संक्षेप: Delhi High Court ने मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के फ्रीज बैंक खातों को तुरंत डी-फ्रीज करने का आदेश देते हुए कहा कि बिना ठोस आधार किसी कंपनी के खाते ब्लैंकेट तरीके से फ्रीज करना मनमाना है। कोर्ट ने इसे व्यापार की स्वतंत्रता और जीविका के अधिकार का उल्लंघन बताया।
मामला एक ग्राहक पर दर्ज साइबर ठगी की शिकायत से जुड़ा था, जिसके बाद पुलिस के निर्देश पर कंपनी के खाते फ्रीज कर दिए गए थे और करीब 80 लाख रुपये होल्ड हो गए थे। हालांकि कंपनी के खिलाफ कोई सीधा आरोप साबित नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां सबूत होने पर कार्रवाई कर सकती हैं, लेकिन बिना वजह कारोबार ठप करना स्वीकार्य नहीं है।
Delhi High Court की सख्त टिप्पणी, कहा—बिना आधार खाते फ्रीज करना मनमानी
Delhi High Court नई दिल्ली में एक अहम फैसले में Delhi High Court ने साफ कहा है कि किसी व्यक्ति या कंपनी को आरोपित बनाए बिना उसके बैंक खातों को ब्लैंकेट तरीके से फ्रीज करना मनमाना कदम है। अदालत ने इसे जीविका के अधिकार और व्यापार की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया। इसी के साथ कोर्ट ने एसबीआई और एचडीएफसी बैंक में फ्रीज किए गए मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के खाते तुरंत डी-फ्रीज करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की बेंच ने कहा कि बिना किसी ठोस संलिप्तता के खाते फ्रीज करना किसी निर्दोष संस्था के रोजमर्रा के कामकाज को पूरी तरह ठप कर देता है। इससे न सिर्फ व्यापारिक साख को नुकसान पहुंचता है, बल्कि भारी आर्थिक क्षति भी होती है।

संविधान के अधिकारों पर चोट, कोर्ट ने जताई कड़ी आपत्ति
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है। जज ने टिप्पणी की कि बिना कारण बताए खातों को अनिश्चित काल तक फ्रीज रखना कानून की भावना के खिलाफ है।
मामला गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (आई4सी) से जुड़ा है। मालाबार गोल्ड की याचिका के मुताबिक, उसके एक ग्राहक के खिलाफ साइबर ठगी की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस के निर्देश पर कंपनी के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए थे।
80 लाख रुपये होल्ड, कंपनी पर कोई सीधा आरोप नहीं
Malabar Gold & Diamonds ने अदालत को बताया कि मार्च 2025 तक करीब 80 लाख रुपये होल्ड कर लिए गए थे। हालांकि कंपनी के खिलाफ न तो कोई औपचारिक शिकायत थी और न ही किसी तरह की मिलीभगत का सबूत मिला था।
कोर्ट ने माना कि खातों के फ्रीज रहने से कर्मचारियों की सैलरी और रोजमर्रा के खर्च तक अटक गए थे। अदालत ने यह भी कहा कि अगर जांच एजेंसियों के पास कंपनी की संलिप्तता के ठोस सबूत हैं, तो वे कानून के मुताबिक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन बिना आधार किसी कारोबार को ठप करना स्वीकार्य नहीं है।
केवाईसी पूरी करने के बाद भी उठाना पड़ा नुकसान
मालाबार गोल्ड के मुताबिक, कंपनी ने केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने के बाद एक फर्म को सोने के बार और कॉइन बेचे थे। बाद में उसी खरीदार के खिलाफ साइबर शिकायत दर्ज हुई। हालांकि इस शिकायत के बावजूद सीधे तौर पर मालाबार के खातों को फ्रीज कर दिया गया, जिसे कोर्ट ने अनुचित माना।
अदालत के इस फैसले को कारोबारी जगत के लिए अहम माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि जांच के नाम पर किसी भी संस्था के वैध व्यापार को बिना ठोस कारण बाधित नहीं किया जा सकता।
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