Wednesday, February 4, 2026

Bsf Jawan : ऑपरेशन सिंदूर से डरा पाकिस्तान, BSF जवान पीके साहू को भारत को लौटाया

by pankaj Choudhary
Bsf Jawan : बीएसएफ जवान पीके साहू को पाकिस्तान ने 20 दिन बाद भारत को सौंपा। ऑपरेशन सिंदूर के दबाव में आया पाकिस्तान। अटारी बॉर्डर से भारत की हुई वापसी।

Bsf Jawan : ऑपरेशन सिंदूर के असर में पाकिस्तान, लौटाया गया BSF जवान पीके साहू

पाकिस्तान ने आखिरकार बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार साहू को 20 दिन की हिरासत के बाद भारत को सौंप दिया है। यह वापसी ऐसे वक्त में हुई है जब भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर जैसे कदम उठाए हैं। पूर्णम साहू को अटारी बॉर्डर पर भारत को सौंपा गया, जिसके बाद उनके परिवार ने राहत की सांस ली है।


कैसे पकड़े गए थे जवान साहू?

23 अप्रैल 2025 को पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में तैनात जवान पीके साहू गलती से पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गए थे। वह BSF की 182वीं बटालियन में तैनात थे और किसानों के एक समूह के साथ गश्त कर रहे थे। उसी दौरान वह एक पेड़ के नीचे आराम करने के लिए गए और अनजाने में सीमा पार कर गए। पाकिस्तानी रेंजर्स ने तुरंत उन्हें हिरासत में ले लिया।


BSF का आधिकारिक बयान

बीएसएफ की ओर से जारी बयान में कहा गया है,

“आज बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार साहू, जो 23 अप्रैल 2025 से पाकिस्तान रेंजर्स की हिरासत में थे, को संयुक्त चेक पोस्ट अटारी, अमृतसर के जरिए सुबह 10:30 बजे भारत को सौंप दिया गया। यह हैंडओवर शांति और तय प्रोटोकॉल के तहत हुआ।”


ऑपरेशन सिंदूर बना पाकिस्तान पर दबाव का कारण

सूत्रों की मानें तो “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत भारत ने पाकिस्तान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के अगले दिन साहू को हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद भारत ने कड़ा संदेश दिया। यही कारण है कि पाकिस्तान को बैकफुट पर आकर जवान को लौटाना पड़ा। पाकिस्तानी रेंजर्स खुद साहू को सीमा तक लेकर आए।


परिवार की भावनात्मक प्रतीक्षा

पीके साहू का परिवार पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रिशरा में रहता है। जवान की गिरफ्तारी के बाद परिवार तनाव में था, खासकर उनका 7 वर्षीय बेटा बार-बार यही सवाल कर रहा था – “पापा कब आएंगे?” अब जवान के सुरक्षित लौट आने के बाद पूरे गांव में खुशी का माहौल है।


सीमा सुरक्षा की चुनौतियाँ और BSF की भूमिका

बीएसएफ को जम्मू-कश्मीर से लेकर गुजरात तक फैली 3,323 किलोमीटर लंबी भारत-पाक सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। गश्त के दौरान गलती से सीमा पार करने की घटनाएं आम हैं, जिन्हें आमतौर पर फ्लैग मीटिंग के जरिए सुलझाया जाता है। इस घटना ने एक बार फिर से सीमा की जमीनी हकीकत और उसमें शामिल जोखिमों को सामने ला दिया है।


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Source – Ndtv
Written by – Pankaj Chaudhary

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