संक्षेप (Summary) Bihar elections 2025 में 27 वोट से जीत और 11 सीटों पर मामूली अंतरबिहार चुनाव 2025 में जहाँ एक तरफ़ NDA ने 203 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की, वहीं कई सीटों पर जीत-हार का अंतर इतना कम रहा कि हर वोट की अहमियत साबित हो गई। सबसे बड़ा रोमांच संदेश विधानसभा सीट पर दिखा, जहाँ JDU उम्मीदवार सिर्फ 27 वोट से जीत गया।इसके अलावा 10 और सीटें ऐसी रहीं जहाँ अंतर 100–1000 वोट के बीच रहा।
अगियांव, ढाका, फारबिसगंज, जहानाबाद, रामगढ़ और बलरामपुर जैसी सीटों पर पर्चे बदलने की नौबत तक आ गई।इन मामूली अंतर वाली सीटों ने इस चुनाव का सबसे बड़ा संदेश दिया—
वोटर जागरूक है, हर वोट की अपनी ताकत है, और छोटे दल तथा त्रिकोणीय मुकाबला नतीजों को पलट सकता
Bihar elections में कमाल 27 वोटों से जीता प्रत्याशी—इन 11 सीटों पर रोमांचक मुकाबले
Bihar elections विधानसभा चुनाव 2025 अपनी राजनीतिक धार और जातीय समीकरणों से ज़्यादा, इस बार उन सीटों के कारण याद रखा जाएगा, जहाँ जीत का अंतर बेहद मामूली रहा।
एक तरफ़ राज्य में NDA इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज करता दिखा—243 में से 203 सीटों पर NDA का कब्ज़ा—वहीं दूसरी तरफ़ कई सीटों पर मुकाबला इतना कड़ा था कि हर वोट मायने रखता था।सबसे चौंकाने वाला नतीजा संदेश विधानसभा सीट का रहा, जहाँ उम्मीदवार सिर्फ 27 वोटों से जीत गया।
इन छोटे अंतर ने यह साबित भी कर दिया कि मतदाता सिर्फ एक वोट नहीं, बल्कि लोकतंत्र की दिशा तय करते हैं।

पूरे बिहार में NDA की तूफानी बढ़त—लेकिन इन सीटों ने बना दिया चुनाव रोमांचक
बिहार में जहां BJP और JDU की शानदार आंधी चली, वहीं इन 11 सीटों पर मुकाबला नाखून चबवाने वाला रहा।
महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) कुछ सीटों पर जीत के बिल्कुल करीब पहुंचा, पर अंतर इतना कम था कि हार और जीत को अलग कर पाना भी मुश्किल था।
आइए जानते हैं उन 11 सीटों के बारे में जहाँ हवा जिस ओर झुकी, नतीजा वहीं निकल गया।
1. अगियांव विधानसभा सीट — 95 वोट का रोमांच
विजेता: महेश पासवान (BJP)
दूसरे: शिव प्रकाश रंजन (CPIML)
अंतर: सिर्फ 95 वोट
यह सीट लेफ्ट और बीजेपी के बीच सीधे टक्कर में बदल गई। अंतिम राउंड तक CPIML आगे थी, लेकिन अंतिम क्षणों में तस्वीर पलट गई।

