Wednesday, February 4, 2026

Delhi में सरकारी दफ्तरों का समय बदला: बढ़ते प्रदूषण पर काबू पाने के लिए सर्दियों में नई व्यवस्था लागू

by Sujal
Delhi सरकार ने सर्दियों में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकारी और नगर निगम के दफ्तरों के समय में बदलाव किया है। नई व्यवस्था 15 नवंबर 2025 से 15 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी। जानिए क्या है नया समय और इस फैसले के पीछे की वजह।

Delhi में सरकारी दफ्तरों का समय बदला: बढ़ते प्रदूषण के बीच सर्दियों के लिए नई व्यवस्था लागू

Delhi की हवा एक बार फिर ज़हर बनती जा रही है। बढ़ते वायु प्रदूषण और सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक के बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने सर्दियों के मौसम के लिए सरकारी दफ्तरों के कामकाज के समय में बदलाव की घोषणा की है।

अब दिल्ली सरकार के दफ्तर सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक चलेंगे, जबकि नगर निगम (MCD) के दफ्तरों का समय सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक तय किया गया है। यह नई व्यवस्था 15 नवंबर 2025 से 15 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम केवल ट्रैफिक प्रेशर कम करने के लिए नहीं, बल्कि दिल्लीवासियों को “बेहतर वायु गुणवत्ता” देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।


दिल्ली में क्यों बदला गया सरकारी दफ्तरों का समय?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पर्यावरण विभाग और परिवहन अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह निर्णय लिया।
बैठक में यह पाया गया कि सुबह और शाम के समय सरकारी दफ्तरों और MCD के कर्मचारियों के एक साथ सड़क पर आने-जाने से ट्रैफिक दबाव काफी बढ़ जाता है।

अब तक दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक और MCD के कार्यालय सुबह 9:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक चल रहे थे।
दोनों के बीच मात्र 30 मिनट का अंतर होने के कारण सुबह और शाम के समय दिल्ली की सड़कों पर भारी ट्रैफिक और जाम की स्थिति बन जाती थी।

रेखा गुप्ता ने कहा कि,

यदि दोनों संस्थानों के खुलने और बंद होने के समय में अंतर बढ़ाया जाए तो सड़कों पर एक साथ वाहनों की संख्या कम होगी और इससे वायु प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी।”


सर्दियों में प्रदूषण का खतरा, इसलिए लिया गया निर्णय

दिल्ली हर साल सर्दियों के मौसम में गंभीर वायु प्रदूषण का सामना करती है।
इस दौरान पराली जलाने, वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक धुएं और ठंडी हवाओं के कारण प्रदूषक कण जमीन के पास फंस जाते हैं।

इस साल भी पर्यावरण विभाग ने 15 नवंबर 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच प्रदूषण के उच्च स्तर की आशंका जताई है।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तय किया कि इस अवधि में ऑफिस टाइमिंग्स बदलकर ट्रैफिक लोड को विभाजित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि

हमारा लक्ष्य केवल समय बदलना नहीं है, बल्कि लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा देना है। दिल्ली के नागरिकों को प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए यह कदम उठाया गया है।”


नई व्यवस्था के अनुसार दफ्तरों का समय

सरकार ने दोनों संस्थानों के लिए नए समय की घोषणा करते हुए इसे सर्दियों के पूरे मौसम तक लागू करने का निर्णय लिया है:

  • दिल्ली सरकार के कार्यालय: सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक
  • दिल्ली नगर निगम (MCD) के कार्यालय: सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक

यह अंतर सुबह और शाम के कम से कम डेढ़ घंटे का अंतर पैदा करेगा, जिससे ट्रैफिक एक साथ सड़कों पर नहीं उतरेगा।


क्या बदलेगी दिल्ली की सड़कों की तस्वीर?

दिल्ली में ट्रैफिक जाम लंबे समय से एक बड़ी समस्या रहा है।
सुबह और शाम के ऑफिस समय पर मुख्य सड़कों पर हजारों वाहन एक साथ निकलते हैं।
इससे न केवल यातायात अवरुद्ध होता है, बल्कि वाहनों का उत्सर्जन (Emission) भी बढ़ जाता है — जो प्रदूषण का प्रमुख कारण है।

नई नीति के लागू होने से उम्मीद है कि:

  • सड़कों पर वाहनों का दबाव दो हिस्सों में बंटेगा,
  • ऑफिस जाने और लौटने वालों का समय अलग-अलग होगा,
  • और इससे प्रदूषण में 10-15% तक की कमी आ सकती है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस दौरान ट्रैफिक और वायु गुणवत्ता की निरंतर निगरानी की जाए और हर हफ्ते रिपोर्ट सौंपी जाए।


मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने क्या कहा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह फैसला “जनहित” में लिया गया है। उन्होंने कहा,

हम दिल्ली के नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ समझौता नहीं कर सकते। यह निर्णय न केवल ट्रैफिक प्रेशर को कम करेगा, बल्कि नागरिकों को बेहतर वायु गुणवत्ता भी प्रदान करेगा।”

उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि

नई व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए और किसी भी विभाग को समय परिवर्तन का उल्लंघन करने की अनुमति न दी जाए।”

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह पहल दिल्ली को प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक नई शुरुआत देगी।


क्या प्रदूषण घटाने में यह फैसला मददगार साबित होगा?

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम “छोटा लेकिन सार्थक” है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की रिपोर्ट के मुताबिक,

दिल्ली के प्रदूषण में ट्रैफिक का योगदान लगभग 30% है। अगर वाहनों की संख्या एक साथ कम होती है तो प्रदूषण के स्तर में तुरंत फर्क पड़ता है।”

यानी, अगर इस कदम से सड़कों पर एक साथ चलने वाले वाहनों की संख्या कम होगी, तो इससे हवा में मौजूद PM 2.5 और PM 10 कणों की मात्रा घट सकती है।


दिल्ली के नागरिकों ने फैसले का किया स्वागत

नई घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर दिल्ली के नागरिकों ने सरकार के फैसले का समर्थन किया है।
कई यूजर्स ने इसे स्मार्ट मूव और प्रैक्टिकल सॉल्यूशन बताया।

जनकपुरी निवासी सीमा वर्मा ने कहा,

हम रोज सुबह ऑफिस जाते समय ट्रैफिक में फंस जाते हैं। अगर दो विभागों का समय अलग हो जाएगा तो जाम में कमी जरूर आएगी।”

वहीं द्वारका के निवासी मनीष सिंह ने कहा,

यह पहली बार है जब किसी सरकार ने ट्रैफिक और प्रदूषण को जोड़कर देखा है। इससे फर्क जरूर पड़ेगा।”


निगरानी और समीक्षा तंत्र भी तैयार

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नई समय-सारणी को लागू करने के बाद हर हफ्ते समीक्षा की जाएगी।
ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग और पर्यावरण विभाग मिलकर वायु गुणवत्ता के आंकड़े एकत्र करेंगे।

अगर इस दौरान सुधार दिखता है, तो इस व्यवस्था को आगे भी जारी रखा जा सकता है।

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