Delhi धमाका केस पर अमित शाह का बड़ा बयान—दोषियों को मिलेगी ऐसी सजा कि कोई दोबारा हिम्मत न करे
Delhi में हुए हालिया धमाके ने पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। राष्ट्र की राजधानी में हुई इस घटना ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए, बल्कि आतंकी नेटवर्क के एक बड़े सर्किल को भी उजागर किया। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे मामले पर कड़ा रुख दिखाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि इस हमले में शामिल हर व्यक्ति को ऐसी सजा दी जाएगी कि भविष्य में कोई भी ऐसा कृत्य दोहराने की हिम्मत नहीं करेगा।गृह मंत्री का यह बयान न सिर्फ धमाके की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि सरकार के उस संकल्प का संकेत भी देता है जिसमें आतंकवाद के लिए ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति को सख्ती से लागू किया जाना है। देश के अलग-अलग राज्यों में गिरफ्तार किए जा रहे संदिग्धों की संख्या लगातार बढ़ रही है और जांच का दायरा हर घंटे विस्तृत होता जा रहा है।
अमित शाह ने कहा देश देखेगा कि सजा कैसी होती है”
गुरवार को मीडिया से बातचीत के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली धमाके पर स्पष्ट शब्दों में कहा:जिन लोगों ने यह साजिश रची है, उन्हें हम ऐसी सजा देंगे कि आगे कोई दोबारा ऐसा हमला करने की सोच भी नहीं पाएगा। हमारी कार्रवाई दुनिया के लिए भी संदेश होगी।अमित शाह का यह बयान न केवल कठोर था, बल्कि आतंकी संगठनों और उनके सहायता नेटवर्क को खुली चेतावनी भी था। गृहमंत्री के शब्दों से साफ था कि इस बार कार्रवाई सिर्फ मुख्य आरोपी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी सप्लाई चैन, लॉजिस्टिक्स, फंडिंग नेटवर्क और विचारधारा प्रचारकों को भी खत्म करने पर जोर दिया जाएगा।

धमाके के बाद कई राज्यों में छापेमारी—कई संदिग्ध गिरफ्तार
घटना के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस, स्पेशल सेल, एनआईए और राज्य पुलिस की टीमों ने संयुक्त रूप से बड़े स्तर पर छापेमारी शुरू की।अब तक दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है।हर गिरफ्तारी के साथ नेटवर्क की नई परतें सामने आ रही हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह हमला किसी छोटी स्थानीय साजिश का हिस्सा नहीं था, बल्कि इसमें एक बड़े आतंकी मॉड्यूल की भूमिका थी जो लंबे समय से सक्रिय था और राजधानी को निशाना बनाने की फिराक में था।

मेवात में फर्टिलाइज़र खरीद—दिल्ली धमाके का अहम सुराग
जांच में सामने आया है कि इस साजिश का एक बड़ा हिस्सा हरियाणा के मेवात (नूंह) से जुड़ा है।
पुलिस को पता चला है कि मुख्य आरोपी मुझम्मिल और उसके साथियों ने मेवात के बाज़ार में मौजूद फर्टिलाइज़र की दुकानों से बड़ी मात्रा में सामग्री खरीदी थी।इन फर्टिलाइज़रों का इस्तेमाल करके अमोनियम नाइट्रेट तैयार किया गया, जो बम बनाने का मुख्य घटक माना जाता है।स्पेशल सेल ने मेवात क्षेत्र में मौजूद दुकानों की वीडियोग्राफी की और यह फुटेज जम्मू-कश्मीर पुलिस को भेजी गई। इसके बाद डॉक्टर मुझम्मिल को दुकानों की पहचान कराई गई कि वह किन-किन दुकान से फर्टिलाइज़र खरीदा गया था।यह खुलासा बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उस सप्लाई चैन का अंदाज़ा मिलता है जो इस धमाके के पीछे काम कर रही थी।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी—आतंकी नेटवर्क का नया केंद्र?
जांच में सामने आया सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह रहा कि कई आरोपी अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े रहे हैं।
यह वही संस्था है, जिसके बारे में सुरक्षा एजेंसियों को पहले भी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलती रही है।
कौन-कौन अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े थे?
- डॉ. मुझम्मिल
- डॉ. उमर नबी
- डॉ. शाहीन सईद
- और एक अन्य फरार डॉक्टर नासिर

