Thursday, February 5, 2026

कटिहार में गाय के बछड़े के लिए संघर्ष: DNA टेस्ट से होगा फैसला

by Vijay Parajapati
Katiyar Vivad

कटिहार: कटिहार नगर थाना क्षेत्र के लालकोठी मोनिधार मोहल्ले में एक गाय के बछड़े के लिए दो दावेदारों के बीच विवाद का अजीब मामला सामने आया है। इस विवाद ने पुलिस को उलझा दिया है, और अब यह मामला बछड़े के डीएनए टेस्ट तक पहुंच गया है। छोटी कुमारी, जो बछड़े की दावेदार हैं, का कहना है कि यह बछड़ा उनकी उस गाय का है, जो करीब एक साल पहले करंट लगने के कारण मर गई थी। उनके अनुसार, यह बछड़ा अब खेतों में भटकते-भटकते उनके घर आ गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह बछड़ा उनकी गाय का ही है।

बछड़े के स्वामित्व का विवाद

वहीं, वार्ड नंबर 21 के पार्षद प्रतिनिधि मनोज राय का दावा है कि यह बछड़ा उनके वार्ड के निवासी अमित कुमार का है। उनका कहना है कि छोटी कुमारी ने इस बछड़े को जबरन अपने घर में लाकर बांध रखा है, जो कि न केवल अनुचित है, बल्कि बछड़े के असली मालिक के अधिकारों का उल्लंघन भी है। छोटी कुमारी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि बछड़ा करीब छह महीने तक गायब रहा था और उनकी गाय की करंट लगने से मौत हो गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी गाय के तीन बछड़े हुए थे, जिनमें से पहले दो लाल रंग के थे और यह भी लाल रंग का है, जिससे वह यह साबित करना चाहती हैं कि यह बछड़ा उनकी गाय का ही है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

इस विवाद में दोनों पक्षों ने पुलिस थाने में अलग-अलग आवेदन दिए हैं, और अब पुलिस मामले को सुलझाने में जुटी हुई है। छोटी कुमारी ने आरोप लगाया कि मनोज राय और उनके समर्थक उन्हें बार-बार परेशान कर रहे हैं और दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा है कि आप अपनी गाय लेकर आईए। यदि बछड़ा उस गाय का दूध पी लेता है, तो बछड़े को ले जाइए। लेकिन वह 10-15 लोगों को लेकर आते हैं और हमें टॉर्चर करते हैं।” पुलिस ने इस विवाद के जल्द निदान का आश्वासन दिया है, लेकिन बछड़े के मालिकाना हक को साबित करने के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लेना पड़ेगा।

विवाद की सामाजिक धारा

यह मामला केवल बछड़े के स्वामित्व का नहीं है, बल्कि स्थानीय समाज में एक दिलचस्प चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोग इस विवाद को लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं और इसे स्थानीय राजनीति और सामाजिक ताने-बाने से भी जोड़ रहे हैं। कई लोग इस मामले को लेकर अपनी राय दे रहे हैं, जिससे मामला और भी जटिल होता जा रहा है। यह मामला दर्शाता है कि किस तरह से एक साधारण सी बात, जैसे एक बछड़े का स्वामित्व, स्थानीय राजनीति और सामाजिक संबंधों में उलझ जाती है।

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