jemimaरोड्रिग्स की ऐतिहासिक पारी: भारत को फाइनल में पहुंचाया, ऑस्ट्रेलिया का विजय अभियान थामा
jemima आईसीसी महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 के सेमीफाइनल में भारत ने इतिहास रच दिया। भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को पांच विकेट से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। इस जीत की नायिका बनीं जेमिमा रोड्रिग्स, जिन्होंने नाबाद 127 रन की जादुई पारी खेली। यह सिर्फ एक मैच नहीं था, बल्कि संघर्ष, विश्वास और भावनाओं की कहानी थी।
मुश्किल परिस्थितियों में जेमिमा ने अपने शांत स्वभाव और मजबूत हौसले से टीम को उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां से भारत ने महिला क्रिकेट इतिहास का नया अध्याय लिखा।

जब जेमिमा ने कहा – “मैं लगभग हर दिन रोई…
जीत के बाद ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए जेमिमा की आंखों में आंसू थे। उन्होंने अपने दिल की बात खुलकर कही —
मैं यीशु को धन्यवाद देना चाहती हूं। मैं यह अकेले नहीं कर सकती थी। मैं अपनी मां, पिता, कोच और उन सभी लोगों का आभार व्यक्त करती हूं जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया। पिछले महीने बहुत कठिन था… मैं लगभग हर दिन रोई हूं। यह एक सपने जैसा लगता है और यह अभी भी पूरा नहीं हुआ है।
उनके इस बयान ने करोड़ों भारतीय फैंस का दिल छू लिया। जेमिमा का यह इमोशनल पल भारतीय क्रिकेट के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
नंबर-3 पर खेलने की जानकारी मिली मैच से 5 मिनट पहले
जेमिमा ने खुलासा किया कि उन्हें सेमीफाइनल मैच से सिर्फ पांच मिनट पहले पता चला कि वह तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने जा रही हैं।
मुझे मैच से पांच मिनट पहले बताया गया कि मैं नंबर-3 पर बल्लेबाजी करूंगी। यह मेरे बारे में नहीं था, यह भारत के लिए था। मैं बस चाहती थी कि भारत यह मैच जीते और मैं टीम को जीत तक पहुंचा सकूं।”
यह वक्तव्य उनके आत्मविश्वास और जज्बे को बखूबी दिखाता है।
मैदान पर जेमिमा का जज़्बा – आज का दिन मेरे शतक का नहीं, भारत की जीत का था
जेमिमा ने कहा कि उनके लिए यह दिन सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि का नहीं, बल्कि देश की जीत का था।
“आज का दिन मेरे अर्धशतक या शतक के बारे में नहीं था। यह भारत को जीत दिलाने के बारे में था। पिछले साल मुझे इस विश्व कप से बाहर कर दिया गया था, जबकि मैं अच्छी फॉर्म में थी। उस वक्त सब कुछ बिखर गया था।”
उनकी यह बात साफ करती है कि वो केवल रन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के लिए खेल रही थीं।
निराशा से लेकर विजय तक – जेमिमा का कठिन सफर
पिछले साल जब उन्हें टीम से बाहर किया गया, तो उनके लिए यह झटका किसी सदमे से कम नहीं था।
उन्होंने कहा –
“पिछले साल सब कुछ बिगड़ गया। मुझे बाहर कर दिया गया, जबकि मैं खुद को तैयार महसूस कर रही थी। मैं मानसिक रूप से परेशान थी, चिंता और असुरक्षा से गुजर रही थी। लेकिन मैंने तय किया था कि मैं वापसी करूंगी और भगवान ने मेरी मदद की।”
यह बयान हर उस खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है, जो असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानता।
भगवान और विश्वास – जेमिमा का सबसे बड़ा सहारा
जेमिमा ने अपने विश्वास के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि कठिन दिनों में उन्होंने बाइबिल की एक बात को याद रखा —
बस खड़े रहो और भगवान तुम्हारे लिए लड़ेंगे।
मैं शांत रही और भगवान ने मेरे लिए सब कुछ संभाल लिया। मैं हर दिन खुद से यही कहती रही कि मुझे बस डटे रहना है।
उनकी यह बात दर्शाती है कि किस तरह उन्होंने मानसिक मजबूती और ईश्वर पर भरोसे के दम पर इस उपलब्धि को हासिल किया।
टीम इंडिया का ऐतिहासिक चेज़ – 300 से ऊपर का रिकॉर्ड पीछा
भारत ने इस मैच में इतिहास रच दिया। यह महिला वनडे वर्ल्ड कप के नॉकआउट मुकाबले में पहला मौका था जब किसी टीम ने 300 से अधिक का सफल पीछा किया।
भारत ने 305 रनों का लक्ष्य पांच विकेट शेष रहते हासिल किया। यह केवल क्रिकेट का आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट की दृढ़ता और हिम्मत की पहचान है।
ऑस्ट्रेलिया की 15 जीत की लड़ी टूटी
इस मैच से पहले ऑस्ट्रेलिया की टीम लगातार 15 वर्ल्ड कप मैच जीत चुकी थी। लेकिन जेमिमा और उनकी टीम ने इस सिलसिले को तोड़कर इतिहास बदल दिया।
भारत अब तीसरी बार महिला वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा है। यह केवल एक जीत नहीं, बल्कि महिला क्रिकेट के नए युग की शुरुआत है।
साथियों का समर्थन और टीम की एकता
मैच के बाद टीम की कप्तान और बाकी खिलाड़ियों ने जेमिमा की तारीफों के पुल बांध दिए।
कप्तान ने कहा —
“जेमिमा ने हमें विश्वास दिलाया कि कुछ भी असंभव नहीं है। उनकी पारी ने पूरी टीम को जोश से भर दिया।”
टीम इंडिया की जीत में हर खिलाड़ी का योगदान था, लेकिन जेमिमा का शांत दिमाग और दृढ़ निश्चय सबसे बड़ा फर्क लेकर आया।
सोशल मीडिया पर फैंस के रिएक्शन – ये है असली शेरनी
मैच के बाद सोशल मीडिया पर जेमिमा रोड्रिग्स ट्रेंड करने लगीं। ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फैंस ने लिखा —
ये सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, पूरी कहानी है।”
हर दिन रोने के बाद भी जिसने मुस्कराकर इतिहास रच दिया — वो जेमिमा हैं।
उनका शतक महिला क्रिकेट के इतिहास में उन पलों में गिना जाएगा, जब किसी खिलाड़ी ने पूरे देश को गर्व से भर दिया।

जेमिमा की बातों में छिपा सबक – सपनों से पहले संघर्ष जरूरी
जेमिमा का सफर हर उस युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है जो असफलताओं से टूट जाता है। उनकी कहानी बताती है कि संघर्ष ही सफलता का असली चेहरा है।
उन्होंने कहा –
मुझे पता था कि मुझे दिखाना होगा कि मैं क्या कर सकती हूं। मैंने भरोसा नहीं खोया, और भगवान ने मेरा साथ दिया।”
भारत का सपना अब फाइनल में
भारत अब महिला वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में पहुंच गया है। टीम ने दिखा दिया है कि मेहनत, एकता और विश्वास से कोई भी असंभव काम संभव हो सकता है।
अब पूरा देश इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए तैयार है।
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