Delhi Metro Station पर लगी आग, फायर ब्रिगेड की 4 गाड़ियां मौके पर, कई घंटों के बाद पाया गया काबू
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब त्रिलोकपुरी संजय लेक मेट्रो स्टेशन के सर्वर रूम में अचानक आग लग गई। हालांकि दमकल विभाग की तत्परता से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और किसी भी यात्री या स्टाफ के हताहत होने की खबर नहीं है, फिर भी यह घटना मेट्रो सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े कर गई है।
Delhi Metro Station पर लगी भीषण आग, फायर ब्रिगेड ने पाया काबू 11
कैसे लगी आग, क्या रहा घटनाक्रम?
घटना सोमवार सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर सामने आई जब त्रिलोकपुरी मेट्रो स्टेशन के स्टाफ ने सर्वर रूम से धुआं निकलते देखा। तुरंत ही मेट्रो प्रशासन ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी, जिसके बाद दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।
फायर डिपार्टमेंट के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार,
“प्रारंभिक जांच में ऐसा प्रतीत होता है कि शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। आग मुख्यतः सर्वर रूम तक ही सीमित रही, जिससे बड़ा हादसा टल गया।”
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कब और कैसे पाया गया आग पर काबू?
दमकल विभाग ने करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोपहर 1:10 बजे तक आग पर काबू पा लिया। सौभाग्यवश, इस घटना में कोई भी कर्मचारी या यात्री घायल नहीं हुआ, लेकिन तकनीकी सिस्टम को नुकसान पहुंचा है जिसकी जांच की जा रही है।
यात्रियों में मची अफरा-तफरी
आग की खबर मिलते ही स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। स्टेशन के कुछ हिस्सों को एहतियात के तौर पर खाली करवाया गया। हालांकि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने स्थिति को नियंत्रण में रखते हुए मेट्रो सेवाओं पर ज्यादा असर नहीं होने दिया।
DMRC ने एक बयान में कहा:
“त्रिलोकपुरी संजय लेक मेट्रो स्टेशन पर आग लगने की घटना को देखते हुए कुछ देर के लिए सुरक्षा कारणों से स्टेशन को आंशिक रूप से बंद किया गया था। कोई जनहानि नहीं हुई है और सेवाएं अब सामान्य हैं।”
दिल्ली में हाल ही में हुई अन्य आग की घटनाएं
दिल्ली में गर्मी और इलेक्ट्रिकल लोड बढ़ने के साथ आग की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कई गंभीर आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं:
दिलशाद गार्डन: दो की मौत
रविवार देर रात दिल्ली के कोड़ी कॉलोनी, दिलशाद गार्डन में ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन पर आग लग गई। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई और दो ई-रिक्शा और एक बाइक जलकर खाक हो गई।
दिल्ली हाट: अप्रैल में हुआ हादसा
अप्रैल 2025 में आईएनए स्थित दिल्ली हाट में भीषण आग लग गई थी। इस हादसे में कई दुकानें जलकर राख हो गई थीं। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कई कारीगरों की जीवन भर की कमाई और मेहनत जलकर खत्म हो गई थी। दिल्ली सरकार ने सहायता देने का आश्वासन दिया था।
क्या आग लगने की घटनाओं से मेट्रो सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं?
सर्वर रूम मेट्रो स्टेशन की संचार और निगरानी प्रणाली का अहम हिस्सा होता है। इस तरह की घटनाएं न केवल सुरक्षा को खतरे में डालती हैं बल्कि सेवाओं को बाधित करने की संभावना भी रखती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि:
“मेट्रो जैसे हाई-सेंसिटिव इंफ्रास्ट्रक्चर में आग जैसी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि तकनीकी निगरानी और रूटीन मेंटेनेंस को और ज्यादा मजबूत करने की ज़रूरत है।”
DMRC को क्या कदम उठाने चाहिए?
विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि:
हर मेट्रो स्टेशन पर फुल-प्रूफ फायर डिटेक्शन सिस्टम लगाया जाए।
सर्वर रूम और इलेक्ट्रिकल पैनल्स की नियमित ऑडिट हो।
स्टाफ की ट्रेनिंग फायर से निपटने के लिए हो।
हर महीने मॉक फायर ड्रिल आयोजित की जाए।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर दिल्लीवासियों ने DMRC और दमकल विभाग की सराहना की कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया। हालांकि, कई यूज़र्स ने मेट्रो में सुरक्षा इंतज़ामों पर सवाल भी उठाए:
“मेट्रो जैसी जगह पर आग लगना बेहद खतरनाक हो सकता है। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।”
“दमकल विभाग की तत्परता सराहनीय है, लेकिन मेट्रो प्रशासन को और चौकस रहना चाहिए।”
क्या यह चेतावनी है आने वाले समय के लिए?
गर्मी बढ़ने के साथ इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर लोड भी तेजी से बढ़ रहा है। शॉर्ट सर्किट और ओवरलोडिंग के मामलों में वृद्धि हो रही है। इसलिए जरूरी है कि सरकारी और निजी दोनों तरह की इमारतों में फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य रूप से की जाए।
Rinkusingh Priyasaroj Engagementतीन साल का लंबा इंतजार… के बाद प्रिया सरोज ने अपनी लव स्टोरी से उठाया पर्दा
लखनऊ में हुई सगाई, प्यार का इज़हार सोशल मीडिया पर
भारतीय क्रिकेट टीम के सितारे रिंकू सिंह और समाजवादी पार्टी की युवा सांसद प्रिया सरोज ने अपनी सगाई की घोषणा कर दी है। लखनऊ में हुए इस समारोह में राजनीति और खेल जगत के बड़े चेहरों ने शिरकत की। सगाई के बाद प्रिया और रिंकू दोनों ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर भावुक पोस्ट साझा किए, जिनमें उन्होंने अपनी 3 साल पुरानी प्रेम कहानी का ज़िक्र किया।
प्रिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,
This day has been in our hearts for so long – almost three years – and the wait was worth every second🫶
“जिस दिन का इंतजार 3 साल से था, वो दिन आज हमारे सामने है।”
दोनों की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। लाखों फैन्स इस जोड़ी को शुभकामनाएं दे रहे हैं।
कौन हैं प्रिया सरोज? राजनीति और युवा नेतृत्व का नया चेहरा
Rinkusingh Priyasaroj Engagement 3 साल की लव स्टोरी का सुखद अंत 20
प्रिया सरोज इस समय देश की सबसे कम उम्र की सांसदों में शुमार हैं। वे उत्तर प्रदेश के मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र से 2024 में चुनी गईं। पेशे से वकील प्रिया ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद राजनीति की राह अपनाई और अपने पिता तुफानी सरोज की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया।
तुफानी सरोज खुद तीन बार सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के केराकत से विधायक हैं। प्रिया ने बीजेपी नेता बी.पी. सरोज को 35,000 से अधिक मतों से हराकर जीत हासिल की और लोकसभा पहुंचीं।
उनकी सादगी, बुद्धिमत्ता और युवाओं से जुड़ने की क्षमता ने उन्हें सोशल मीडिया पर भी लोकप्रिय बना दिया है।
क्रिकेटर रिंकू सिंह: एक फिनिशर का दिल जीतने वाला अंदाज
अलीगढ़ के रहने वाले रिंकू सिंह भारतीय क्रिकेट टीम में उभरते सितारे हैं। वे अब तक भारत के लिए दो वनडे और 33 टी20 मैच खेल चुके हैं। उनका खेल का अंदाज खासतौर पर T20 में फिनिशर के रूप में देखा जाता है। IPL में रिंकू कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) की ओर से खेलते हैं और 2024 में आईपीएल चैंपियन बनने वाली टीम का हिस्सा थे।
उनकी सादगी, विनम्रता और संघर्षों से भरी कहानी ने उन्हें युवाओं के बीच एक आदर्श बना दिया है। प्रिया सरोज से जुड़ने के बाद फैन्स ने इस जोड़ी को “स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स का परफेक्ट मेल” कहकर सम्मानित किया।
कौन-कौन हुआ शामिल इस खास मौके पर?
