Tejashwi Yadav बिहार के युवाओं में तेजस्वी यादव का जलवा जानें क्यों लालू के लाल बन गए हैं युवाओं की पहली पसंद
Tejashwi Yadav बिहार चुनाव 2025 से पहले युवाओं का झुकाव साफ: तेजस्वी यादव बने फेवरिट चेहरा
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में अभी दो दिन बाकी हैं, लेकिन एग्जिट पोल्स ने पहले ही एक स्पष्ट तस्वीर पेश कर दी है — तेजस्वी यादव अब सिर्फ लालू प्रसाद यादव के बेटे नहीं, बल्कि बिहार के युवाओं की आवाज़ बन चुके हैं।
राजनीति में उनकी लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी है कि हर चाय की दुकान और कॉलेज कैंपस में आज सिर्फ एक ही चर्चा है क्या बिहार का अगला मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव होंगे?
कई एग्जिट पोल्स का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि बिहार के 35% से अधिक लोग तेजस्वी को मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं, जबकि युवाओं में यह आंकड़ा 40% से भी ऊपर है। ऐसे में सवाल उठता है — आखिर तेजस्वी यादव में ऐसा क्या है, जो उन्हें बिहार के युवाओं का ‘हीरो’ बना रहा है?
आइए जानते हैं तेजस्वी यादव की लोकप्रियता के 5 बड़े कारण, जो उन्हें बिहार के युवाओं का “फेवरेट नेता” बना रहे हैं।
रोजगार पर फोकस: बेरोजगारी के बीच उम्मीद की किरण

बिहार का युवा सबसे पहले नौकरी और रोजगार की बात करता है — और तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे को अपनी राजनीति का केंद्र बना दिया है।
उनका नारा — “हर घर एक नौकरी” — युवाओं के दिलों में घर कर गया है।
तेजस्वी यादव ने अपने कार्यकाल में 5 लाख नौकरियां देने का दावा किया था और अब वे कहते हैं कि अगर सत्ता में लौटे, तो 10 लाख नई सरकारी नौकरियां देंगे।
यह वही वादा है जिसने उन्हें बेरोजगार नौजवानों के बीच आशा का प्रतीक बना दिया है।
एक छात्र ने पटना में कहा —
हमने नेताओं से बहुत वादे सुने हैं, लेकिन तेजस्वी वो पहले नेता हैं जिन्होंने युवाओं की भाषा में बात की है।”तेजस्वी यादव यह भी कहते हैं —बिहार का युवा मेहनती है, उसे बस एक मौका चाहिए। सरकार अगर भरोसा करे तो वही बिहार को आगे ले जा सकता है।”
युवा और तेजतर्रार नेतृत्व: ‘नए बिहार’ की नई सोच
तेजस्वी यादव की सबसे बड़ी ताकत उनकी युवा छवि है। वे सिर्फ 36 साल के हैं, लेकिन उनके भाषणों और संवादों में एक परिपक्वता और आत्मविश्वास झलकता है।
वे खुद को “नए बिहार का चेहरा” बताते हैं — और यह बात युवाओं को सीधे अपील करती है।
वह राजनीति को पुराने ढर्रे से हटाकर आधुनिक दृष्टिकोण के साथ देखते हैं।
उन्होंने आरजेडी की पारंपरिक जातीय राजनीति से दूरी बनाते हुए विकास, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाया है।उनकी यही छवि उन्हें नीतीश कुमार और अन्य वरिष्ठ नेताओं से अलग बनाती है।
युवा वर्ग मानता है कि बिहार को अब एक तेज, ऊर्जावान और समझदार नेता की जरूरत है — और यह चेहरा तेजस्वी यादव हैं।

जातीय राजनीति में नई हवा: ‘हम बदलेंगे बिहार’ की गूंज
बिहार की राजनीति हमेशा जातीय समीकरणों पर घूमती रही है। लेकिन तेजस्वी यादव इस ढांचे को तोड़ने की कोशिश में हैं।
वे कहते हैं —मेरी उम्र भले कम है, लेकिन मेरा इरादा पक्का है। हमें जात से ऊपर उठकर काम की राजनीति करनी है।”तेजस्वी का यह संदेश बिहार के युवाओं को बहुत प्रभावित कर रहा है, खासकर उन लोगों को जो जात-पात की सियासत से ऊब चुके हैं।उन्होंने जनता से कहा था —20 साल आपने एनडीए को दिए हैं, अब हमें सिर्फ 20 महीने दीजिए। हम दिखा देंगे कि बिहार कैसे बदल सकता है।”इस बयान ने सोशल मीडिया पर तूफान मचा दिया था।
कई युवाओं ने इसे “नई राजनीति की शुरुआत” कहा।
पारिवारिक राजनीति से परे, खुद की पहचान

