Tuesday, February 3, 2026

Nitish के काम और मोदी के विजन की लहर—कैसे ढेर हुए तेजस्वी? आंकड़े बता रहे पूरी कहानी | Bihar Election 2025

by Sujal
Nitish बिहार चुनाव 2025 में NDA की ऐतिहासिक जीत के पीछे छिपे बड़े कारण—नीतीश कुमार की योजनाएं, मोदी का विजन, महिलाओं का रिकॉर्ड मतदान और दलित–EBC वोट बैंक का पूरा समर्थन। जानिए कैसे तेजस्वी यादव और महागठबंधन चुनाव में ढेर हुए।

संक्षेप (Summary)  NDA की जीत साधारण नहीं—यह नीतीश के सुशासन और मोदी के विकास के भरोसे की जीत है।महिलाओं, EBC–दलित वोटरों और लाभार्थी योजनाओं ने मिलकर 200+ सीटें दिलाईं।
महागठबंधन देरी, असंगठन और अस्थिर नेतृत्व की वजह से ढेर हो गया।

Nitish के काम और मोदी के विजन के आगे कुछ ऐसे ढेर हुए तेजस्वी, आंकड़े दे रहे गवाही

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Nitish बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर दिखा दिया कि राजनीति में काम, विश्वास और स्थिर नेतृत्व ही सबसे बड़ा फैक्टर होता है। NDA ने 200 से अधिक सीटें जीतकर बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है। जबकि दूसरी ओर तेजस्वी यादव की अगुवाई वाला महागठबंधन 40 सीटों के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच पाया।विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में सबसे बड़ी भूमिका नीतीश कुमार की छवि, पीएम मोदी का विजन और महिलाओं–दलितों–EBC की भारी भागीदारी रही। यहां तक कि ऐसे इलाकों में भी NDA आगे रहा, जहां पिछले वर्षों में RJD का वर्चस्व माना जाता था।तो आखिर वह कौन-से कारण थे जिनकी वजह से तेजस्वी यादव और महागठबंधन इस चुनाव में पूरी तरह कमजोर पड़ गए? आइए आंकड़ों और जमीनी संकेतों से इसे समझते हैं।

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NDA की अभूतपूर्व जीत—20 साल सत्ता में रहने के बाद भी नहीं दिखी एंटी-इंकम्बेंसी

बिहार में इस बार जो सबसे बड़ा चौंकाने वाला पहलू दिखा, वह यह था कि:

  • 20 साल से अधिक समय से सत्ता में रही सरकार एंटी-इंकम्बेंसी का शिकार नहीं हुई
  • बल्कि नीतीश कुमार की लोकप्रियता और मजबूत होती दिखाई दी
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विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में इतने लंबे शासन के बाद भी किसी नेता के पक्ष में 200+ सीटें आना दुर्लभ घटना है।

इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

  1. नीतीश कुमार का सुशासन मॉडल
  2. पीएम मोदी का विकास पुरुष वाली छवि

जब जनता ने वोट किया तो यह साफ था कि वे “स्थिरता + विकास” चाहती है, न कि सिर्फ हवा-हवाई वादे।


NDA ने 80% ऐसी सीटें जीतीं जहां वोटिंग 10% से ज्यादा बढ़ी

इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पैटर्न यह है कि:

  • जिन सीटों पर पिछली बार से 10% या उससे अधिक वोटिंग हुई
  • उनमें से 80% सीटें NDA के खाते में चली गईं

वहीं महागठबंधन:

  • सिर्फ 19 सीटों पर जीत सका
  • जिसमें RJD – 14 और कांग्रेस – 8 सीटों पर आगे रही

यह बढ़ी हुई वोटिंग राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सुशासन के प्रति भरोसा मानी जा रही है।

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BJP और JDU—दोनों का स्ट्राइक रेट जबरदस्त

2020 में:

  • BJP – 74 सीटें
  • JDU – 43 सीटें

2025 में तस्वीर बदली:

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  • BJP – 90+ सीटों
  • JDU – 85 सीटों

JDU की सीटें लगभग दोगुनी हो गईं।
यह RJD के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ।