इस ग्रैंड इंगेजमेंट सेरेमनी में दोनों परिवारों के साथ-साथ राजनीति और क्रिकेट जगत की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं:
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव
डिंपल यादव
जया बच्चन
राम गोपाल यादव
शिवपाल यादव
पूर्व क्रिकेटर प्रवीण कुमार और पीयूष चावला
BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला
उन सभी ने इस खास मौके पर वर-वधू को ढेरों शुभकामनाएं दीं।
हालांकि, इंग्लैंड के खिलाफ 20 जून से शुरू हो रही टेस्ट सीरीज की वजह से टीम इंडिया के कई खिलाड़ियों की उपस्थिति नहीं हो सकी। टीम पहले ही इंग्लैंड रवाना हो चुकी थी।
3 साल पुराना रिश्ता, अब शादी की तैयारियां
रिंकू और प्रिया की लव स्टोरी करीब तीन साल पुरानी है। दोनों एक-दूसरे को लंबे समय से जानते थे और यह रिश्ता पारिवारिक सहमति से आगे बढ़ा। अब दोनों ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर लिया है।
रिंकू और प्रिया की शादी 18 नवंबर 2025 को वाराणसी के ताज होटल में होने जा रही है। इस शादी को लेकर न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में उत्सुकता है।
सगाई के बाद फैंस की प्रतिक्रियाएं
जैसे ही रिंकू और प्रिया की सगाई की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आईं, फैन्स की बधाइयों का तांता लग गया। ट्विटर पर #RinkuSingh और #PriyaSaroj ट्रेंड करने लगे।
कुछ यूज़र्स ने लिखा:
“पॉलिटिक्स और क्रिकेट का बेस्ट कपल!”
“रिंकू भाई तो अब मैदान और दिल दोनों जीत चुके हैं!”
“प्रिया जी भारत की सबसे युवा सांसद हैं और अब रिंकू सिंह की दुल्हन बनने जा रही हैं, बहुत सुंदर जोड़ी!”
Meghalaya Honeymoon Murder: वे 3 लोग थे… कैसे एक टूरिस्ट गाइड ने सोनम का पूरा राज खोल दिया
इंदौर से मेघालय तक की रहस्यमयी कहानी
इंदौर के राजा रघुवंशी की मेघालय में हत्या की गुत्थी ने अब नया मोड़ ले लिया है। हनीमून के लिए निकले नवविवाहित जोड़े की यह कहानी अब हत्या के आरोपों और गिरफ्तारियों में तब्दील हो गई है। राजा की पत्नी सोनम रघुवंशी को आखिरकार उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार कर लिया गया है, जहां वह खुद पुलिस के पास सरेंडर करने पहुंची थी। उसके साथ तीन और संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि एक आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है।
टूरिस्ट गाइड की चौंकाने वाली गवाही
इस केस की जांच में एक टूरिस्ट गाइड की भूमिका बेहद अहम रही। पीटीआई-भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, मावलखियात के गाइड अल्बर्ट पडे ने बताया कि 23 मई को सुबह 10 बजे के आसपास उसने राजा और सोनम को तीन अन्य लोगों के साथ 3,000 सीढ़ियों पर चढ़ते हुए देखा था। यह जगह नोंगरियात से मावलखियात की ओर जाती है।
अल्बर्ट ने दंपत्ति को पहचान लिया क्योंकि उसने पिछले दिन दोनों को ‘लिविंग रूट्स ब्रिज’ के बारे में बताते हुए देखा था, हालांकि उन्होंने मना कर दिया था और किसी अन्य गाइड को हायर किया था। खास बात यह थी कि उन तीन अन्य लोगों में से कोई भी स्थानीय नहीं था – सभी हिंदी में बात कर रहे थे, जिससे अंदाजा लगाया गया कि वे बाहरी थे।
सोनम के सरेंडर से खुला केस
Meghalaya Honeymoon Murder: सोनम गिरफ्तार, टूरिस्ट गाइड से खुला राज 31
मेघालय पुलिस की जांच और परिवार की CBI जांच की मांग के बीच सोनम ने यूपी के गाजीपुर में सरेंडर कर दिया। पुलिस के अनुसार, वह लगातार जांच के दायरे में थी और पूछताछ का दबाव उस पर बढ़ता जा रहा था। सरेंडर के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया और तीन अन्य साथियों को भी हिरासत में लिया गया।
एक आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। सोनम के पिता जहां बेटी की बेगुनाही का दावा कर रहे हैं, वहीं राजा के परिवार का कहना है कि अगर वह दोषी पाई जाती है तो उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए।
कैसे मिला राजा का शव?