तेजस्वी यादव पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि वे लालू प्रसाद यादव के बेटे होने का फायदा उठाते हैं।
लेकिन अब धीरे-धीरे उन्होंने यह साबित किया है कि वे अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बना चुके हैं।लालू यादव और राबड़ी देवी अब राजनीति में पर्दे के पीछे की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि तेजस्वी खुद मोर्चे पर डटे हैं।
उनकी शैली, भाषण, और रणनीति दिखाती है कि वे अब सिर्फ “लालू के लाल” नहीं, बल्कि “बिहार के तेजस्वी” हैं।
एक राजनीतिक विश्लेषक का कहना है —तेजस्वी ने आरजेडी को एक नई दिशा दी है। उन्होंने उसे केवल पिछड़े वर्ग की पार्टी से निकालकर बिहार के हर वर्ग की आवाज़ बना दिया है।”यह परिवर्तन ही उनकी लोकप्रियता का असली कारण है।
सियासी समझ और रणनीति में निपुण
तेजस्वी यादव कम उम्र में ही राजनीति के पुराने खेल को समझ चुके हैं।
वह गठबंधनों की राजनीति, जनसंपर्क अभियानों और मीडिया के इस्तेमाल में माहिर हो गए हैं।
उनकी सभाएं, रैलियां और सोशल मीडिया कैंपेन युवाओं को आकर्षित करने के लिहाज से बिलकुल आधुनिक अंदाज में पेश किए जाते हैं।
उन्होंने बिहार की राजनीति में यह धारणा बदल दी है कि “युवा नेता अनुभवहीन होता है।”
अब वे महागठबंधन के सर्वसम्मत मुख्यमंत्री चेहरा हैं — और यह उनकी राजनीतिक परिपक्वता का प्रमाण है।

एग्जिट पोल्स में दिखी लोकप्रियता
वोट वाइब्स के एग्जिट पोल के अनुसार —
- 35.2% लोग तेजस्वी को मुख्यमंत्री पद का योग्य चेहरा मानते हैं।
- युवाओं में यह आंकड़ा 40.9% तक पहुंच गया है।
- वहीं नीतीश कुमार 33.4% पर हैं।
पीपल्स पल्स सर्वे में भी यही रुझान मिला —
- 32% लोग चाहते हैं कि तेजस्वी मुख्यमंत्री बनें।
- जबकि 30% अभी भी नीतीश कुमार को सीएम देखना चाहते हैं।
एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के अनुसार —
- पहली बार वोट डालने वाले 46% मतदाता तेजस्वी यादव के समर्थन में हैं।
- 20 से 29 साल की उम्र के युवाओं में महागठबंधन को 44% वोट मिलने की उम्मीद है।
ये आंकड़े बताते हैं कि बिहार का युवा अब तेजस्वी में नई उम्मीद और परिवर्तन की झलक देख रहा है।
युवाओं की जुबान पर तेजस्वी का नाम
पटना, गया, भागलपुर और दरभंगा जैसे शहरों में जब युवा राजनीति की बात करते हैं, तो सबसे पहले तेजस्वी यादव का नाम सामने आता है।
कई कॉलेज छात्र कहते हैं —
तेजस्वी की बातों में सच्चाई है। वह हम जैसे युवाओं की बात करते हैं — नौकरी, शिक्षा और सम्मान की।”
वहीं सोशल मीडिया पर भी तेजस्वी की लोकप्रियता बढ़ रही है।
उनके ट्वीट्स और वीडियो लाखों व्यूज पा रहे हैं, और हैशटैग #TejashwiForCM लगातार ट्रेंड कर रहा है।
बिहार बदल रहा है, राजनीति का चेहरा भी
बिहार के युवाओं का यह रुझान बताता है कि अब राज्य की राजनीति में नई पीढ़ी की सोच हावी हो रही है।
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में युवा खुद को राजनीति का हिस्सा मानने लगे हैं।
वे केवल दर्शक नहीं, बल्कि बदलाव के सहभागी बन रहे हैं।
अगर चुनावी परिणाम भी एग्जिट पोल्स के संकेतों पर खरे उतरे, तो तेजस्वी यादव बिहार की राजनीति में ‘जनता के नेता’ से ‘जनता के मुख्यमंत्री’ तक का सफर पूरा कर सकते हैं।
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