Wednesday, February 4, 2026

mokama election 2025: अनंत सिंह vs सूरजभान की भिड़ंत, दुलारचंद हत्या का असर

by Sujal
mokama election विधानसभा में अनंत सिंह और सूरजभान सिंह की सियासी टक्कर के बीच दुलारचंद यादव की हत्या ने माहौल गरमा दिया है। पढ़ें मोकामा की राजनीति और इस हत्या का चुनावी असर।

mokama election 2025: अनंत सिंह और सूरजभान की टक्कर, दुलारचंद की हत्या का साया

नई दिल्ली:
mokama election बिहार की मोकामा विधानसभा सीट हमेशा से चुनावी हलकों में चर्चित रही है। खासतौर पर 90 के दशक से इस सीट पर बाहुबली राजनीति का बोलबाला रहा है। इस बार मामला और भी गंभीर है क्योंकि मोकामा में अनंत सिंह और सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी के बीच सीधे मुकाबले की स्थिति है। हाल ही में हुई दुलारचंद यादव की हत्या ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।


दुलारचंद की हत्या ने फिर उभारा बिहार का खूनरंजित इतिहास

जैसे ही मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या हुई, बिहार के बाहुबली और अपराध जगत की यादें फिर ताजा हो गईं। हत्या की जगह गंगा के किनारे का तराई इलाका है, जो बाहुबल और अपराध के प्रभाव में रहा है। हत्या के बाद आए बयान राजनीतिक हत्या की तरफ इशारा कर रहे हैं।


दुलारचंद की राजनीति की कहानी: 80 के दशक से लेकर 2022 तक

दुलारचंद यादव का बाहुबल 80 के दशक में शुरू हुआ। रंगदारी और हत्या जैसे आरोप उनके राजनीतिक सफर का हिस्सा रहे। नब्बे के दशक में उनका नाम राजनीतिक गलियारों में गूंजने लगा। लालू परिवार के साथ लंबे समय तक संबंध बनाए रखने के बाद, 2017 में उन्होंने JDU और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ नजदीकी बनाई।

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2022 के मोकामा उपचुनाव में उन्होंने अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी का समर्थन किया था। इससे उनका राजनीतिक लचीलापन और समीकरण साधने की क्षमता दिखाई दी।


अनंत सिंह और दुलारचंद की दोस्ती और अदावत

एक समय दुलार और अनंत सिंह के बीच दोस्ती की बातें खूब चर्चा में रही। लेकिन समय के साथ अनंत और दुलारचंद के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा। टाल के बादशाह दुलारचंद के साथ अनंत सिंह की अदावत ने चुनावी मैदान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया।


मोकामा का सियासी इतिहास और भूमिहारों का दबदबा

1990 में अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह जनता दल के टिकट पर विधायक चुने गए। 2005 में अनंत सिंह ने जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीतकर विधानसभा पहुंचे। मोकामा में भूमिहार समुदाय की आबादी तीस प्रतिशत से ज्यादा है। 1992 से अब तक जितने भी विधायक बने हैं, वे सभी भूमिहार समाज से रहे हैं।

सूरजभान सिंह का नाम 90 के दशक में बिहार के अपराध और सियासत दोनों में गूंजता था। 2000 में वे विधायक रहे और इस बार उन्होंने अपनी पत्नी वीणा देवी को राजद के टिकट पर मैदान में उतारा है।

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दुलारचंद हत्या का चुनावी असर

मोकामा में अनंत सिंह और सूरजभान सिंह की टक्कर में दुलारचंद की हत्या ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। यदि पिछड़ी जातियों के वोटर एकजुट होकर अनंत सिंह के खिलाफ मतदान करते हैं, तो उनकी जीत मुश्किल हो सकती है। लेकिन अगर पिछड़ी जातियों के वोट में फूट पड़ती है, तो अनंत सिंह के लिए जीतना आसान रहेगा।


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मोकामा का फैसला: बाहुबली या जनता का दबदबा?

गुरुवार को मोकामा में वोटिंग होगी और यह देखने वाली बात होगी कि लोग किसे माननीय चुनते हैं। अनंत सिंह का बाहुबली छत्र राज और सूरजभान सिंह की पत्नी का राजनीतिक समर्थन, दोनों के बीच सियासी लड़ाई को और दिलचस्प बना रहे हैं।

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