राजा का शव वेइसाडोंग फॉल्स के पास एक खाई में बरामद हुआ था। उनकी एक सोने की अंगूठी और चेन गायब थी, जिससे पुलिस को हत्या का शक और मजबूत हुआ। घटनास्थल के पास खून से सना एक चाकू भी बरामद हुआ और उसी क्षेत्र में कपल के इस्तेमाल जैसा एक रेनकोट भी मिला, जिससे पूरा घटनाक्रम साफ होने लगा।
सोनम की हरकतों से पहले ही शक गहरा गया था
राजा और सोनम की शादी 11 मई को हुई थी। दोनों 20 मई को मेघालय के लिए रवाना हुए और 22 मई को किराए के स्कूटर पर मावलखियात पहुंचे। 24 मई को उनका स्कूटर शिलांग-से-सोहरा रोड के किनारे एक कैफे के पास लावारिस हालत में मिला। इसके बाद से ही उनकी तलाश शुरू हो गई थी।
गौरतलब है कि अगर सोनम इस हत्या में दोषी साबित होती है, तो यह केवल हत्या का मामला नहीं रहेगा बल्कि एक सुनियोजित साजिश और विश्वासघात का उदाहरण बनेगा।
Sikkim Honeymoon Couple एक और नवविवाहित जोड़ा लापता, परिजन बोले – “एक चप्पल तक नहीं मिली”
सिक्किम की हसीन वादियों में हनीमून मनाने गए उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के नवविवाहित जोड़े की जिंदगी अचानक से एक भयानक हादसे में उलझ गई है। कौशलेंद्र प्रताप सिंह और उनकी पत्नी अंकिता सिंह 11 दिन से लापता हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। यह हादसा 29 मई को हुआ जब उनका वाहन 1000 फीट गहरी खाई में गिर गया।
हादसे के 11 दिन बाद भी खाली हाथ सर्च ऑपरेशन
Sikkim Honeymoon Couple गए नवविवाहित जोड़े का नहीं मिला सुराग 41
इस हादसे के बाद से सिक्किम में रेस्क्यू टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। लेकिन कौशलेंद्र और अंकिता का न कोई सामान मिला है, न ही उनका कोई सुराग। परिजनों का दर्द इस हद तक बढ़ गया है कि अब सोशल मीडिया और नेताओं के जरिए वे केंद्र और राज्य सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि खोज अभियान को और तेज किया जाए।
कौशलेंद्र और अंकिता का आखिरी संपर्क
अंकिता के पिता विजय सिंह डब्बू ने बताया कि 29 मई को आखिरी बार बेटी से बात हुई थी। बातचीत सामान्य थी और अंकिता बहुत खुश लग रही थी। लेकिन इसके बाद से ही न तो बेटी का फोन लगा और न ही कोई संपर्क हुआ। 5 मई को ही दोनों की शादी हुई थी और 25 मई को वे हनीमून के लिए सिक्किम रवाना हुए थे।
दो लोग बचे, लेकिन कौशलेंद्र-अंकिता का कोई सुराग नहीं
Sikkim Honeymoon Couple गए नवविवाहित जोड़े का नहीं मिला सुराग 42
हादसे में जिस ट्रैवलर वाहन में यह जोड़ा सवार था, उसमें अन्य यात्री भी थे। उनमें से दो लोगों को बचा लिया गया है, जिनमें से एक ICU में और एक सामान्य वार्ड में भर्ती हैं। दोनों ने यह पुष्टि की है कि कौशलेंद्र और अंकिता उसी वाहन में थे। बावजूद इसके रेस्क्यू टीम को अब तक न उनका फोन, न बैग, न जूते और न ही कोई भी निजी सामान मिला है।
“एक चप्पल तक नहीं मिली”: पिता की अपील
कौशलेंद्र के पिता शेर बहादुर सिंह का कहना है, “11 दिन से हम उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कोई खबर आएगी। लेकिन अब तक न बेटे का और न बहू का कोई सामान मिला है। जो कुछ मिला, वो सब किसी और का था। एक चप्पल तक नहीं मिली।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सोशल मीडिया पर भावुक अपील की है कि सर्च ऑपरेशन को तेज किया जाए।
दादा की नाराजगी और सिस्टम पर सवाल
कौशलेंद्र के दादा और भाजपा नेता डॉ. उम्मेद सिंह ‘इन्सान’ ने सरकार की चुप्पी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, “मैंने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पीएमओ तक संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। पार्टी में वर्षों से सेवा करने के बाद भी इस संकट में कोई पूछने तक नहीं आया।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि, “ओडिशा में जब हादसा हुआ, तो वहां की सरकार तुरंत हरकत में आई। लेकिन हमारे मामले में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया।”
सोशल मीडिया पर जनता की भावुक अपील
यह मामला अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है। लोग #FindKaushalendraAnkita जैसे हैशटैग के साथ ट्वीट कर रहे हैं और सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर दोनों की तस्वीरें शेयर कर लोग उनके सुरक्षित लौटने की कामना कर रहे हैं।
सिक्किम प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सर्च ऑपरेशन जारी है। पहाड़ी इलाका, गहराई और मौसम की अनिश्चितता के कारण कार्य में बाधा आ रही है, लेकिन वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
दूसरा मामला, लेकिन अलग अंजाम
इस घटना से पहले भी मध्यप्रदेश के राजा और सोनम का मामला सामने आया था। वे भी सिक्किम में हनीमून पर गए थे। राजा का शव पहले ही बरामद कर लिया गया था, लेकिन सोनम सुरक्षित गाजीपुर (यूपी) में मिल गई। हालांकि वह मामला आपसी विवाद का था, लेकिन कौशलेंद्र और अंकिता की गुमशुदगी पूरी तरह से हादसे से जुड़ी है।
शादी के कुछ दिन बाद ही टूटी खुशियों की डोर
यह घटना जितनी दर्दनाक है, उतनी ही चिंताजनक भी। 5 मई को शादी हुई थी, परिवार में खुशियों का माहौल था। लेकिन आज 11 दिन से परिवार शोक में है। हर दिन यह डर और बढ़ जाता है कि कहीं अब कुछ भी पता न चले।
सरकार से मदद की उम्मीद
परिजन हर स्तर पर सरकार से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में तकनीकी सहायता, ड्रोन और सेना की मदद ली जानी चाहिए।
Sukma Naxal Attack बस्तर के IED की चपेट में आए सुरक्षाबल, एडिशनल एसपी शहीद, कई जवान घायल
Sukma Naxal Attack Asp शहीद, कई जवान घायल, Ied ब्लास्ट 52
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एक बार फिर नक्सली हिंसा का खूनी चेहरा सामने आया है। CPI (माओवादी) द्वारा भारत बंद के ऐलान के बीच सुरक्षाबलों की गश्ती टीम पर IED ब्लास्ट कर हमला किया गया, जिसमें सुकमा के एडिशनल एसपी (ASP) आकाश राव गिरिपंजे शहीद हो गए और कई जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह हादसा कोंटा-एर्राबोरा मार्ग पर डोंड्रा के पास हुआ जब सुरक्षाबलों की टीम गश्त कर रही थी।
IED धमाके में उड़ा सिस्टम, शहीद हुए ASP
Sukma Naxal Attack Asp शहीद, कई जवान घायल, Ied ब्लास्ट 53
सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हुए नक्सलियों ने एक प्रेशर आईईडी प्लांट कर रखा था, जो जैसे ही टीम उस इलाके से गुज़री, धमाके के साथ फट गया। इस विस्फोट में ASP आकाश राव गिरिपंजे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं, कई अन्य पुलिसकर्मी और अधिकारी भी घायल हैं जिनका इलाज जारी है।
कौन हैं शहीद ASP आकाश राव गिरिपंजे?
