Delhi में प्रदूषण का कहर: आंखों में जलन सांसों में दिक्कत
Delhi -एनसीआर के लोगों के लिए वायु प्रदूषण अब सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि महसूस होने वाला संकट बन गया है।
शनिवार सुबह से ही दिल्ली की हवा में धुंध और घने धुएं की चादर नजर आ रही थी। आंखों में जलन, गले में खराश और खांसी-जुकाम जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 257 रहा, जो खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, कुछ इलाकों में स्थिति गंभीर है।
आनंद विहार में AQI 400 पार: हवा में घुला जहर
दिल्ली का आनंद विहार इलाका शनिवार सुबह 6 बजे से सबसे प्रभावित रहा।
सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, यहां AQI 414 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है।
अन्य प्रभावित इलाके:
- बवाना: 318
- चांदनी चौक: 309
- अलीपुर: 291
- बुराड़ी: 288
- अशोक विहार: 279
दिल्ली के 38 निगरानी केंद्रों में से 10 ने वायु गुणवत्ता को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया, 24 ने इसे ‘खराब’ और 3 ने ‘मध्यम’ श्रेणी में दर्ज किया।
प्रदूषण के कारण: पराली वाहन और मौसम
दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कई कारण हैं:
- पराली जलाना: उपग्रह डेटा के अनुसार, बृहस्पतिवार को पंजाब में 28 और उत्तर प्रदेश में 13 पराली जलाने की घटनाएं हुईं।
- वाहन उत्सर्जन: डीएसएस (निर्णय समर्थन प्रणाली) के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली में परिवहन से 17.8% प्रदूषण हुआ।
- मौसम का ठहराव: अक्टूबर में न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो पिछले दो वर्षों में सबसे कम है। ठंडी रात और स्थिर हवा से प्रदूषण हवा में ठहर जाता है।
दिल्ली-एनसीआर की स्थिति: हर दूसरा इंसान प्रभावित

दिल्ली-एनसीआर के अधिकांश लोग सांस लेने में कठिनाई, खांसी और जुकाम जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
नोएडा और गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक लगभग 200 के स्तर पर रहा, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है।
वायु प्रदूषण न केवल स्वस्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
मौसम में थोड़ी राहत: लेकिन प्रदूषण बरकरार
दिल्ली में गुरुवार रात न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
हालांकि वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार आया और ‘बहुत खराब’ से ‘खराब’ श्रेणी में आया।
अधिकतम तापमान 32.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.4 डिग्री अधिक है।

इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में अगले कुछ दिन में मौसम ठंडा और स्थिर बना रहेगा, जिससे प्रदूषण हवा में फंसा रहेगा।
अगले छह दिन: AQI का अनुमान

CPCB की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (EWS) के अनुसार, अगले 6 दिन तक दिल्ली का AQI ‘खराब’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बने रहने की संभावना है।
AQI श्रेणियां:
- 0-50: अच्छा
- 51-100: संतोषजनक
- 101-200: मध्यम
- 201-300: खराब
- 301-400: बहुत खराब
- 401-500: गंभीर
विशेषकर आनंद विहार, बवाना और चांदनी चौक जैसे इलाके अधिक प्रभावित रहेंगे।
क्या उपाय किए जा रहे हैं?
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए कुछ कदम उठाए हैं:
- क्लाउड सीडिंग: कृत्रिम वर्षा कराने की तैयारी की जा रही है।
- वाहनों की निगरानी: अधिक उत्सर्जन वाले वाहनों पर ध्यान।
- अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि लोगों को घर के अंदर मास्क पहनने और फिल्टर युक्त एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
वायु प्रदूषण विशेषज्ञ डॉ. रेखा गुप्ता ने बताया:
AQI 300 के पार गंभीर स्तर माना जाता है। इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
बच्चे, बुजुर्ग और फेफड़ों की बीमारी वाले लोग घर से बाहर कम निकलें।
जरूरत पड़ने पर न95 मास्क का उपयोग करें। पानी की पर्याप्त मात्रा लें और धूम्रपान से बचें।”
विशेषज्ञों का कहना है कि धुंध और प्रदूषण से आंखें जलना और गले में खराश होना आम है, लेकिन लंबे समय तक यह स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
प्रदूषण के शिकार: आम आदमी की दिक्कतें
दिल्ली-एनसीआर के लोग सुबह-सुबह सांस लेने में कठिनाई और आंखों में जलन महसूस कर रहे हैं।
सड़क पर लोग मास्क पहनकर निकलते हैं बच्चे स्कूल जाते समय दिक्कत में रहते हैं।
आम लोगों का कहना है:
धुंध और धुएं में साँस लेना मुश्किल हो गया है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह बेहद खतरनाक है।
पड़ोसी शहरों की स्थिति
नोएडा और गुरुग्राम में AQI लगभग 200 रहा।
हालांकि ये ‘खराब’ श्रेणी में आते हैं, फिर भी वहां स्वास्थ्य जोखिम दिल्ली के मुकाबले थोड़ा कम है।
लेकिन हवा लगातार दिल्ली से इन शहरों की ओर बहती है, जिससे जल्द ही वहां भी वायु प्रदूषण बढ़ सकता है।
लोगों के लिए सुझाव
- घर के अंदर दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें।
- स्वस्थ भोजन और पानी अधिक मात्रा में लें।
- यदि आवश्यक हो तो N95 मास्क का उपयोग करें।
- लंबी सैर और व्यायाम धुएं और धुंध वाले इलाके में न करें।
- बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को बाहर जाने से बचाएं।
प्रदूषण से निपटने के लिए प्रशासनिक उपाय
दिल्ली सरकार और CPCB ने मिलकर:
- क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) की योजना।
- निर्माण और वाहनों पर नियंत्रण।
- प्रदूषण नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों की जागरूकता और सतर्कता के बिना प्रदूषण पर पूर्ण नियंत्रण मुश्किल है।
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