Tuesday, February 3, 2026

Language Politics: पीएम मोदी का मास्टरस्ट्रोक, उज्ज्वल निकम से मराठी में की खास बातचीत

by Sarita Kumari
Language Politics: महाराष्ट्र में हिंदी-मराठी भाषा विवाद के बीच पीएम मोदी ने राज्यसभा के लिए नामित उज्ज्वल निकम से मराठी में बातचीत कर भाषाई सौहार्द का बड़ा संदेश दिया। यह पहल सामाजिक एकता को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

Language Politics: हिंदी‑मराठी भाषा विवाद के बीच पीएम मोदी ने उज्ज्वल निकम से मराठी में बात कर सौहार्द और भाषाई सम्मान का संदेश दिया, जो सामाजिक एकता की दिशा में एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है।

रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को मनोनीत किया, जिनमें प्रमुख वकील और भाजपा के पूर्व लोकसभा उम्मीदवार उज्ज्वल निकम का नाम भी शामिल है। निकम ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले सहित कई हाई-प्रोफाइल केसों में सरकारी वकील के तौर पर अहम भूमिका निभाई है।

उनके अलावा, केरल के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सी. सदानंदन मास्टर, भारत के पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला और प्रसिद्ध इतिहासकार व शिक्षाविद् मीनाक्षी जैन को भी राज्यसभा में नामित किया गया है।

पीएम मोदी ने की थी व्यक्तिगत बातचीत
उज्ज्वल निकम ने बताया कि नामांकन से एक दिन पहले शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया था। इस बातचीत में पीएम मोदी ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किए जाने की जानकारी दी और भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
हिंदी-मराठी भाषा विवाद के बीच पीएम मोदी का भावनात्मक संदेश

Language Politics
Language Politics: पीएम मोदी का मास्टरस्ट्रोक

राज्यसभा के लिए नामित किए जाने के बाद उज्ज्वल निकम ने मीडिया से बातचीत में खुलासा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें फोन कर यह सूचना दी थी। खास बात यह रही कि इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने भाषा को लेकर एक अहम संदेश दिया। उन्होंने पूछा, “हिंदी में बोलूं या मराठी में?” इसके बाद पूरी बातचीत मराठी में हुई, जिससे स्पष्ट संकेत मिला कि हर भाषा का सम्मान होना चाहिए, खासतौर पर हिंदी-मराठी विवाद के वर्तमान माहौल में।

राष्ट्रपति का भरोसा, देश की जिम्मेदारी

निकम ने बताया कि पीएम मोदी ने उनसे कहा, “राष्ट्रपति जी चाहती हैं कि आप राज्यसभा में देश की सेवा करें। उन्हें भरोसा है कि आप यह जिम्मेदारी अच्छे से निभाएंगे।” इस प्रस्ताव पर उज्ज्वल निकम ने बिना किसी हिचकिचाहट के हामी भर दी।

लोकसभा चुनाव में हार के बाद मिला नया दायित्व

उज्ज्वल निकम ने बताया कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी नेतृत्व—जेपी नड्डा, अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस—ने उनका हौसला बढ़ाया और आश्वासन दिया कि भविष्य में उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी। निकम ने कहा, “मेरा मकसद देशविरोधी गतिविधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाना है।”

भाषाई मतभेदों पर सख्त रुख

भाषा विवाद को लेकर निकम ने कहा कि कुछ ताकतें भाषा के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश कर रही हैं, जो देश की एकता के खिलाफ है। उन्होंने संविधान की रक्षा की शपथ लेते हुए कहा कि वे किसी भी विभाजनकारी एजेंडे को सफल नहीं होने देंगे।

26/11 के साजिशकर्ता को अब तक फांसी न मिलना दुखद

उज्ज्वल निकम ने 26/11 के हमलों का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्य साजिशकर्ता को अब तक फांसी नहीं दी गई। उन्होंने न्याय व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत पर भी बल दिया।

राज्यसभा में जिम्मेदारी को समझने का संकल्प

निकम ने कहा, “मैं राज्यसभा में अपनी भूमिका, सीमाएं और अधिकारों को पहले समझूंगा। मेरे लिए देश सर्वोपरि है।” उन्होंने कहा कि जन सुरक्षा बिल जैसे कानून समाज विरोधी तत्वों पर अंकुश लगाने के लिए ज़रूरी हैं।

Language Politics
Language Politics: पीएम मोदी का मास्टरस्ट्रोक

संविधान के तहत राष्ट्रपति को होता है मनोनयन का अधिकार

भारत के संविधान के अनुच्छेद 80(3) के अंतर्गत राष्ट्रपति को राज्यसभा में 12 विशिष्ट व्यक्तियों को नामांकित करने का अधिकार प्राप्त है। ये नामांकन उन क्षेत्रों से किए जाते हैं जिनमें व्यक्ति ने कला, साहित्य, विज्ञान या सामाजिक सेवा में विशिष्ट योगदान दिया हो। इसी प्रावधान के तहत चारों नए सदस्यों को मनोनीत किया गया है।

यह भी पढ़ें:
Bhartiya TV के साथ पढ़ें हिंदी न्यूज़: हिंदी समाचार, Today Hindi News, Latest Breaking News in Hindi – Bhartiyatv.com

You may also like

Adblock Detected

Please support us by disabling your AdBlocker extension in your browsers for our website.