latest Breaking News in Hindi – Bhartiyatv.com