संक्षेप में खबर
CBSE बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट प्रैक्टिकल परीक्षाओं के दौरान तकनीकी खामी सामने आई। नोएडा, तमिलनाडु सहित कई राज्यों में CBSE का पोर्टल ठप रहा, जिससे स्कूल उसी दिन प्रैक्टिकल के अंक अपलोड नहीं कर सके। स्कूलों में अफरा-तफरी रही और रिजल्ट प्रक्रिया पर असर की आशंका जताई जा रही है।
CBSE पोर्टल ठप: प्रैक्टिकल परीक्षा के बीच तकनीकी संकट
सीबीएसई बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के तहत चल रहे प्रैक्टिकल एग्जाम बुधवार को तकनीकी खामी की वजह से बाधित हो गए। देश के कई राज्यों, खासकर नोएडा और तमिलनाडु में CBSE का आधिकारिक पोर्टल सुबह से ही काम नहीं कर रहा था। इससे स्कूलों को उसी दिन प्रैक्टिकल के अंक अपलोड करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

स्कूलों में दिनभर भागदौड़, प्रिंसिपल रहे परेशान
पोर्टल ठप होने की वजह से स्कूल प्रिंसिपल और परीक्षा प्रभारी दिनभर परेशान नजर आए। वे लगातार CBSE कार्यालय से संपर्क करते रहे, लेकिन कोई ठोस समाधान तुरंत नहीं मिल सका।
नोएडा में CBSE से संबद्ध करीब 140 स्कूल हैं, जहां हजारों छात्र प्रैक्टिकल परीक्षा दे रहे हैं। इन स्कूलों में अधिकांश पूरे दिन अंक अपलोड नहीं कर पाए।
समय पर अंक अपलोड का दबाव, सिस्टम ने बढ़ाई मुश्किल
CBSE के निर्देशों के अनुसार, एक जनवरी से शुरू हुए प्रैक्टिकल एग्जाम फरवरी तक पूरे किए जाने हैं और परीक्षा के तुरंत बाद उसी दिन अंक पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है।
हालांकि, तकनीकी खामी के चलते यह पूरी प्रक्रिया ठप हो गई। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि परीक्षा तो समय पर हो रही है, लेकिन सिस्टम की कमजोरी का बोझ शिक्षकों और छात्रों पर पड़ रहा है।
रिजल्ट प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर
स्कूल प्रशासन ने आशंका जताई है कि यदि समय पर अंक अपलोड नहीं हो पाए, तो इसका असर छात्रों के रिकॉर्ड और आगे चलकर रिजल्ट प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इसी चिंता के चलते स्कूलों में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

CBSE रीजनल डायरेक्टर का बयान
इस मामले में CBSE के गौतमबुद्ध नगर की रीजनल डायरेक्टर एस. धारिणी अरुण ने बताया कि सुबह से ही पोर्टल में तकनीकी दिक्कत की सूचना मिली थी।
उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही तकनीकी टीम को सक्रिय कर दिया गया और समस्या को जल्द दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि पोर्टल को जल्द ही सुचारु कर दिया जाएगा।
बार-बार की तकनीकी खामी पर उठे सवाल
हालांकि, बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्याओं से स्कूलों में नाराजगी साफ दिखाई दी। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि जब बोर्ड स्तर पर लाखों छात्रों की परीक्षाएं संचालित हो रही हैं, तो तकनीकी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में इस तरह की लापरवाही छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।