ASP आकाश राव गिरिपंजे छत्तीसगढ़ पुलिस के उभरते हुए अधिकारियों में गिने जाते थे। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में उनकी सक्रियता और नेतृत्व के लिए वे जाने जाते थे। वे कोंटा डिवीजन की निगरानी कर रहे थे और घटना के समय क्षेत्र में गश्त पर थे ताकि भारत बंद के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। लेकिन दुर्भाग्यवश वे नक्सलियों के कायराना हमले का शिकार हो गए।
बस्तर IG पी. सुंदरराज ने दी जानकारी
बस्तर रेंज के IG पी सुंदरराज ने जानकारी देते हुए कहा, “CPI (माओवादी) के भारत बंद को देखते हुए ASP आकाश राव की टीम को एरिया डोमिनेशन और सर्चिंग ऑपरेशन के तहत गश्त पर भेजा गया था। डोंड्रा के पास प्रेशर IED ब्लास्ट में ASP गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अन्य जवानों को भी चोटें आई हैं। ASP की हालत बेहद नाजुक थी और उन्होंने दम तोड़ दिया।”
सुकमा SP किरण चौहान का बयान
सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चौहान ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि, “कोंटा थाना क्षेत्र में जब पुलिस टीम गश्त पर निकली थी तभी यह घटना हुई। कोन्टा थाना प्रभारी और SDPO भी घायल हुए हैं। सभी का इलाज चल रहा है और पुलिस बलों की ओर से इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है।”
भारत बंद के ऐलान के पीछे नक्सली साजिश?
CPI (माओवादी) ने 10 जून को भारत बंद का आव्हान किया था। इसका मुख्य उद्देश्य था सरकार और सुरक्षाबलों पर दबाव बनाना। ऐसे में पहले से ही सुरक्षा बल अलर्ट पर थे और लगातार गश्ती कर रहे थे। इसी बीच यह हमला हुआ जिससे साफ है कि यह एक सुनियोजित नक्सली साजिश थी। ये हमला भारत बंद के पहले डर का माहौल फैलाने के लिए किया गया था।
घायल जवानों की हालत कैसी है?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घायलों में कुछ जवानों की हालत गंभीर बनी हुई है जबकि अन्य खतरे से बाहर हैं। सभी को कोंटा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ को रायपुर रेफर करने की तैयारी की जा रही है ताकि बेहतर इलाज मिल सके।
नक्सलियों के खिलाफ तेज़ हुआ सर्च ऑपरेशन
हमले के बाद बस्तर डिवीजन में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। अतिरिक्त सुरक्षाबल मौके पर भेजे गए हैं और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। पुलिस को अंदेशा है कि इलाके में और भी IED बिछाए गए हो सकते हैं, इसलिए बम निरोधक दस्ते को भी लगाया गया है।
पिछले एक महीने में दूसरा बड़ा हमला
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में बीजापुर और दंतेवाड़ा में भी नक्सली हमले देखने को मिले थे। ये घटनाएं यह दिखाती हैं कि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है और वे समय-समय पर इस तरह के हमलों से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहते हैं।
सरकार और प्रशासन से सवाल
इस घटना ने राज्य सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी झकझोर दिया है। विपक्ष ने भी इस हमले पर सवाल उठाते हुए सरकार की नक्सल नीति पर सवाल उठाया है। शहीद हुए ASP के परिजनों को क्या मुआवज़ा मिलेगा? क्या सरकार अब नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगी? ये सवाल अब खड़े हो चुके हैं।
जनता में आक्रोश, सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि
इस हमले के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने शहीद ASP को श्रद्धांजलि दी है। ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर #RIPASPakashRao ट्रेंड कर रहा है। कई नेताओं और आम जनता ने इस हमले की निंदा की है और सरकार से कठोर कार्रवाई की मांग की है।
Shubhanshu Shukla Axiom-4 मिशन से भारत की अंतरिक्ष में नई छलांग
Shubhanshu Shukla Axiom-4 मिशन Iss जाने वाले पहले भारतीय, गगनयान की ओर भारत की बड़ी छलांग 63
नई दिल्ली/केनेडी स्पेस सेंटर: “नमस्ते, मैं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला हूं…” – इन गर्व भरे शब्दों से शुरू होता है भारत के एक और अंतरिक्ष इतिहास का नया अध्याय। भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट शुभांशु शुक्ला अब अंतरिक्ष की उस यात्रा पर निकलने वाले हैं, जो सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि भारत की सामूहिक आकांक्षाओं का प्रतीक है। 10 जून 2025 को Axiom Space द्वारा संचालित Axiom-4 मिशन के तहत वह स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से अंतरिक्ष की ओर रवाना होंगे।
कौन हैं शुभांशु शुक्ला?
39 वर्षीय शुभांशु शुक्ला उत्तर प्रदेश के लखनऊ में जन्मे हैं। साल 2006 में उन्हें भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला था और तब से अब तक उन्होंने 2,000 से अधिक उड़ान घंटे का अनुभव हासिल किया है। उन्होंने मिग-21, सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29, जगुआर, हॉक, डॉर्नियर और AN-32 जैसे कई युद्धक और परिवहन विमानों की उड़ान भरी और परीक्षण किया है।
शुक्ला 15 वर्षों तक एक कॉम्बैट और टेस्ट पायलट रहे हैं। उन्होंने रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में भी प्रशिक्षण लिया है और अब वह अंतरिक्ष में कदम रखने वाले राकेश शर्मा के बाद दूसरे भारतीय नागरिक बनने जा रहे हैं।
क्या है Axiom-4 मिशन?
Axiom-4 एक व्यावसायिक मिशन है जिसे Axiom Space द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसमें अंतरिक्ष यात्री SpaceX के क्रू ड्रैगन यान (C213) के माध्यम से ISS (International Space Station) तक की यात्रा करेंगे। यह मिशन फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा और करीब 28 घंटे की यात्रा के बाद ISS से जुड़ेगा। शुक्ला समेत चार सदस्य इस मिशन में हिस्सा लेंगे और ISS पर लगभग 14 दिन बिताएंगे।
मिशन को क्यों कहा जा रहा है “मिशन आकाश गंगा”?
