Summary (संक्षेप में पूरी खबर) Delhi bus के सिविल लाइन्स में यात्रियों से भरी बस अचानक आग की लपटों में घिरकर पूरी तरह जल गई। बस में भारी मात्रा में अवैध वाणिज्यिक सामान भी भरा था, जिससे आग तेजी से फैल गई। घटना राज्यपाल और मुख्यमंत्री आवास के पास हुई, जबकि डग्गामार बसों के बढ़ते नेटवर्क और निरीक्षण में लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
Delhi bus में बड़ा हादसा: यात्रियों से भरी बस आग में खाक, अवैध माल ने और बढ़ाया खतरा

सिविल लाइन्स में कुछ ही मिनटों में लपटों में समाई बस दिल्ली के सिविल लाइन्स इलाके में सोमवार शाम एक ऐसा हादसा हुआ जिसने राजधानी में सुरक्षा और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। गणपति अपार्टमेंट के पास खड़ी एक यात्री बस में अचानक आग लग गई। बस में दर्जनों यात्री मौजूद थे और साथ ही उसमें भारी मात्रा में अवैध वाणिज्यिक सामान भी लदा हुआ था। आग इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में पूरी बस धू-धू कर जलकर खाक हो गई।
राज्यपाल–मुख्यमंत्री आवास के पास हादसा, फिर भी नहीं लगी भनक
हैरानी की बात यह है कि यह हादसा दिल्ली के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक में हुआ, जो राज्यपाल और मुख्यमंत्री आवास से कुछ ही दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद बस में भरे सामान की जांच, निगरानी और पुलिस की मौजूदगी पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल घायलों और मृतकों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
बस में यात्रियों से ज्यादा व्यापारिक माल—पुरानी समस्या फिर उजागर
दिल्ली से खरीदारी कर लौटने वाले लोग अक्सर निजी सवारी बसों का उपयोग करते हैं। इन बसों में बड़ी-बड़ी डिग्गियां बनाई जाती हैं, जिनमें यात्रियों का सामान कम और दुकानों का माल अधिक भरा जाता है। इन्हीं कारणों से इन बसों को आमतौर पर डग्गामार बसें’ कहा जाता है।ये बसें टैक्स बचाने के लिए बनाए गए शॉर्टकट का हिस्सा बन चुकी हैं, जहां न तो माल की जांच होती है और न ही सुरक्षा का ख्याल।
बिना रोक-टोक दिल्ली में घुस रहीं अवैध बसें—जिम्मेदार कौन?
पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बीच चलने वाला यह गोरखधंधा अब खुलेआम हो चुका है। बिना परमिट, भारी धुआं छोड़ती और ओवरलोड सामान से भरी ये बसें दिल्ली में कैसे प्रवेश कर जाती हैं?
दिल्ली परिवहन प्राधिकरण के निरीक्षक रोजाना इन्हें गुजरते देखते हैं, लेकिन कार्रवाई न के बराबर है। मोरी गेट, सराय काले खां, ओखला मोदी मिल, जाफराबाद, सीमापुरी, इंद्रलोक, पहाड़गंज जैसे कई स्थानों पर इन बसों के अघोषित टर्मिनल सक्रिय हैं।

बेहद खतरनाक—बसों की छतों पर इतना सामान कि पलटने का खतरा
इन अवैध बसों की छतों पर भी इतना सामान लाद दिया जाता है कि वे कभी भी पलट सकती हैं। आग लगने की स्थिति में बचाव लगभग नामुमकिन हो जाता है। यही चिंता इस ताज़ा हादसे में भी साफ झलकी।
इससे पहले कानपुर में भी जलकर खाक हुई थी एक बस
ठीक इसी तरह का दृश्य कुछ दिन पहले कानपुर में भी देखने को मिला था, जब रामादेवी चौराहे के पास एक बस में अचानक आग लग गई थी। हालांकि वहां सभी यात्री समय रहते उतर गए थे, लेकिन बस पूरी तरह जल गई थी। यह हादसा फिर चेतावनी देता है कि सड़कों पर चल रही कई बसें यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।
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