संक्षेप (Summary) DTC दिल्ली में DTC बसों में महिलाओं के मुफ्त सफर के लिए पिंक कार्ड अनिवार्य करने के फैसले पर सियासी बवाल मच गया है। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने भाजपा सरकार पर गरीब और पूर्वांचली महिलाओं के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया है। सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
DTC बसों में ‘पिंक कार्ड’ अनिवार्य, दिल्ली की राजनीति में मचा घमासान
दिल्ली। राजधानी में महिलाओं के मुफ्त बस सफर को लेकर लागू की गई नई ‘पिंक कार्ड’ व्यवस्था पर सियासत तेज हो गई है। 2 फरवरी 2026 से लागू इस फैसले को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष Saurabh Bharadwaj ने इसे गरीब और खासकर पूर्वांचल की महिलाओं के खिलाफ साजिश बताया है।
पहले पिंक टिकट, अब पिंक कार्ड… क्या बदला?

अब तक दिल्ली में Delhi Transport Corporation (DTC) की बसों में महिलाओं को पिंक टिकट के जरिए मुफ्त सफर की सुविधा मिलती थी।सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाया कि जब व्यवस्था बिना किसी परेशानी के चल रही थी, तो अचानक ‘पिंक कार्ड’ अनिवार्य करने की जरूरत क्यों पड़ी?उन्होंने कहा कि पहले यूपी, बिहार या हरियाणा से आकर दिल्ली में रहने वाली कोई भी महिला बस में चढ़ती थी और उसे तुरंत मुफ्त पिंक टिकट मिल जाता था।
‘गरीब और पूर्वांचली महिलाओं के खिलाफ साजिश’ का आरोप
AAP नेता ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि नई व्यवस्था से गरीब महिलाओं को दिक्कत होगी।उनका कहना है कि कार्ड बनवाने के लिए महिलाओं को दिल्ली के आधार कार्ड या स्थानीय दस्तावेज दिखाने पड़ सकते हैं। जबकि दिल्ली में रहने वाली लाखों पूर्वांचली महिलाओं के पास उनके मूल राज्यों—उत्तर प्रदेश या बिहार—के दस्तावेज ही हैं।ऐसे में वे मुफ्त यात्रा के अधिकार से वंचित हो सकती हैं।
भ्रष्टाचार की आशंका पर भी उठाए सवाल
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि जिस योजना में पहले भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं थी, अब उसमें दलालों और अफसरों की भूमिका बढ़ सकती है।उन्होंने आरोप लगाया कि कार्ड बनाने के लिए प्राइवेट कंपनियों को ठेका देकर जनता के पैसे की बर्बादी की जा रही है। साथ ही महिलाओं को कार्ड बनवाने के लिए चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।

भाजपा सरकार की ओर से क्या कहा गया?
हालांकि, भाजपा सरकार की ओर से इस फैसले को लेकर अब तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि सरकार व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित और डेटा आधारित बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठा रही है।फिलहाल, इस मुद्दे पर दिल्ली की राजनीति गर्म है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।
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