भारतीय मीडिया और ISRO से जुड़े सूत्रों ने इस मिशन को “मिशन आकाश गंगा” का नाम दिया है। यह केवल एक तकनीकी मिशन नहीं, बल्कि भारत की भावनात्मक और वैज्ञानिक उन्नति की उड़ान है। इस मिशन से जुड़ी सबसे बड़ी बात यह है कि यह भारत को गगनयान जैसे स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के लिए आवश्यक अनुभव देगा।
भारत के लिए क्यों है शुभांशु का मिशन अहम?
इस मिशन से भारत दो बड़े रिकॉर्ड बना रहा है:
शुभांशु शुक्ला, ISS पर जाने वाले पहले भारतीय नागरिक होंगे।
वे राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में कदम रखने वाले दूसरे भारतीय होंगे।
लेकिन इन तथ्यों से भी परे, यह मिशन भारत के गगनयान प्रोग्राम के लिए एक प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का काम करेगा। ISRO पहले ही यह संकेत दे चुका है कि शुभांशु शुक्ला गगनयान मिशन के लिए एक मजबूत उम्मीदवार हैं। Axiom-4 से मिलने वाला अनुभव भारत के अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने के लिए बेहद अहम साबित होगा।
गगनयान मिशन से कैसे जुड़ा है Axiom-4?
भारत की पहली मानवयुक्त उड़ान, गगनयान, 2027 में लॉन्च होने की योजना है। इस उड़ान से पहले ISRO दो मानवरहित मिशन लॉन्च करेगा, जिसमें अंतरिक्ष यात्रा की परिस्थितियों को परीक्षण किया जाएगा। Axiom-4 मिशन शुभांशु शुक्ला को जो अनुभव देगा, वह न केवल गगनयान की योजना में मदद करेगा, बल्कि क्रू सुरक्षा, माइक्रोग्रैविटी ट्रेनिंग, मिशन कंट्रोल सहयोग जैसे पहलुओं पर भी भारत को दिशा देगा।
शुभांशु की सोच: 1.4 अरब भारतीयों की उड़ान
शुक्ला ने अपने संदेश में कहा है:
“मुझे विश्वास है कि यह सिर्फ मेरी यात्रा नहीं है, बल्कि 1.4 अरब भारतीयों की है। मुझे उम्मीद है कि इससे देश में विज्ञान, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के प्रति नया जोश पैदा होगा।”
उनकी इस भावना ने देशभर में वैज्ञानिक सोच को एक नई ऊर्जा दी है। बच्चों और युवाओं के लिए वे एक प्रेरणा बनकर उभरे हैं।
भारत की अंतरिक्ष रणनीति को मिलेगा बल
Axiom-4 मिशन को भारत के अंतरिक्ष विभाग ने “रणनीतिक महत्व” का बताया है। यह केवल अनुभव या रिकॉर्ड की बात नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के मिशन जैसे अंतरिक्ष स्टेशन (2035 तक), चंद्र मानव मिशन (2040 तक) की तैयारियों का हिस्सा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत सरकार ने इस मिशन के लिए 60 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है।
राकेश शर्मा के बाद चार दशक में पहली अंतरिक्ष छलांग
1984 में राकेश शर्मा रूस के Soyuz-T11 मिशन के तहत अंतरिक्ष गए थे। इसके बाद भारत के किसी भी नागरिक ने अंतरिक्ष में कदम नहीं रखा। शुभांशु शुक्ला अब उस अंतराल को समाप्त कर रहे हैं। अंतरिक्ष विभाग के मुताबिक, शुक्ला का मिशन देश के लिए “नए युग की शुरुआत” है।
ISS पर 14 दिन: क्या सीखेंगे भारतीय यात्री?
शुभांशु शुक्ला ISS पर करीब 2 हफ्ते बिताएंगे। इस दौरान वे माइक्रोग्रैविटी में बॉडी बिहेवियर, फिजिकल और साइकोलॉजिकल इफेक्ट्स, कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम जैसे कई पहलुओं पर अध्ययन करेंगे। ये सभी अनुभव गगनयान क्रू ट्रेनिंग के लिए अमूल्य साबित होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी का भविष्य विज़न
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से यह कहा है कि भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने 2035 तक भारत का खुद का स्पेस स्टेशन और 2040 तक चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने का लक्ष्य तय किया है। शुभांशु शुक्ला की उड़ान उस विज़न की पहली कड़ी है।
Thane Local Train Accident चलती लोकल ट्रेन से गिरकर 5 की मौत, कई घायल
मुंबई/ठाणे: सोमवार सुबह मुंबई के उपनगरीय इलाके ठाणे में एक दर्दनाक रेल हादसा हुआ। चलती लोकल ट्रेन से गिरकर पांच यात्रियों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। यह हादसा दीवा और मुंब्रा रेलवे स्टेशन के बीच हुआ, जहां अत्यधिक भीड़ के चलते यात्री ट्रेन के दरवाजों से लटककर यात्रा कर रहे थे। इस भयानक घटना ने लोकल ट्रेन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसा कब और कहां हुआ?
Thane Local Train Accident मुंबई में 5 यात्रियों की मौत, चलती ट्रेन से गिरे लोग 73
हादसा सुबह के व्यस्ततम समय में हुआ, जब अधिकतर लोग अपने ऑफिस और काम पर जाने के लिए लोकल ट्रेनों में सफर कर रहे थे। दीवा और मुंब्रा के बीच की दूरी महज कुछ किलोमीटर है, लेकिन इसी दौरान ट्रेन में सवार कई यात्री गिर गए। इनमें से पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य को गंभीर अवस्था में अस्पताल ले जाया गया।
ट्रेन में भीड़ थी या प्रशासन की लापरवाही?
