संक्षेप (Summary) Bihar elections 2025 में NDA की डबल सेंचुरी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में पहुंचकर मधुबनी प्रिंट वाला गमछा लहराया। यह सिर्फ जीत का जश्न नहीं, बल्कि बिहार के किसान-मजदूर और मेहनतकश लोगों के प्रति एक राजनीतिक संदेश था। मोदी का गमछा लहराना बिहार की सांस्कृतिक पहचान को सलाम करने जैसा है। NDA की रिकॉर्ड जीत के बीच यह जेस्चर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राजनीतिक रूप से इसे जनता से गहरे भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक माना जा रहा है।
Bihar elections में NDA की डबल सेंचुरी पर PM मोदी ने लहराया गमछा—इसमें छिपे हैं बड़े सियासी मायने
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA ने इतिहास रचते हुए 200 से ज्यादा सीटें जीत लीं। इस प्रचंड जीत के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचे, तो वहां का माहौल किसी उत्सव से कम नहीं था। “मोदी-मोदी” के नारों के बीच पीएम मोदी ने कार से उतरते ही हाथ में रखा मधुबनी प्रिंट वाला गमछा लहराया, और यही दृश्य सोशल मीडिया पर छा गया।
लेकिन यह महज एक जेस्चर नहीं था—यह एक गहरा राजनीतिक संदेश था।
बिहार में गमछा सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि परिश्रम, ग्रामीणता, मेहनतकश पहचान और किसान-मजदूर वर्ग का प्रतीक माना जाता है।
आइए समझते हैं कि इस गमछे में आखिर कौन-सा राजनीतिक संदेश छुपा है और पीएम मोदी इसे बार-बार क्यों लहराते दिखाई देते हैं।

PM मोदी ने जैसे ही बीजेपी मुख्यालय पहुंचकर गमछा लहराया, माहौल गूंज उठा
दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में हजारों की भीड़ इंतजार कर रही थी।
मोदी जैसे ही पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ पहुंचे:
- मोदी-मोदी के नारे गूंजने लगे
- पार्टी कार्यकर्ताओं का जोश आसमान पर था
- उसी बीच PM ने कार से उतरते ही गमछा लहराकर सबका अभिवादन किया
यह दृश्य ना सिर्फ जीत का प्रतीक था, बल्कि यह संदेश भी था कि ये जीत जनता की जीत है—मेहनतकश बिहार की जीत।
बिहार में गमछा क्यों होता है इतना बड़ा प्रतीक?
गमछे को बिहार में हमेशा से किसान और मजदूर वर्ग की पहचान माना गया है।
गांवों में:
- खेतों में काम करते किसान
- धूप में मजदूरी करते लोग
- सफर पर निकलते ग्रामीण
- और यहां तक कि राजनीतिक रैलियों में शामिल लोग भी
गमछा सिर पर, कंधे पर या हाथ में रखते हैं।
यह तमाम चीजें गमछे को सामान्य आदमी की पहचान बनाती हैं।
इसलिए जब पीएम मोदी गमछा लहराते हैं, तो वह एक संदेश देते हैं:

“मैं आपके साथ हूं। मैं भी वही पहनता हूं जो आप पहनते हैं। मैं जमीन से जुड़ा नेता हूं।”
31 अक्टूबर—मुजफ्फरपुर में भी लहराया था यह गमछा, वीडियो हुआ था वायरल
बिहार चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी जब मुजफ्फरपुर पहुंचे थे, तो हेलीकॉप्टर से उतरते ही उन्होंने मधुबनी प्रिंट वाला वही गमछा लगभग 30 सेकंड तक हवा में लहराया था।
- यह वीडियो लाखों बार देखा गया
- लोग इसे “Bihar connect” और “modi wave” कहकर शेयर कर रहे थे
- यह भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गया
स्पष्ट है—मोदी का गमछा चुनावी रणनीति से कहीं ज्यादा जनता से भावनात्मक कनेक्शन का प्रतीक बन चुका है।

PM मोदी का ‘गमछा जेस्चर’—मेहनतकश वर्ग के साथ एकजुटता का संदेश
गमछा भारतीय समाज में हमेशा से प्रतीक रहा है:
- सम्मान का
- मेहनत का
- सादगी का
- ग्रामीण जीवन का
इसलिए जब प्रधानमंत्री इसे लहराते हैं, तो इसका मतलब सिर्फ “अभिवादन” नहीं होता।
यह होता है:
किसानों को संदेश
मजदूरों से जुड़ाव
ग्रामीण समाज के साथ एकजुटता
बिहार की अस्मिता को सलाम
बिहार में यह जेस्चर बेहद प्रभावी माना जाता है क्योंकि यहां हर घर में गमछा संस्कृति का हिस्सा है।
पहले भी कई मौकों पर दिखा है मोदी का गमछा कनेक्शन
यह पहला मौका नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी ने गमछा लहराया है।
अगस्त 2024 — औंता-सिमरिया पुल का उद्घाटन
उस समय भी उन्होंने लोगों का अभिवादन गमछा लहराकर किया था।
कई चुनावी रैलियों में ग्रामीण गमछे का इस्तेमाल
वे अक्सर इसे कंधे पर रखकर मंच पर आते हैं।
यह लगातार दर्शाता है कि मोदी खुद को जनता से जोड़े रखने के लिए प्रतीकात्मक चीजों का इस्तेमाल बहुत प्रभावी तरीके से करते हैं।
NDA की बंपर जीत—PM मोदी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए खुशी का बड़ा मौका
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रुझान बताते हैं कि:
- BJP 197 सीटों पर आगे
- JDU 79 सीटों पर आगे
- LJP(R) 21 सीटों पर
- HAM 5 सीटों पर
- RLSP 3 सीटों पर
इस तरह NDA 200 से भी अधिक सीटें जीतते हुए डबल सेंचुरी कर चुका है।
यह जीत 2010 के बाद NDA की सबसे बड़ी जीत है।
बीजेपी मुख्यालय में उसी खुशी की झलक पीएम मोदी के गमछा लहराने वाले जेस्चर में भी साफ दिखी।
गमछा लहराकर मोदी ने जो संदेश दिया, वह सिर्फ एक संकेत नहीं—एक रणनीति है
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार:
यह ग्रामीण और गरीब वर्ग को सीधा संदेश था
NDA की जीत को “जनता की जीत” बताया गया
विपक्ष के “जंगलराज” नैरेटिव को जवाब मिला
किसान और श्रमिक वर्ग के बीच मोदी की लोकप्रियता को मजबूती मिली
कई विश्लेषकों का कहना है कि यह गमछा जेस्चर आने वाले लोकसभा चुनाव में भी सियासी प्रतीक की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
बीजेपी मुख्यालय में भीड़ में दिखे लोग—सबने गमछा उठाकर किया मोदी का स्वागत
मोदी के गमछा लहराते ही:
- कार्यकर्ताओं ने भी अपने-अपने गमछे निकाले
- पूरा माहौल उत्सव जैसा हो गया
- जय श्रीराम, मोदी-मोदी और NDA जिंदाबाद के नारे गूंजने लगे
यह दृश्य साबित करता है कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान अब बीजेपी की राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है।
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