महिलाओं ने बदल दी पूरी तस्वीर—70% से ज्यादा वोटिंग

बिहार की राजनीति में महिलाएं अब निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं।

2010 से लगातार
महिलाएं पुरुषों से अधिक वोट कर रही हैं।

इस बार तो स्थिति और भी स्पष्ट रही:

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  • कई क्षेत्रों में महिला मतदान 70% से भी ऊपर
  • महिलाओं के वोट ने “परिवर्तन” नहीं बल्कि स्थिरता और सुरक्षा को चुना

ये कुछ कारण रहे जिससे महिलाएं नीतीश के साथ दिखीं:

लड़कियों की साइकिल और पोशाक योजना
स्वयं सहायता समूहों को मजबूत आर्थिक आधार
पंचायती राज में 50% आरक्षण
सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण
गेहलोत–बैंक खातों में सीधी आर्थिक सहायता
महिला सुरक्षा और सामाजिक सम्मान

इन सबने महिलाओं को इतना आत्मनिर्भर बनाया कि वे किसी के कहने पर नहीं, अपने निर्णय के आधार पर वोट करने निकलीं।


नीतीश–मोदी बने चुनाव के दो बड़े “फैक्टर”—महागठबंधन बिखरा दिखा

इस चुनाव में NDA को मजबूत करने के पीछे दो प्रमुख चेहरों का बड़ा योगदान रहा—

नीतीश कुमार – भरोसे का चेहरा

स्वास्थ्य पर सवाल और उम्र को लेकर विपक्ष ने तंज कसा, लेकिन जनता ने नैरेटिव को खारिज कर दिया।

नीतीश का प्रशासनिक अनुभव और जमीनी योजनाएँ जनता को भरोसा देती हैं।

पीएम मोदी – विजन और विकास के प्रतीक

डबल इंजन सरकार का संदेश जनता में बहुत प्रभावी रहा।

इसके उलट महागठबंधन:

  • सीट बंटवारे में देर
  • उम्मीदवार चयन में अफरा-तफरी
  • मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का चेहरा देर से तय
  • कई सीटों पर अंदरूनी विवाद

इन सबने विपक्ष को कमजोर किया।


चिराग पासवान बने NDA की जीत का अहम हिस्सा

2020 में चिराग के अलग लड़ने से NDA को कई सीटों का नुकसान हुआ था।
लेकिन इस बार…

  • LJP(R) NDA के साथ आई
  • सीटें भी बढ़ीं
  • युवा और दलित वोट पर अधिक पकड़ बनी

विशेषज्ञ कहते हैं—
“चिराग की वापसी ने NDA को जीत में 15–20 सीटों का अतिरिक्त फायदा दिया।”


EBC, SC-ST और दलित वोट NDA की तरफ झुके

बिहार में जनसंख्या के लिहाज से सबसे बड़ा वोट बैंक है:

EBC
दलित
महादलित

NDA की योजनाएँ इस वर्ग को सीधा लाभ पहुंचाती हैं:

  • उज्ज्वला गैस
  • जनधन खाते
  • शौचालय
  • प्रधानमंत्री आवास
  • सात निश्चय योजना

ग्रामीण क्षेत्रों में इन लाभार्थी योजनाओं ने NDA का आधार बहुत मजबूत कर दिया।


नीतीश की योजनाओं ने जमीन पर किया सीधा असर

इन योजनाओं ने नीतीश को “काम का नेता” साबित किया:

छात्रवृत्ति योजनाएँ

पोशाक और साइकिल योजना

पंचायत में 50% आरक्षण

SHG महिलाओं को आर्थिक शक्ति

सरकारी नौकरी में 33% आरक्षण

उद्यमिता सहायता

जनता ने इन योजनाओं को सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि बदलाव के रूप में देखा।


जंगलराज’ की वापसी के डर ने भी RJD को नुकसान पहुंचाया

NDA ने लगातार जोर देकर कहा कि:

“बिहार जंगलराज में वापस नहीं जाएगा।”

यह संदेश ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गहराई से असर करता दिखा।

वहीं तेजस्वी यादव इस नैरेटिव का ठोस जवाब नहीं दे पाए।

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