Thane Local Train Accident मुंबई में 5 यात्रियों की मौत, चलती ट्रेन से गिरे लोग 74
इस हादसे की मुख्य वजह ट्रेन में अत्यधिक भीड़ बताई जा रही है। जिस समय यह घटना हुई, ट्रेन में जगह नहीं होने के कारण दर्जनों यात्री दरवाजों और फुटबोर्ड पर लटककर सफर कर रहे थे। रेलवे प्रशासन की ओर से अब तक यही माना गया है कि भीड़ के कारण यात्री असंतुलित होकर ट्रेन से गिर गए।
एक चश्मदीद ने बताया:
“ट्रेन में चढ़ने की कोई जगह नहीं थी। लोग दरवाजे पर लटके हुए थे। अचानक धक्का लगा और कई लोग एक साथ गिर पड़े। कुछ लोग पटरी के किनारे गिरते ही बेहोश हो गए, कुछ की मौके पर ही मौत हो गई।”
घायलों का इलाज और स्थिति
इस हादसे में घायल लोगों को कलवा स्थित सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम घायलों का इलाज कर रही है। कुछ घायलों की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जिनका ICU में इलाज चल रहा है। हालांकि मृतकों की पहचान फिलहाल नहीं की गई है।
सेंट्रल रेलवे का बयान
सेंट्रल रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि,
“सुबह लगभग 9 बजे के आसपास दीवा और मुंब्रा के बीच कुछ यात्री अत्यधिक भीड़ के कारण चलती ट्रेन से गिर गए। हमनें तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। लोकल सेवाओं को बहाल करने की कोशिश की जा रही है।”
रेलवे ने पुष्टि की है कि घटना के बाद कुछ समय के लिए ट्रैक पर यातायात बाधित रहा, जिससे लोकल ट्रेनें देरी से चलीं और ऑफिस जाने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मुंबई लोकल की क्रोनिक समस्या: भीड़
मुंबई की लोकल ट्रेनें हर दिन करीब 80 लाख यात्रियों को ढोती हैं। लेकिन पीक आवर्स यानी सुबह 7 से 11 बजे और शाम 5 से 9 बजे के बीच ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ होती है। इस दौरान दरवाजों पर लटकना और प्लेटफॉर्म से ट्रेन में कूदना आम बात हो चुकी है। हालांकि रेलवे ने पिछले कुछ वर्षों में कई प्रयास किए हैं, लेकिन यात्री भार के मुकाबले सुविधाएं अभी भी नाकाफी हैं।
रेलवे सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस हादसे पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और रेलवे से यह मांग कर रहे हैं कि ट्रेन की संख्या बढ़ाई जाए, डिब्बों की संख्या में इज़ाफा किया जाए और ऑटोमैटिक डोर सिस्टम लागू किया जाए।
एक ट्विटर यूजर ने लिखा:
“मुंबई लोकल में हर दिन मौत का खतरा लेकर सफर करते हैं। कब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे? रेलवे को जल्द सुधार करना होगा।”
महाराष्ट्र सरकार और रेलवे मंत्रालय पर दबाव
घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार और केंद्रीय रेलवे मंत्रालय दोनों पर दबाव बना है कि वे इस मामले में न केवल जांच कराएं, बल्कि मुंबई लोकल में सुधारात्मक कदम भी उठाएं। विपक्षी दलों ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह हादसा लापरवाही का नतीजा है।
हादसों के आंकड़े और पिछली घटनाएं
मुंबई में इस तरह के हादसे पहले भी हो चुके हैं। साल 2023 में रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, केवल मुंबई सेंट्रल डिवीजन में ही 2500 से ज्यादा लोग लोकल ट्रेन हादसों में मारे गए थे। इनमें से ज्यादातर मौतें ट्रेन से गिरने या पटरी पार करते समय हुईं।
क्या है आगे की राह?
रेलवे और प्रशासन को अब यह तय करना होगा कि मुंबई लोकल की बढ़ती समस्याओं को कैसे हल किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़ को कम करने के लिए वैकल्पिक परिवहन जैसे मेट्रो को बढ़ावा देना चाहिए। इसके साथ ही लोकल ट्रेन में सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
Raja Raghuvanshi Murder सोनम की गिरफ्तारी से उठा संदेह, परिजनों ने मांगी CBI जांच
भोपाल/शिलॉन्ग: राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की शादी 11 मई को इंदौर में हुई थी। शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों 20 मई को असम के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर के दर्शन के लिए रवाना हुए और फिर 23 मई को मेघालय के शिलॉन्ग पहुंचे। लेकिन 24 मई से ही दोनों के मोबाइल बंद हो गए। इसके बाद परिवार का संपर्क टूट गया और चिंता का माहौल बन गया।
राजा का शव मिला, सोनम लापता थी
24 मई को आखिरी बार दोनों की बात परिजनों से हुई थी। जब कई प्रयासों के बावजूद संपर्क नहीं हो पाया, तो सोनम के भाई गोविंद और राजा के भाई विपिन तुरंत फ्लाइट से शिलॉन्ग पहुंचे। वहां पुलिस और NDRF ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया। 8 दिन बाद राजा का शव एक गहरी खाई में बरामद हुआ, जबकि सोनम का कोई पता नहीं चल पाया।
गाजीपुर में सोनम मिली, पुलिस ने किया गिरफ्तार
इस हाई-प्रोफाइल केस में सोमवार को बड़ा मोड़ तब आया जब सोनम को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एक ढाबे से जिंदा बरामद कर लिया गया। पुलिस ने उसे रात में काशी ढाबे से ढूंढ निकाला और प्राथमिक उपचार के बाद वन स्टॉप सेंटर में शिफ्ट किया गया। फिलहाल, मामले की जांच मेघालय और मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही है।
राजा के भाई अर्पित बोले – “अगर सोनम जिंदा थी तो पहले सामने क्यों नहीं आई?”
एनडीटीवी से बात करते हुए राजा रघुवंशी के भाई अर्पित चौहान ने कहा,
“अगर सोनम जिंदा थी, तो इतने दिन तक वह कहां थी? हमें कभी नहीं लगा कि सोनम ऐसी किसी घटना में शामिल हो सकती है, लेकिन अब उसके जीवित मिलने पर सवाल जरूर उठते हैं। राजा से मेरी 21 से 23 तारीख के बीच बात हुई थी, लेकिन उसने कभी किसी और शख्स के साथ होने की जानकारी नहीं दी थी।”
उन्होंने आगे कहा,
“राजा और सोनम की शादी सामाजिक रिश्ता थी। सोनम का परिवार भी अच्छा था, लेकिन अब यह एक गंभीर आपराधिक मामला बन चुका है। इस मामले में सभी दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।”
सोनम के साथ तीन और गिरफ्तार
पुलिस ने पुष्टि की है कि सोनम के साथ तीन और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि ये लोग कौन हैं और सोनम के साथ कैसे जुड़े थे। राजा के भाई का कहना है कि वे इन लोगों को नहीं जानते।
सचिन रघुवंशी बोले – “अब सारी सच्चाई सोनम के पास है”
राजा के बड़े भाई सचिन ने कहा कि अब पूरी सच्चाई सोनम के पास है।
“सवाल ये है कि वो शिलॉन्ग से यूपी के गाजीपुर कैसे पहुंची। इसका जवाब वो ही दे सकती है। हम सोनम के परिवार को ढाई महीने से ही जानते थे, पहले कोई रिश्ता नहीं था।”
सीबीआई जांच की मांग, सरकार भी दबाव में
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी सीबीआई जांच की मांग की थी। मेघालय पुलिस पर भी इस केस को जल्द सुलझाने का दबाव था, क्योंकि मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था।
यूपी पुलिस ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि सोनम (24), पुत्री देवी सिंह रघुवंशी, निवासी गोविंदनगर खाड़सा, इंदौर को गाजीपुर में एक ढाबे से बरामद किया गया। उसे प्राथमिक उपचार के बाद वन स्टॉप सेंटर भेजा गया। पुलिस ने साफ कर दिया कि केस की जांच यूपी पुलिस नहीं करेगी, यह जिम्मेदारी मेघालय और एमपी पुलिस की है।
केस से जुड़े कुछ अहम सवाल
सोनम इतने दिन तक कहां थी?
