Bihar elections 2025: क्यों हुआ ऐतिहासिक मतदान और किसे मिल सकता है फायदा? वरिष्ठ पत्रकार सतीश के सिंह ने बताया पूरा विश्लेषण
Bihar elections विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में गुरुवार को रिकॉर्डतोड़ मतदान हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार 121 सीटों पर 64.69 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है। यह अब तक का बिहार के इतिहास में सबसे ज्यादा मतदान है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार महिलाओं ने बढ़-चढ़कर वोट डाले, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
इतना अधिक मतदान किसके पक्ष में गया है और इसके पीछे की वजह क्या है — यही जानने के लिए देश के वरिष्ठ पत्रकार सतीश के सिंह ने इस पूरे चुनावी परिदृश्य का विश्लेषण किया।
भारी मतदान से गदगद राजनीतिक दल: किसने क्या कहा?
जैसे ही मतदान प्रतिशत के आंकड़े सामने आए, बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई।
इंडिया गठबंधन के सीएम फेस तेजस्वी यादव ने कहा,

मैं बिहार की जनता को भारी मतदान के लिए सलाम करता हूं। अब मुझे पूरा भरोसा है कि जनता ने महागठबंधन की जीत सुनिश्चित कर दी है।”
वहीं दूसरी ओर, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने दावा किया कि
आज जिन सीटों पर मतदान हुआ, उनमें से लगभग 100 सीटें हम जीत रहे हैं। राजग इस बार 2010 के रिकॉर्ड को भी पार करेगा।”
इसी बीच, जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि
इतनी बड़ी संख्या में मतदान इस बात का संकेत है कि लोग बदलाव चाहते हैं। मतगणना के बाद बिहार में नई सरकार बनेगी।”
तीनों दावों में आत्मविश्वास झलक रहा है, लेकिन सच्चाई क्या है — इसका विश्लेषण सतीश के सिंह के नज़रिए से करते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार सतीश के सिंह का विश्लेषण: जनता ने बदलाव के लिए किया मतदान
वरिष्ठ पत्रकार सतीश के सिंह का कहना है कि यह भारी मतदान केवल उत्साह नहीं, बल्कि एक संकेत है — “बिहार के लोग बदलाव चाहते हैं।”
उन्होंने कहा,
पहली नजर में यह मतदान बिहार की मौजूदा व्यवस्था को बदलने के लिए किया गया है। यह लोगों की कराह है, जो लंबे समय से बदलाव का इंतजार कर रहे हैं।”
सतीश के सिंह के अनुसार, बीजेपी ने इस चुनाव में बेहद आक्रामक प्रचार रणनीति अपनाई, जबकि दूसरी तरफ राजद, जेडीयू और जनसुराज पार्टी के प्रचार अभियान का प्रभाव सीमित रहा।
उन्होंने कहा,
आपको यह नहीं पता चलता कि राजद या जेडीयू ने लोगों को कैसे मोबलाइज किया। 2020 की तुलना में इस बार विपक्ष का प्रचार फीका रहा।”

बंपर मतदान का मतलब: बड़े पैमाने पर हुआ ‘मोबलाइजेशन’
सतीश के सिंह ने बताया कि इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि सबकुछ किसी एक पक्ष के पक्ष में गया है, बल्कि यह दर्शाता है कि लोगों को संगठित रूप से मतदान के लिए प्रेरित किया गया।
उन्होंने कहा,
“यह स्पष्ट है कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मोबलाइज किया गया है। अगर सभी प्रमुख दलों ने अपने-अपने स्तर पर ऐसा किया है, तो परिणामों पर इसका गहरा असर पड़ेगा।”
उनका यह भी मानना है कि जहां-जहां महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत अधिक रहा है, वहां एनडीए को बढ़त मिल सकती है।
महिलाओं की भागीदारी बनी चुनाव की बड़ी कहानी
