Pratyaya Amrit एक ऐसा नाम जिसने बिहार की नौकरशाही में रचा इतिहास
Pratyaya Amrit बिहार की अफसरशाही में अगर कोई नाम भरोसे, ईमानदारी और बेहतरीन कामकाज के लिए सबसे ऊपर रखा जाए, तो वह है प्रत्यय अमृत। हाल ही में उन्हें बिहार का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि यह नियुक्ति मौजूदा मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा के रिटायरमेंट से 27 दिन पहले ही कर दी गई। इसके पीछे की रणनीति भी अब साफ होती दिख रही है।

कभी सुपरमैन कभी संकटमोचक एक अफसर की अलग पहचान
प्रत्यय अमृत को उनके बेहतरीन कामों के लिए कई नामों से पुकारा गया कभी ‘सुपरमैन IAS कभी मिशन इंपॉसिबल को कंप्लीट करने वाला अफसर
जब राज्य में PPP मॉडल नया था तब उन्होंने इसे स्वास्थ्य विभाग में लागू कर जिला अस्पतालों का कायाकल्प कर दिया। छपरा में डीएम रहते अश्लीलता पर लगाम लगाई और सिनेमाघरों में CCTV अनिवार्य कर दिया।
ऊर्जा विभाग में काम करते हुए उन्होंने समय से पहले गांव-गांव बिजली पहुंचाई। पटना में गंगा पाथ और दीघा फ्लाईओवर जैसे प्रोजेक्ट्स से शहर की तस्वीर बदल दी।
पढ़ाई में अव्वल IAS बनने का सपना किया साकार
गोपालगंज के एक साधारण परिवार में जन्मे प्रत्यय अमृत के पिता दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर और मां शिक्षिका थीं। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और फिर प्राचीन इतिहास में पोस्ट-ग्रेजुएशन टॉप किया।
लेक्चरर बनने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने सिविल सेवा को चुना और दूसरे प्रयास में UPSC पास कर 1991 बैच के IAS अफसर बन गए।
ट्रेनिंग के दौरान ही झलक गया था जज्बा
प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने आदिवासी भाषा ‘संताली’ सीखी और सिमडेगा में जुआ रैकेट का भंडाफोड़ किया। यहीं से उनकी पहचान एक जमीन से जुड़े अधिकारी की बनने लगी।
जहां भी रहे DM छोड़ी अपनी खास छाप

कटिहार, छपरा जैसे जिलों में DM रहते हुए उन्होंने जो बदलाव किए वो आज भी लोगों को याद हैं। कटिहार में PPP मॉडल अस्पतालों में लागू कर सेवा की गुणवत्ता बढ़ाई।
छपरा के सोनपुर पशु मेले की बदनामी को दूर किया और प्रशासनिक सख्ती से वहां की छवि बदली।
घाटे में डूबे पुल निर्माण निगम को किया फायदे में
जब उन्हें बिहार राज्य पुल निर्माण निगम (BRPNN) की जिम्मेदारी मिली तब हालत बदतर थी। पर उनकी कार्यशैली ने इसे फायदे में ला खड़ा किया।
आज जो बिहार में फ्लाईओवर और सड़कें दिखती हैं, वह उनकी सोच और मेहनत का परिणाम है।
बिहार को बदलने में निभाई अहम भूमिका
गांव-गांव बिजली पहुंचाना AIIMS-दिघा फ्लाईओवर, गंगा पाथ जैसे प्रोजेक्ट्स उनके नेतृत्व में पूरे हुए। उन्होंने दिखाया कि सरकारी सिस्टम में भी परिवर्तन संभव है।
दिल्ली की पोस्ट छोड़ बिहार लौटे
2001 से 2006 के बीच वे दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहे, लेकिन छह महीने पहले ही बिहार लौट आए। उनका मानना था कि असली बदलाव यहीं लाना है, और उन्होंने करके दिखाया।
कोविड की दूसरी लहर में संभाला बिहार
2021 की दूसरी कोविड लहर में उन्हें स्वास्थ्य विभाग की कमान दी गई। उन्होंने ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ाने, बेड्स की संख्या दोगुनी करने, और टीकाकरण को गति देने जैसे बड़े काम किए। परिणामस्वरूप बिहार में हालात नियंत्रण में रहे।
नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद IAS अफसर
प्रत्यय अमृत का नाम नीतीश कुमार के उन चंद भरोसेमंद अफसरों में शुमार है, जिन पर सरकार हर संकट में पूर्ण विश्वास करती है। विवादों से दूर रहना सादगी, पारदर्शिता और कार्यकुशलता ने उन्हें यह जगह दिलाई।
चुनाव से पहले ही क्यों किया गया नियुक्त?
बिहार में चुनाव साल के अंत में होने हैं, ऐसे में प्रत्यय अमृत को समय से पहले मुख्य सचिव बनाने का फैसला राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि वे 1 सितंबर से औपचारिक रूप से पद संभालेंगे, लेकिन माना जा रहा है कि असली कमान अभी से उन्हीं के हाथों में है।
नई जिम्मेदारी नई चुनौतियां

मुख्य सचिव बनने के बाद उन्हें चुनावी साल में प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखने, नौकरशाही की साख को बचाए रखने और सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने जैसी चुनौतियों से जूझना होगा।
एक नई शुरुआत, जो उम्मीदें जगा रही है
1 सितंबर को जब वे मुख्य सचिव की कुर्सी पर बैठेंगे, तो यह सिर्फ एक औपचारिक पद नहीं होगा। यह उस अफसर की नई पारी की शुरुआत होगी, जिसकी पहचान रही है –
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