2. बलरामपुर — 389 वोट का संघर्ष
विजेता: संगीता देवी (LJPR)
दूसरे: मो. आदिल हसन (AIMIM)
अंतर: 389 वोट
सीमांचल में AIMIM का प्रभाव होते हुए भी संगीता देवी ने मामूली अंतर से सीट बचाए रखी। स्थानीय समीकरण निर्णायक रहे।
3. बख्तियारपुर — 981 वोट का मुकाबला
विजेता: अरुण कुमार (LJP-R)
दूसरे: अनिरुद्ध कुमार (RJD)
अंतर: 981 वोट
यह सीट एक पारंपरिक RJD गढ़ मानी जाती थी, लेकिन एलजेपी के उम्मीदवार ने मजबूत चुनौती देते हुए जीत हासिल की।
4. बोध गया — 881 वोट का निर्णय
विजेता: कुमार सर्वजीत (RJD)
दूसरे: श्यामदेव पासवान (LJP-R)
अंतर: 881 वोट
LJPR बार-बार बढ़त ले रही थी, लेकिन RJD के सर्वजीत ने अंतिम चरण में वोटों का खेल पलट दिया।
5. छनपतिया — 602 वोट का उतार-चढ़ाव
विजेता: अभिषेक रंजन (कांग्रेस)
दूसरे: उमाकांत सिंह (BJP)
अंतर: 602 वोट
यह सीट महागठबंधन की गिनती में शामिल कुछ गिनी-चुनी सफलताओं में से एक रही। कांग्रेस ने अपनी मौजूदगी फिर दिखाई।
6. ढाका — 119 वोट का नाटकीय मोड़
विजेता: पवन जायसवाल (BJP)
दूसरे: फासिल रहमान (RJD)
अंतर: 119 वोट
यह सीट अंतिम 3 राउंड तक RJD के पास थी, लेकिन BJP के पवन जायसवाल ने 119 वोट से सीट हथिया ली।

7. फारबिसगंज — 221 वोट से परिणाम
विजेता: मनोज बिस्वास (कांग्रेस)
दूसरे: विद्यासागर केशरी (BJP)
अंतर: 221 वोट
यह भी उन चुनिंदा सीटों में रही, जहाँ कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन से पार्टी को राहत दी।
8. जहानाबाद — 255 वोट की जंग
विजेता: राहुल कुमार (RJD)
दूसरे: चंद्रेश्वर प्रसाद (JDU)
अंतर: 255 वोट
जहानाबाद की गिनती सबसे संवेदनशील मुकाबलों में होती है। इस बार भी जनता ने बेहद संतुलित वोटिंग की।
9. रामगढ़ — 175 वोट के अंतर से जीत
विजेता: सतीश कुमार सिंह (BSP)
दूसरे: अशोक कुमार सिंह (BJP)
अंतर: 175 वोट
यह सीट सबसे बड़ा अपसेट साबित हुई, जहाँ BSP ने बीजेपी को मामूली अंतर से हराया।
10. संदेश — सिर्फ 27 वोट से फैसला!
विजेता: राधाचरण शाह (JDU)
दूसरे: दीपू सिंह (RJD)
अंतर: 27 वोट
यह बिहार चुनाव 2025 का सबसे रोमांचक परिणाम रहा।
27 वोट का अंतर यानी:
1 बूथ का मूड पूरा चुनाव बदल सकता है
5 परिवारों का मत बदल दें तो नतीजे उलट सकते थे
1% भी वोट इधर-उधर हो जाता—नतीजा अलग
यह सीट “हर वोट की कीमत” का सबसे बड़ा उदाहरण बन गई।
11. तरैया — 737 वोट का फैसला
विजेता: जनक सिंह (BJP)
दूसरे: शैलेंद्र प्रताप (RJD)
अंतर: 737 वोट
यहां भी मैच कांटे का था, लेकिन अंतिम राउंड में BJP ने बढ़त हासिल की।
क्यों इतने छोटे अंतर आए? चुनाव विश्लेषकों की राय
चुनाव विशेषज्ञ इसके पीछे कई कारण देखते हैं—
जातीय समीकरणों में बड़ा बदलाव
अब वोटर जाति से ज्यादा उम्मीदवार की छवि और विकास पर वोट कर रहा है।
AIMIM, LJPR और जनसुराज जैसे नए विकल्पों ने वोट काटे
सीमांचल और कोशी में इसका बड़ा असर दिखा।
युवा वोटरों ने पुराने पैटर्न तोड़े
पहली बार वोट देने वाली पीढ़ी ने परंपरागत वोट बैंक को चुनौती दी।
कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला
तीसरे उम्मीदवार ने वोट काटकर जीत-हार का अंतर छोटा किया।
इन नतीजों से क्या संदेश मिलता है?
इन 11 सीटों ने बिहार को तीन बातें साफ बताई हैं—
हर वोट की कीमत है
जनता अब ज्यादा सजग और रणनीतिक हो चुकी है
छोटे दलों का प्रभाव भविष्य में निर्णायक हो सकता है
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