क्या राजा की हत्या एक पूर्व-नियोजित साजिश थी?
क्या सोनम इस साजिश में शामिल थी या किसी दबाव में थी?
गाजीपुर तक उसकी पहुंच कैसे हुई?
जो अन्य लोग गिरफ्तार हुए हैं, उनका इस केस में क्या रोल है?
Bihar Fake Police : नौकरी के नाम पर बना डाले 300 से ज्यादा फर्जी पुलिसकर्मी
बिहार हमेशा से अपने अनोखे और चौंकाने वाले मामलों के लिए चर्चा में रहा है। लेकिन इस बार जो मामला सामने आया है, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। पूर्णिया जिले में एक शातिर ठग ने युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर न सिर्फ उनसे लाखों की ठगी की बल्कि उन्हें फर्जी पुलिस बनाकर क्षेत्र में तैनात भी कर दिया।
ये मामला उन लोगों के लिए आंख खोलने वाला है जो सरकारी नौकरी के लिए शॉर्टकट अपनाने की सोचते हैं। इसमें एक मास्टरमाइंड ने फिल्म ‘स्पेशल 26’ की तर्ज पर स्कीम चलाई, जहां बेरोजगार युवाओं को ग्राम रक्षा दल (Village Defense Corps) और दलपति के पद पर नौकरी का झांसा देकर ठग लिया गया।
कैसे सामने आया फर्जी पुलिस गैंग का पर्दाफाश?
इस गोरखधंधे का खुलासा तब हुआ जब ठगी के शिकार कई युवक-युवतियां मास्टरमाइंड राहुल कुमार साह के घर पहुंच गए और अपनी दी गई रकम वापस मांगने लगे। इस अफरा-तफरी के बीच राहुल वहां से फरार हो गया।
पीड़ितों ने बताया कि पिछले एक साल से ज्यादा समय से राहुल कसबा थाना क्षेत्र के नेमा टोल में फर्जी भर्ती अभियान चला रहा था। वह लोगों को बता रहा था कि वे बिहार ग्राम रक्षा दल और दलपति में सिपाही या चौकीदार की सरकारी नौकरी पा सकते हैं—बस 10,000 रुपये देने होंगे।
ऐसे बनाई जाती थी फर्जी पुलिस फोर्स
राहुल कुमार ने लोगों से पैसे लेने के बाद उन्हें न केवल फर्जी पहचान पत्र दिए, बल्कि खाकी वर्दी और लाठियां भी उपलब्ध कराईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इन युवक-युवतियों को बाकायदा वाहनों की चेकिंग और शराब के खिलाफ कार्रवाई में लगाया गया।
इन युवाओं को यह बताया गया:
Bihar Fake Police : 'फर्जी स्पेशल 26' का खुलासा नौकरी का झांसा देकर बनाए गए नकली पुलिस अधिकारी 88
वे अब ग्राम रक्षा दल में भर्ती हो चुके हैं
उन्हें हर महीने ₹22,000 की सैलरी मिलेगी
कुछ हफ्तों की ट्रेनिंग के बाद उनका स्थायी चयन होगा
उन्हें एक स्कूल भवन में अस्थायी पुलिस चौकी का काम दिया गया
असली पुलिस को भी नहीं था शक
गांव और आसपास के क्षेत्र में फर्जी चौकी इस तरह स्थापित की गई थी कि आम जनता को ही नहीं, कभी-कभी असली पुलिस को भी इनकी असलियत पर शक नहीं हुआ। वहीं, युवाओं को भी यकीन हो गया था कि वे सरकारी कर्मचारी बन चुके हैं।
क्या काम कराए जाते थे इनसे:
गश्ती ड्यूटी
ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों की चेकिंग
शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई
नकली चालान काटना
वसूली करना
ठगी का पूरा तंत्र: एक संगठित नेटवर्क
पैसा जमा कराने की प्रक्रिया:
पहला भुगतान: ₹10,000 – नामांकन और पहचान पत्र के नाम पर
दूसरा भुगतान: ₹5,000 – वर्दी, पहचान पत्र, और ट्रेनिंग के नाम पर
बाद में और भी पैसे मांगे जाते थे प्रमोशन या स्थायी नियुक्ति के नाम पर
मास्टरमाइंड को कितना फायदा हुआ?
जानकारी के मुताबिक, राहुल कुमार साह ने अब तक 300 से ज्यादा युवक-युवतियों से 10,000 से लेकर 15,000 रुपये तक की वसूली की है। इसके अलावा, कथित गश्त के दौरान हुई वसूली में भी मोटी रकम कमाई गई।
फर्जी पुलिस द्वारा की गई वसूली और चालान
गांवों में चल रहे इस फर्जी नेटवर्क में वाहन चालकों से चालान के नाम पर वसूली की जाती थी। यदि 1,000 रुपये का चालान काटा जाता, तो 200 रुपये फर्जी पुलिसकर्मी को दिए जाते और शेष 800 रुपये मास्टरमाइंड के पास जाते।
शराब के मामलों में क्या होता था?
ग्रामीण क्षेत्रों में फर्जी पुलिस शराब पकड़ते थे
फिर मोटी रकम लेकर माफियाओं को छोड़ देते थे
ये सारा पैसा सीधे राहुल के पास पहुंचता था
कैसे ठगी का शिकार बने युवक?
इन सभी युवक-युवतियों की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और वे जल्द से जल्द नौकरी पाना चाहते थे। राहुल जैसे लोगों की वजह से न केवल उनके पैसे डूबे, बल्कि वे कानूनी पचड़े में भी फंस सकते हैं। वे खुद नहीं जानते थे कि जिन जिम्मेदारियों को वे निभा रहे हैं, वे गैरकानूनी हैं।
क्या कार्रवाई की गई?
