Himachal कुल्लू के झनीयार गांव में भीषण आग से मचा हाहाकार
संक्षेप (Summary):
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के नोहांडा की तीर्थंकर घाटी स्थित झनीयार गांव में सोमवार दोपहर भयानक आग लग गई, जिसने पूरे गांव को तबाह कर दिया। यह आग दोपहर करीब 2 बजे लगी और तेज हवाओं के कारण देखते ही देखते फैल गई। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। जब तक फायर ब्रिगेड की टीम बंजार चौकी से पहुंची, तब तक लगभग पूरा गांव राख में तब्दील हो चुका था।इस भीषण अग्निकांड में 16 घर, 4 गौशालाएं और 2 मंदिर जलकर खाक हो गए। केवल चार-पांच घर ही बच पाए, जो गांव के बाहरी हिस्से में स्थित थे। शॉर्ट सर्किट को आग का संभावित कारण बताया जा रहा है। राहत की बात यह रही कि किसी जनहानि की सूचना नहीं है, हालांकि कई परिवार अब बेघर हो गए हैं।प्रशासन की ओर से राहत और पुनर्वास के प्रयास जारी हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जिन्हें देखकर लोग भावुक हो गए हैं। पहाड़ी इलाकों में लकड़ी के घर और बिजली उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।
Himachal प्रदेश के कुल्लू जिले से सोमवार दोपहर एक दर्दनाक खबर सामने आई। बंजार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नोहांडा की तीर्थंकर घाटी स्थित झनीयार गांव में अचानक लगी आग ने पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया। दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुई यह आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरा गांव राख में तब्दील हो गया।
ग्रामीणों ने खुद बुझाने की कोशिश की, पर आग ने नहीं छोड़ी कोई गुंजाइश
Table of Contents
जब गांव में आग लगी तो स्थानीय लोग तुरंत हरकत में आए। ग्रामीणों ने बाल्टियों और पाइपों से पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि उनकी मेहनत नाकाम साबित हुई। फायर ब्रिगेड की टीम बंजार चौकी से तुरंत रवाना हुई, लेकिन तब तक आग ने अपना तांडव मचा दिया था।

पहाड़ी इलाके में मुश्किल हुआ राहत कार्य
झनीयार गांव बंजार से करीब 15 किलोमीटर दूर है, और वहां तक पहुंचने के लिए लगभग 2-3 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। आग लगने की सूचना मिलने पर राहत दल ने पूरी कोशिश की, लेकिन पहाड़ी रास्तों और कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण समय पर पहुंच पाना मुश्किल रहा।
राख में बदला पूरा गांव — 16 घर, 4 गौशालाएं और 2 मंदिर जलकर खाक
प्रशासन से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस आग में 16 घर, 4 गौशालाएं और 2 मंदिर पूरी तरह जलकर खाक हो गए। केवल चार-पांच घर ही ऐसे बचे हैं जो गांव के बाहरी हिस्से में स्थित थे और किसी तरह आग की चपेट में आने से बच गए।
शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट बताया कारण

स्थानीय प्रशासन और पुलिस की जांच में आग लगने की मुख्य वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। लकड़ी के बने मकान और तेज हवाओं ने आग को और भी विकराल बना दिया।
राहत की बात: कोई जनहानि नहीं, लेकिन लोग बेघर

सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई। हालांकि, गांव के कई परिवार अब बेघर हो गए हैं। प्रशासन की ओर से पीड़ितों के लिए अस्थायी राहत शिविर और सहायता सामग्री भेजी जा रही है।
पहाड़ों में बार-बार क्यों लगती है आग?
हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में घर लकड़ी और स्लेट की छतों से बने होते हैं। ठंड के मौसम में हीटर और बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है, जिससे शॉर्ट सर्किट की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।
तस्वीरें देख कांप उठे लोग — राख में बदली जिंदगियां
सोशल मीडिया पर गांव की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिन्हें देखकर हर कोई भावुक हो गया। आग के बाद का दृश्य दिल दहला देने वाला है — चारों ओर सिर्फ राख, जले हुए मकान और मलबे के ढेर नजर आ रहे हैं।