सूत्रों के अनुसार ये चारों न सिर्फ यूनिवर्सिटी के स्टाफ या छात्र रहे, बल्कि उनके बीच आपसी संपर्क भी मजबूत था।
जांच में यह भी सामने आया कि:
- डॉ. नासिर को कश्मीर में जिहादी गतिविधियों की वजह से नौकरी से बर्खास्त किया गया था, लेकिन उसे अल-फलाह यूनिवर्सिटी में नौकरी मिल गई।
- डॉ. उमर को श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से अनुशासनहीनता के आरोप में हटाया गया था, फिर भी उसे अल-फलाह में नियुक्ति मिल गई।
- इन घटनाओं ने जांच एजेंसियों का ध्यान यूनिवर्सिटी पर केंद्रित कर दिया है। अब पता लगाया जा रहा है कि क्या यूनिवर्सिटी सिर्फ उनके लिए एक सुरक्षित ‘कवर’ थी, या इसका इस्तेमाल आतंकी नेटवर्क के विस्तार के लिए किया जा रहा था।
आतंकी नेटवर्क का विस्तार—कौन क्या भूमिका निभा रहा था?
जांच के शुरुआती संकेत बताते हैं कि आतंकी मॉड्यूल में शामिल आरोपियों की भूमिकाएं स्पष्ट रूप से बंटी हुई थीं:
- डॉ. मुझम्मिल
फर्टिलाइज़र खरीद, बम सामग्री तैयार करना और लोकेशन चयन। - डॉ. उमर नबी
संपर्क स्थापित करने, लॉजिस्टिक्स और सुराग मिटाने। - डॉ. शाहीन
नेटवर्क के धार्मिक कट्टरपंथी पक्ष को संभालना और ऑनलाइन रिक्रूटमेंट। - डॉ. नासिर
कश्मीर से नेटवर्क का समन्वय।
चारों के बीच लगातार फोन कॉल और संदेश रिकॉर्ड मिले हैं, जो यह साबित करते हैं कि यह घटना लंबे समय से प्लान की जा रही थी।

दिल्ली धमाके के पीछे का मकसद—बड़ी साजिश?
जांच में अभी तक यह सामने आया है कि इस धमाके का मकसद सिर्फ दहशत फैलाना नहीं था।
इसका उद्देश्य था:
- राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना
- देश में डर और अस्थिरता पैदा करना
- जैश-ए-मोहम्मद के नए मॉड्यूल की ताकत को दिखाना
- और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को सक्रिय दिखाना
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक यह हमला सिर्फ शुरुआत हो सकता था और आगे भी हमलों की तैयारी चल रही थी।
अब आगे क्या?—जांच और कार्रवाई तेज
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस घटना को ‘हाई-प्रोफाइल टेरर केस’ की श्रेणी में डालते हुए सभी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि इस मॉड्यूल को जड़ से खत्म किया जाए। अब तीन बड़े मोर्चों पर काम तेज किया गया है:
फंडिंग और विदेशी कनेक्शन पर फोकस
दुबई और पाकिस्तान से जुड़े पैसों के लेनदेन को ट्रेस किया जा रहा है।
भर्ती और कट्टरपंथ फैलाने वाले नेटवर्क की पहचान
सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट बॉक्स, और गुप्त चैनलों से सुराग जुटाए जा रहे हैं।
स्थानीय मददगारों पर शिकंजा
जिन लोगों ने लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया, उन्हें चिन्हित कर गिरफ्तारियां की जा रही हैं।