Sanjay Dutt जब संजय दत्त को कोर्ट के बाहर निकलने से रोक दिया उज्ज्वल निकम ने, जानिए क्यों नाराज़ हुए थे विशेष सरकारी वकील

मुंबई
Sanjay Dutt संजय दत्त और 1993 मुंबई ब्लास्ट केस की कहानी से कौन वाकिफ नहीं है। लेकिन इस मुकदमे के दौरान कोर्टरूम में एक ऐसा दिलचस्प वाकया भी हुआ था, जब जाने-माने सरकारी वकील उज्ज्वल निकम गुस्से में आ गए और उन्होंने फिल्म स्टार संजय दत्त को फटकारते हुए कहा संजू, जब तक मैं निकल नहीं जाता, तू कोर्ट से बाहर नहीं आएगा
अदालत बनी जेल में और वहां होती थी रोज सुनवाई
ये बात उस समय की है जब मुंबई की आर्थर रोड जेल में बनी टाडा अदालत में मुंबई बमकांड की सुनवाई अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। जज प्रमोद कोडे रोजाना केस की सुनवाई करते थे। जिन आरोपियों की ज़मानत नहीं हुई थी उन्हें जेल के अंदर बने कोर्ट में ही लाया जाता था।
संजय दत्त को एके-56 राइफल रखने के मामले में आरोपी बनाया गया था, लेकिन वे उस समय ज़मानत पर बाहर थे। हर सुनवाई की तारीख पर वह एक आम आरोपी की तरह कोर्ट में हाजिर होते थे और पीछे बने हिस्से में बाकी आरोपियों के साथ बैठते थे।
मीडिया की भीड़ और कैमरे, और वहीं से शुरू हुई नाराज़गी
जिस दिन संजय दत्त की पेशी होती थी, उस दिन मीडिया का भारी जमावड़ा रहता था। अदालत की कार्रवाई के बाद उज्ज्वल निकम हमेशा मीडिया को दिनभर की कार्यवाही की जानकारी तीन भाषाओं – हिंदी, अंग्रेज़ी और मराठी में देते थे।
लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने निकम को नाराज़ कर दिया। कोर्ट की कार्यवाही खत्म होते ही संजय दत्त बाहर निकल गए और मीडिया के सारे कैमरे उनके पीछे भाग पड़े। जब निकम मीडिया स्टैंड पर पहुंचे, तो कोई भी पत्रकार वहां नहीं था। पुलिसकर्मियों ने बताया कि मीडिया वाले तो संजय दत्त के पीछे भागे हैं
जब निकम ने दिखाया गुस्सा, और संजय बन गए आज्ञाकारी छात्र
निकम को यह बात बुरी लगी। उन्होंने मीडिया का इंतज़ार किया, फिर अदालत की कार्यवाही का ब्यौरा दिया। लेकिन उनकी नाराज़गी चेहरे पर साफ़ झलक रही थी।

अगली सुनवाई पर जैसे ही अदालत की कार्यवाही समाप्त हुई, उज्ज्वल निकम सीधे संजय दत्त के पास पहुंचे और उंगली दिखाते हुए सख्त लहजे में बोले:
संजू, जब तक मैं निकल नहीं जाता, तू कोर्ट से बाहर नहीं आएगा। समझ गया
संजय दत्त ने बिना किसी बहस के कहाजी सर, बिल्कुल नहीं आऊंगा
वह तुरंत वापस जाकर आरोपियों की बेंच पर बैठ गए। वहां मौजूद पत्रकारों ने देखा कि संजय दत्त पूरी तरह सहम गए थे और उनके चेहरे से पसीना बह रहा था।
जब निकम मीडिया को जानकारी देकर चले गए, तब जाकर संजय दत्त कोर्ट से बाहर निकले।
निकम का गुस्सा क्यों था अहम
यह सिर्फ कोर्ट की मर्यादा का सवाल नहीं था, बल्कि उस मुकदमे की गंभीरता का भी। संजय दत्त पर फैसला इस बात पर टिका था कि सरकारी वकील उज्ज्वल निकम किस हद तक मज़बूती से उनका विरोध करते हैं।
आखिरकार, टाडा अदालत ने संजय दत्त को आतंकवादी गतिविधियों से बरी कर दिया लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया और छह साल की सजा सुनाई। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में सजा को पांच साल कर दिया, जिसे संजय दत्त ने पुणे की यरवदा जेल में पूरा किया।
एक बड़ा सबक: अदालत के सम्मान से बड़ी कोई सेलिब्रिटी नहीं
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि चाहे कोई कितना भी बड़ा स्टार क्यों न हो, कोर्ट की प्रक्रिया और उसमें शामिल लोगों का सम्मान सर्वोपरि होता है। उज्ज्वल निकम का वो पल न केवल अदालत की गरिमा को बनाए रखने वाला था, बल्कि उस दौर के न्यायिक इतिहास का भी एक अहम हिस्सा बन गया।
यह भी पढ़ें
Anant Singh की जेल से रिहाई मोकामा से जदयू टिकट पर लड़ेंगे चुनाव नीतीश पर जताया भरोसा