Wednesday, February 4, 2026

Delhi Airport पर 700 उड़ानें ठप: तकनीकी खराबी से 15 घंटे तक रुका संचालन, यात्रियों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी

by Sujal
Delhi Airport IGI एयरपोर्ट पर ऑटोमेटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम (AMSS) में आई तकनीकी खराबी से 700 उड़ानें प्रभावित हुईं। 15 घंटे तक एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मैन्युअली काम करना पड़ा। जानिए क्या हुआ, क्यों हुआ और यात्रियों पर क्या पड़ा असर।

Delhi Airport पर 700 उड़ानें ठप: क्या हुआ ऐसा कि थम गई देश की उड़ानें?

Delhi Airport दुनिया के सबसे व्यस्त हवाईअड्डों में से एक दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (IGI Airport) पर शुक्रवार को एक तकनीकी खराबी ने हजारों यात्रियों को घंटों तक परेशान कर दिया।
सुबह से लेकर देर रात तक 700 से अधिक उड़ानें प्रभावित रहीं और यात्रियों को लाउंज, गेट्स और टिकट काउंटरों पर लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ा।

पहले तो इसे एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सिस्टम की गड़बड़ी बताया गया, लेकिन बाद में साफ हुआ कि खराबी ऑटोमेटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम (AMSS) में आई थी — यह सिस्टम उड़ानों की जानकारी और प्लानिंग से जुड़ा सबसे अहम हिस्सा है।


क्या हुआ था दिल्ली एयरपोर्ट पर?

शुक्रवार सुबह 6 बजे के आसपास IGI एयरपोर्ट पर एयर नेविगेशन सिस्टम अचानक ठप हो गया।
ऑटोमेटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम (AMSS) बंद होने से एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को फ्लाइट डेटा और क्लियरेंस की जानकारी मैन्युअली प्रोसेस करनी पड़ी।

यानी जो काम कंप्यूटर कुछ सेकंड में कर देता था, अब वही काम इंसान को हाथ से करना पड़ा।
इससे हर उड़ान की अनुमति और प्रस्थान प्रक्रिया धीमी हो गई, और देखते ही देखते 700 उड़ानों की रफ्तार थम गई।

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सिस्टम कैसे हुआ खराब?

अभी तक इस गड़बड़ी के पीछे का कारण साफ नहीं हुआ है।
शुरुआत में कुछ रिपोर्ट्स में साइबर अटैक या मालवेयर अटैक की आशंका जताई गई थी, लेकिन
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने इस दावे को गलत बताया।

AAI ने देर रात एक बयान में कहा,

दिल्ली एयरपोर्ट पर ऑटोमेटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम (AMSS) में तकनीकी समस्या आने के कारण उड़ानों में देरी हुई। कंट्रोलर मैन्युअली फ्लाइट प्लान प्रोसेस कर रहे थे। सिस्टम अब ठीक कर दिया गया है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।”

खराबी की वजह चाहे जो रही हो, लेकिन इसने देश के सबसे आधुनिक एयरपोर्ट की डिजिटल निर्भरता की सीमाएं जरूर उजागर कर दीं।


कितना बड़ा पड़ा असर — आंकड़ों में समझें

दिल्ली एयरपोर्ट हर दिन औसतन 1300 उड़ानों का संचालन करता है।
यहां हर घंटे 60 उड़ानें उड़ान भरती या उतरती हैं, लेकिन इस तकनीकी खराबी के दौरान
यह संख्या घटकर 10–15 उड़ान प्रति घंटा रह गई।

  • करीब 700 उड़ानें प्रभावित हुईं,
  • जिनमें 500 घरेलू और 200 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें थीं।
  • कई उड़ानें दूसरे एयरपोर्ट्स पर डायवर्ट करनी पड़ीं,
  • और हजारों यात्रियों को एयरपोर्ट पर ही फंसकर इंतजार करना पड़ा।

दिल्ली की देरी का असर देशभर में

दिल्ली एयरपोर्ट की देरी का असर सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी तक सीमित नहीं रहा।
इस गड़बड़ी ने मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, जयपुर, कोलकाता और लखनऊ एयरपोर्ट्स पर भी उड़ानों की टाइमिंग बिगाड़ दी।

क्योंकि दिल्ली से निकलने वाली उड़ानें कई अन्य शहरों के लिए “कनेक्टिंग फ्लाइट्स” का हिस्सा थीं,
इसलिए वहां भी कई फ्लाइट्स को देर से टेकऑफ करना पड़ा या होल्ड पर रखा गया।


