Saturday, March 21, 2026

Patna: 6 महीने के बच्चे के अंडकोष से निकाला ट्यूमर, महावीर Cancer संस्थान के Doctor’s ने बचाई जान

by Sarita Kumari
Patna के महावीर कैंसर संस्थान में 6 महीने के बच्चे के अंडकोष से सफलतापूर्वक ट्यूमर निकालकर उसकी जान बचाई गई। डॉ. राहुल सिन्हा और टीम की यह सर्जरी मिसाल बन गई। जानें पूरी कहानी और सावधानी के लक्षण

Cancer संस्थान के Doctor फिर बने भगवान! 6 महीने के बच्चे के अंडकोष से निकाला ट्यूमर, कहा – दिखें ये लक्षण तो तुरंत पहुंचें अस्पताल

Patna। एक नन्हा सा मासूम, जिसकी उम्र महज 6 महीने है, वह जीवन की पहली लड़ाई उस वक्त लड़ रहा था, जब बाकी बच्चे बस हँसना सीखते हैं। नालंदा का यह बच्चा अचानक गंभीर बीमारी का शिकार हो गया। परिजन जब उसके अंडकोष के पास सूजन देख घबरा गए, तो उन्होंने डॉक्टरों की शरण ली। कई डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद जब स्थिति नहीं सुधरी, तब उन्होंने महावीर मंदिर द्वारा संचालित महावीर कैंसर संस्थान, पटना का रुख किया।

यहां डॉ. राहुल जनक सिन्हा और उनकी टीम ने न सिर्फ बच्चे की गंभीर स्थिति को पहचाना, बल्कि समय पर सर्जरी करके उसकी जान भी बचा ली।

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डॉक्टर भी रह गए हैरान, इतने छोटे बच्चे में ट्यूमर देख

महावीर कैंसर संस्थान पहुंचने पर डॉ. राहुल सिन्हा और उनकी टीम ने गहन जांच की। रिपोर्ट्स ने चौंका दिया – बच्चे के दाहिने अंडकोष में ट्यूमर पाया गया। डॉक्टरों ने निर्णय लिया कि बच्चे की सर्जरी की जाए। यह प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील थी, क्योंकि मामला एक नवजात का था।


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सफल सर्जरी, बचा लिया गया दाहिना वृषण

डॉ. राहुल सिन्हा ने राइट हेमी स्क्रोटेक्टोमी तकनीक का इस्तेमाल कर बड़ी ही सूझबूझ से सर्जरी की। सर्जरी के दौरान बच्चे के दाहिने वृषण को सुरक्षित रखा गया, जिससे भविष्य में उसकी प्रजनन क्षमता और सामान्य विकास प्रभावित न हो।

इस ऑपरेशन में डॉ. रवि शेखर, डॉ. आस्था, ओटी स्टाफ और टेक्नीशियनों की टीम ने भी अहम भूमिका निभाई।

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अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ, मुस्कान लौट आई

सर्जरी के कुछ दिन बाद अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में है। फिलहाल ट्यूमर की बायोप्सी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि ट्यूमर कितना खतरनाक था।


महावीर संस्थान ने की परिवार की आर्थिक मदद

इस केस की खास बात यह भी रही कि बच्चे के गरीब परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए महावीर कैंसर संस्थान ने इलाज का अधिकांश खर्च खुद वहन किया। विश्वस्तरीय इलाज बहुत कम लागत में किया गया, जिससे परिवार राहत की सांस ले सका।


अगर बच्चों में दिखे ये लक्षण, तो नजरअंदाज न करें

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डॉ. राहुल सिन्हा ने इस केस के माध्यम से लोगों को जागरूक किया है। उन्होंने कहा:

“अगर छोटे बच्चों के अंडकोष या अन्य अंगों में असामान्य सूजन या गांठ दिखे तो देर न करें। तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। जल्दी जांच और इलाज से जान बचाई जा सकती है।”


यह सिर्फ एक सर्जरी नहीं, एक उम्मीद है

यह घटना हमें यह सिखाती है कि समय पर लिया गया मेडिकल परामर्श और सही डॉक्टर तक पहुंच बनाना किस हद तक जीवन रक्षक हो सकता है। महावीर कैंसर संस्थान की टीम, विशेषकर डॉ. राहुल सिन्हा, आज कई परिवारों के लिए ‘भगवान के समान’ बन चुके हैं।

क्यों बढ़ रहे हैं बच्चों में ट्यूमर के मामले?

डॉक्टरों के अनुसार, आजकल बच्चों में भी गंभीर बीमारियां देखने को मिल रही हैं, जिनमें ट्यूमर भी शामिल है। पहले जहां ऐसी बीमारियां वयस्कों में आम मानी जाती थीं, वहीं अब यह छोटे बच्चों में भी सामने आने लगी हैं। इसका कारण बदलती जीवनशैली, खान-पान में मिलावट, पर्यावरणीय कारक और कई बार जन्मजात समस्याएं भी हो सकती हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि नवजात शिशुओं में किसी भी प्रकार की सूजन, गांठ, या रंग बदलने वाले धब्बे को हल्के में नहीं लेना चाहिए। ये कई बार टेस्टिकुलर ट्यूमर जैसे गंभीर बीमारी के लक्षण हो सकते हैं। अगर समय पर इनका इलाज न हो, तो यह जीवन के लिए भी खतरा बन सकते हैं।

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महावीर कैंसर संस्थान की सेवाएं बन रही हैं मिसाल

महावीर कैंसर संस्थान की सेवाएं बन रही हैं मिसाल

पटना का महावीर कैंसर संस्थान न केवल बिहार, बल्कि पूरे पूर्वी भारत में एक भरोसेमंद नाम बन चुका है। यहां अत्याधुनिक तकनीकों और अनुभवी डॉक्टर्स की टीम के जरिए कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का सफल इलाज किया जा रहा है। खास बात यह है कि संस्थान जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराता है।

संस्थान की नीति है – “हर मरीज को जीने का अधिकार है, चाहे वह किसी भी सामाजिक या आर्थिक वर्ग से क्यों न हो।” इस सोच ने हजारों जिंदगियों को बचाया है और इस केस में भी यही भावना देखने को मिली।

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आम जनता के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

महावीर कैंसर संस्थान के डॉक्टरों ने साफ कहा है कि अगर भारत जैसे देश में समय रहते लोग स्वास्थ्य के प्रति सजग हो जाएं, तो कई बीमारियों को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है। जागरूकता ही सबसे बड़ा इलाज है।

परिजनों को चाहिए कि वे बच्चों के हर शारीरिक बदलाव पर नजर रखें और डॉक्टर से सलाह लेने में देरी न करें। एक छोटी सी लापरवाही किसी मासूम की जिंदगी को खतरे में डाल सकती है।

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