जब ये मामला उजागर हुआ, तो कसबा थाना पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने फर्जी चौकी को सील कर दिया है और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। वहीं, आरोपी राहुल कुमार साह की तलाश की जा रही है जो फरार हो चुका है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार:
मामले में जल्द गिरफ्तारियां हो सकती हैं
जिन युवाओं को वर्दी दी गई थी, उनसे भी पूछताछ की जा रही है
राहुल का मोबाइल फोन स्विच ऑफ है और लोकेशन ट्रेस की जा रही है
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
यह पूरी योजना एक साल से अधिक समय तक चलती रही, लेकिन किसी भी स्थानीय अधिकारी ने संदेह तक नहीं जताया। ना ही किसी तरह की वैरिफिकेशन की गई और ना ही स्कूल में चल रही फर्जी चौकी पर ध्यान दिया गया।
इससे प्रशासनिक लापरवाही भी सामने आती है, जो भविष्य में ऐसे अपराधों को बढ़ावा दे सकती है।
Child Actress IAS H.S. कीर्थाना की कहानी बचपन में स्टारडम, जवानी में संघर्ष, और अब एक प्रेरणा
फिल्मों की दुनिया को ग्लैमर और स्टारडम से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इस चकाचौंध को पीछे छोड़ अपने सपनों की सच्ची राह चुनते हैं। ऐसा ही एक नाम है IAS अधिकारी H.S. कीर्थाना का, जिन्होंने चार साल की उम्र में एक्टिंग शुरू की, दर्जनों फिल्मों में काम किया, और फिर अचानक ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कह दिया।
एक्टिंग से यूपीएससी तक का सफर
H.S. कीर्थाना का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ था, लेकिन उनकी पहचान बचपन में ही एक बेहतरीन चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में बन गई थी। चार साल की उम्र में कैमरे के सामने आने वाली कीर्थाना ने कर्पूरदा गोम्बे, गंगा-यमुना, ओ मल्लिगे, लेडी कमिश्नर, सिम्हाद्रि और जननी, पुतानी एजेंट जैसी दर्जनों फिल्मों और टीवी शोज़ में काम किया।
वो साउथ इंडस्ट्री की जानी-पहचानी चेहरा बन चुकी थीं, लेकिन जब उन्होंने तय किया कि अब वह एक IAS ऑफिसर बनेंगी, तो लोगों को हैरानी हुई। बहुतों ने सोचा कि यह एक असंभव फैसला है, लेकिन उन्होंने साबित कर दिखाया कि मेहनत, आत्मविश्वास और लगन से कुछ भी मुमकिन है।
क्यों छोड़ी एक्टिंग?
Child Actress एक्टिंग छोड़ बनीं Ias ऑफिसर जानिए H.s. कीर्थाना की संघर्ष भरी कहानी 100
एक इंटरव्यू में कीर्थाना ने बताया था कि फिल्मों में काम करते हुए भी उनके मन में समाज सेवा की इच्छा हमेशा रही। वे एक ऐसी भूमिका निभाना चाहती थीं, जिससे देश के लिए कुछ कर सकें। उन्हें महसूस हुआ कि UPSC जैसी परीक्षा के ज़रिए वे प्रशासन में आकर बदलाव ला सकती हैं। इसीलिए उन्होंने एक्टिंग को पूरी तरह अलविदा कहा और खुद को UPSC की तैयारी में झोंक दिया।
छह प्रयास, असफलता, और अंततः सफलता
कीर्थाना ने अपने पहले पांच प्रयासों में UPSC क्लियर नहीं किया। हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। साल 2020 में, अपने छठे प्रयास में उन्होंने 167वीं रैंक हासिल की और IAS अधिकारी बन गईं।
Child Actress एक्टिंग छोड़ बनीं Ias ऑफिसर जानिए H.s. कीर्थाना की संघर्ष भरी कहानी 101
यह साबित करता है कि जीवन में असफलताएं आपको परिभाषित नहीं करतीं, बल्कि आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति ही आपकी असली पहचान बनती है।
फिल्मों में की धमाकेदार एक्टिंग
Child Actress एक्टिंग छोड़ बनीं Ias ऑफिसर जानिए H.s. कीर्थाना की संघर्ष भरी कहानी 102
यूं तो कीर्थाना ने टीवी और फिल्म दोनों में ही शानदार काम किया है, लेकिन बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट उनके किरदार आज भी लोगों को याद हैं। साउथ इंडस्ट्री में उनकी मासूमियत, संवाद अदायगी और कैमरे के सामने आत्मविश्वास की लोग मिसाल देते थे।
प्रमुख फिल्में और शो:
कर्पूरदा गोम्बे
गंगा-यमुना
मुदीना आलिया
कनूर हेग्गादती
ओ मल्लिगे
लेडी कमिश्नर
हब्बा
डोरे
सर्कल इंस्पेक्टर
पुतानी एजेंट
चिगुरु
इन सभी में उन्होंने अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं और खुद को एक वर्सेटाइल एक्ट्रेस के तौर पर स्थापित किया।
पढ़ाई और UPSC की तैयारी
Child Actress एक्टिंग छोड़ बनीं Ias ऑफिसर जानिए H.s. कीर्थाना की संघर्ष भरी कहानी 103
एक्टिंग छोड़ने के बाद कीर्थाना ने अपने शिक्षकों और गाइड्स की मदद से यूपीएससी की तैयारी शुरू की। उन्होंने दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में कोचिंग ली और खुद को पूरी तरह पढ़ाई में समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि एक्टिंग में जो अनुशासन उन्होंने सीखा था, वही उन्हें पढ़ाई में काम आया।
परिवार का समर्थन बना ताकत
कीर्थाना की इस अनोखी यात्रा में उनके परिवार का समर्थन अहम रहा। जहां कुछ लोग फिल्मी करियर छोड़ने के फैसले को मूर्खता मानते, वहीं उनके माता-पिता ने उनका साथ दिया। उन्होंने अपनी बेटी की मेहनत पर विश्वास रखा और यही भरोसा आज IAS अधिकारी बनने में मददगार साबित हुआ।
देश की सेवा को बताया सबसे बड़ा मंच
H.S. कीर्थाना आज कर्नाटक कैडर की एक ईमानदार और लोकप्रिय IAS अधिकारी हैं। वे मानती हैं कि देश की सेवा करना ही सबसे बड़ा मंच है। एक्टिंग की दुनिया में उन्हें पहचान मिली, लेकिन सच्ची संतुष्टि अब उन्हें लोगों की मदद करने में मिलती है।
प्रेरणा बनीं लाखों युवाओं के लिए
आज कीर्थाना उन युवाओं के लिए रोल मॉडल हैं जो फिल्म, म्यूजिक या किसी अन्य ग्लैमरस फील्ड में होने के बावजूद प्रशासनिक सेवाओं में आना चाहते हैं। वह दिखाती हैं कि कोई भी रास्ता नामुमकिन नहीं होता, अगर उसमें मेहनत, लगन और आत्मविश्वास हो।