विशेषज्ञों ने बताया — तकनीकी खराबी कैसे प्रभावित करती है उड़ानें

कैप्टन शरत पनिकर, जो लंबे समय से एयर ट्रैफिक संचालन से जुड़े हैं, ने बताया,

हर विमान को उड़ान से पहले फ्लाइट प्लान जमा करना होता है। यह प्रक्रिया आम तौर पर कंप्यूटर द्वारा अपने आप होती है।
जब सिस्टम डाउन हुआ, तो कंट्रोलर्स को यह काम हाथ से करना पड़ा। इससे समय बढ़ गया और उड़ानों में देरी हुई।”

उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान मौसम से जुड़ी जानकारियां भी पायलटों को मैन्युअली दी जा रही थीं।

“उड़ान के बाद समस्या नहीं होती, लेकिन टेकऑफ के लिए जो डेटा जरूरी होता है, उसकी प्रोसेसिंग में देरी सबसे बड़ा कारण रही।”


‘मैन्युअली काम की वजह से हो रही थी देरी’

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने बताया कि

तकनीकी दिक्कत के बाद सिस्टम ठीक कर लिया गया है, लेकिन पूरा डेटा बैकलॉग क्लीयर करने में समय लग रहा है।
अगर सिस्टम लंबे समय तक डाउन रहता तो देशभर में उड़ानों पर रोक (कैप) लगानी पड़ सकती थी।”

यानी, भारत के एयर ट्रैफिक नेटवर्क की मजबूती एक बार फिर परीक्षा में खड़ी हो गई थी।


यात्रियों की हालत — इंतजार, निराशा और अफरा-तफरी

सुबह से दोपहर तक IGI एयरपोर्ट के टर्मिनलों पर हजारों यात्री फंसे रहे।
लोगों ने सोशल मीडिया पर #DelhiAirport, #FlightDelay, और #TechGlitch जैसे हैशटैग के साथ अपने अनुभव साझा किए।

एक यात्री ने लिखा —

सुबह 8 बजे की फ्लाइट दोपहर 3 बजे तक नहीं उड़ी। एयरलाइन स्टाफ खुद अपडेट नहीं दे पा रहे थे।”

एक अन्य यात्री ने कहा —

टर्मिनल 3 पर लोग जमीन पर बैठे हैं, बोर्डिंग गेट्स पर लाइनें इतनी लंबी हैं कि पैर रखने की जगह नहीं।”

एयरलाइंस ने यात्रियों से माफी मांगते हुए कहा कि यह समस्या उनके नियंत्रण से बाहर थी।


AAI और एयरलाइंस की अपील: यात्रा से पहले स्थिति जांचें

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और सभी प्रमुख एयरलाइंस ने यात्रियों से अपील की है कि

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अपनी यात्रा से पहले उड़ान की नवीनतम स्थिति (Live Flight Status) एयरलाइन की वेबसाइट या ऐप पर जरूर जांच लें।”

उन्होंने कहा कि

सभी सिस्टम अब बहाल हो चुके हैं, लेकिन पहले से जमा काम को साफ करने में थोड़ा समय लगेगा।
इसलिए उड़ानों में थोड़ी बहुत देरी अभी बनी रह सकती है।”


क्या यह साइबर अटैक था?

कुछ शुरुआती रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यह खराबी किसी साइबर अटैक या मालवेयर संक्रमण के कारण हो सकती है।
हालांकि, सरकारी सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि

यह पूरी तरह से तकनीकी गड़बड़ी थी, साइबर अटैक का कोई प्रमाण नहीं मिला है।”

फिर भी, इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि
क्या भारत के एयर ट्रैफिक सिस्टम्स साइबर सुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह सुरक्षित हैं?


सिस्टम कब हुआ बहाल?

तकनीकी टीमों ने लगभग 15 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद सिस्टम को देर रात करीब 9 बजे पूरी तरह बहाल कर दिया।
AAI ने बयान जारी कर कहा —

AMSS सिस्टम अब पूरी तरह चालू है, और एयर ट्रैफिक सामान्य रूप से बहाल किया जा रहा है।
हालांकि कुछ उड़ानों में देरी बनी रह सकती है क्योंकि डेटा का बैकलॉग क्लियर किया जा रहा है।”


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