Mansa Devi Ground Report: मां की गोद में चीखता बच्चा, एक दूसरे को ठेलता हुजूम, तभी उठी करंट फैलने की अफवाह और फिर थमने लगी सांस
हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में दर्शन के दौरान अचानक उस समय अफरा-तफरी मच गई जब भीड़ में किसी ने करंट फैलने की अफवाह उड़ा दी। गर्मी, उमस और भीड़ के बीच एक मां की गोद में चीखता बच्चा और एक-दूसरे को धकेलती भीड़ का दृश्य दिल दहला देने वाला था। कई लोग ज़मीन पर गिर पड़े, कुछ घायल हुए और कुछ की साँसें वहीं थम गईं। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी थी और एंट्री-पॉइंट्स पर भीड़ को नियंत्रित करने का कोई प्रभावी उपाय नहीं था। हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस हरकत में आई है, लेकिन लोग अब भी डरे हुए हैं।
सावन का पावन महीना और मनसा देवी मंदिर में हज़ारों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे थे. कोई माथे पर कलावा बांधे, कोई थाली में प्रसाद लिए और कई अपने बच्चों को गोद में उठाए हुए. हर चेहरे पर भक्ति थी. तभी अचानक, भीड़ में किसी ने चिल्ला दिया कि करंट लग गया! करंट फैल गया है! फिर जो हुआ…

सावन की सुबह थी. मौसम में भीगी हुई भक्ति थी और हर कदम मां मनसा के दरबार की ओर बढ़ रहा था. मंदिर की सीढ़ियों पर लोग चढ़ रहे थे किसी के हाथ में नारियल, किसी की आंखों में भक्ति के आंसू और किसी की गोद में उसका जीवन यानी उसका बच्चा… दिख रहा था. एक महिला सिर पर चुनरी डाले अपने तीन साल के बेटे को गोद में उठाए हुए चुपचाप सीढ़ियां चढ़ रही थी. बेटे की आंखों में उत्सुकता थी. मां को देखकर मुस्कुराता और कुछ फुसफुसाता. तभी अचानक कहीं से आवाज आती है कि सीढ़ियों पर करंट फैल गया है. भागो, जान बचाओ… फिर क्या था. सुनते ही सब इधर-उधर भागने लगे.

इस भागदौड़ में मां-बाप का अपने बच्चों से हाथ छूटने लगा. तो कुछ खुद जमीन पर गिर पड़े. इधर, एक मां अपने बच्चे को बचाने की कोशिश में खुद भीड़ में दब गई. बच्चे की चीख सुनाई दे रही थी- मम्मा… मम्मा… लेकिन भीड़ इतनी थी कि उस आवाज को हवा भी नहीं छू सकी. लोग एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे. हाथ-पैर पटकते हुए भाग रहे थे. चप्पल पैर से उतर रही थी. कोई अपनों से अलग हो रहा था तो किसी की सांसें थम गईं. मंदिर की सीढ़ियों पर श्रद्धा की जगह अब डर और चीखें थीं.

मां घबराई, लड़खड़ाई, गिर पड़ी. बच्चा रो रहा था, उसका नन्हा चेहरा सीढ़ियों से रगड़ खा रहा था. आसपास लोग दौड़ रहे थे, किसी के पैरों के नीचे वह मासूम आ सकता था. मगर, मां जमीन पर घिसटते हुए अपने हाथों से उसे खींच लाई… जैसे अपने जिगर को मौत से खींच लाई हो. उसकी आंखें अब भीगी थीं. बस शुक्र था कि बच्चा उसकी बाहों में था.
कुछ देर बाद पुलिस और बचाव दल पहुंचे, तो सिर्फ बिखरी हुई चप्पलें, टूटी चूड़ियां और सिसकते लोग थे. 6 लोगों की जान चली गई और दर्जनों घायल थे. वो बच्चा मां की छाती से चिपका अब भी सिसक रहा था और मां उसे थपथपा रही थी जैसे कह रही हो डर मत… मां की गोद में कुछ नहीं होता.
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