Wednesday, February 4, 2026

Supreme Court में आवारा कुत्तों पर गरमाई बहस सिब्बल बोले-शेल्टर होम में होंगे हिंसक सरकार ने दी चौंकाने वाली रिपोर्ट

by Sujal
Supreme Court दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गरमागरम बहस। सरकार ने बताया- हर साल 37 लाख से ज्यादा डॉग बाइट के मामले, वहीं कपिल सिब्बल ने चेताया- शेल्टर होम में होंगे हिंसक।

Supreme Court में आवारा कुत्तों पर बहस फैसला सुरक्षित

Supreme Court नई दिल्ली में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजने के आदेश पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सुनवाई के दौरान स्थानीय प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि यह समस्या उनकी लापरवाही का नतीजा है।

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सरकार का पक्ष बच्चों की मौत तक पहुंच रहा मामला

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों के हमलों से बच्चों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस पर विवाद करने के बजाय समाधान की जरूरत है।
मेहता ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि देश में हर साल कुत्तों के काटने के 37 लाख से ज्यादा मामले दर्ज होते हैं। उन्होंने साफ किया कि किसी को भी जानवरों से नफरत नहीं है, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

कपिल सिब्बल की दलील: शेल्टर होम में बढ़ेगी हिंसक प्रवृत्ति

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डॉग लवर्स की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने 11 अगस्त के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की, जिसमें अधिकारियों को आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था।
सिब्बल ने कहा कि शेल्टर होम्स में जगह बेहद सीमित है और वहां कुत्तों को रखने से वे आपस में लड़ेंगे, जिससे वे और ज्यादा चिड़चिड़े और हिंसक हो जाएंगे।
उन्होंने चेताया कि नसबंदी, टीकाकरण और देखभाल की व्यवस्था के बिना कुत्तों को शेल्टर में रखना न तो व्यावहारिक है और न ही मानवीय।

अभिषेक मनु सिंघवी का तर्क एबीसी प्रोग्राम पर जोर

अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सरकार को एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) प्रोग्राम लागू करना चाहिए, लेकिन इसकी कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि बिना इस योजना के पालन के, समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पूरी समस्या स्थानीय निकायों की निष्क्रियता के कारण है। अगर समय रहते उचित कदम उठाए गए होते तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
कोर्ट ने साफ किया कि अब संतुलित दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे, ताकि नागरिकों की सुरक्षा और पशु अधिकार दोनों का ध्यान रखा जा सके।

फिलहाल आदेश पर कोई रोक नहीं

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि जिम्मेदार विभाग अपने कर्तव्य में नाकाम रहे हैं। कोर्ट ने फिलहाल 11 अगस्त के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है, यानी आवारा कुत्तों को उठाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। अब फैसला आएगा कि इस आदेश पर अंतरिम रोक लगाई जाए या नहीं।

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