इस चुनाव की सबसे बड़ी तस्वीर महिलाओं की भागीदारी रही।
चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि कई इलाकों में महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया।
सतीश के सिंह कहते हैं,
यह कोई नई बात नहीं है। 2005 से ही महिलाएं बड़ी संख्या में मतदान कर रही हैं। लेकिन इस बार उनकी उपस्थिति रिकॉर्ड स्तर पर रही।
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महिलाओं के लिए योजनाएं, जैसे “मुख्य मंत्री कन्या उत्थान योजना” और “जीविका समूह” जैसी पहलों ने महिलाओं में सरकार के प्रति सकारात्मक भावना पैदा की है।
जिन इलाकों में महिलाओं का वोट अधिक है, वहां परंपरागत रूप से जेडीयू को फायदा हुआ है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी का लाभ एनडीए को मिल सकता है।”
एसआईआर विवाद भी बना चर्चा का विषय
इस ऐतिहासिक मतदान के पीछे एक और पहलू है — एसआईआर (Special Identification Register)।
सतीश के सिंह ने बताया कि इस बार एसआईआर में बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने की वजह से भी आंकड़े बढ़े हुए लग सकते हैं।
उन्होंने कहा,
जब सूची से नाम हटाए जाते हैं, तब शेष मतदाताओं में मतदान का प्रतिशत स्वाभाविक रूप से अधिक दिखता है।”
इसके बावजूद, उन्होंने इसे जनता की जागरूकता और चुनावी उत्साह का प्रमाण माना।
युवा मतदाता बने गेमचेंजर
बिहार में इस बार युवा मतदाताओं की भूमिका भी बेहद अहम रही।
लगभग 25% वोटर 18 से 30 साल की उम्र के हैं, और इनकी प्राथमिकताएं बाकी वर्गों से अलग हैं।
सतीश के सिंह कहते हैं,
युवाओं का वोट बहुत सोच-समझकर पड़ा है। रोजगार, शिक्षा और पलायन उनके मुद्दे हैं।
उन्होंने कहा कि महागठबंधन ने इन मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया, लेकिन नीतीश कुमार की योजनाओं ने भी युवाओं को आकर्षित किया है — जैसे स्किल डेवलपमेंट और छात्रवृत्ति योजनाएं।
अगर इन योजनाओं का असर मतदान पर पड़ा तो नीतीश को बड़ा फायदा हो सकता है।”
क्या बीजेपी पिछड़ सकती है तीसरे नंबर पर?
सतीश के सिंह ने एक चौंकाने वाली बात कही।
उन्होंने कहा,
अगर इस भारी मतदान का फायदा नीतीश कुमार को गया, तो बीजेपी तीसरे नंबर पर भी जा सकती है।”
यह बयान संकेत देता है कि बिहार की राजनीति में अप्रत्याशित नतीजे देखने को मिल सकते हैं।
2020 के चुनाव में जेडीयू की सीटें घटकर 43 रह गई थीं, लेकिन इस बार महिला वोटिंग ट्रेंड्स को देखते हुए जेडीयू मजबूत स्थिति में दिख रही है।
बिहार का बदलता सामाजिक समीकरण
सतीश के सिंह ने यह भी बताया कि बिहार का चुनाव सिर्फ जातिगत समीकरणों पर निर्भर नहीं रहा।
आज बिहार के मतदाता सिर्फ जाति नहीं, बल्कि विकास, रोजगार और सुरक्षा के आधार पर वोट कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि महिलाओं और युवाओं का मिश्रण इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
यह वर्ग जाति से ऊपर उठकर सोच रहा है। इसलिए इस बार परिणाम उम्मीद से अलग हो सकते हैं।”
जनता की कराह बन रही है बदलाव की दस्तक
सतीश के सिंह के शब्दों में,
बिहार का यह मतदान एक तरह की कराह है — यह बताता है कि लोग वर्तमान व्यवस्था से असंतुष्ट हैं। वे बदलाव चाहते हैं, और मतदान में उनकी वही भावना झलकती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से लोगों ने घर से बाहर निकलकर वोट किया है, वह बिहार की लोकतांत्रिक चेतना का प्रतीक है।