Noida का फोर्टिस हॉस्पिटल विवादों में: मरीज ने लगाया गलत ऑपरेशन का आरोप, भेजा कानूनी नोटिस – इलाज और अधिवक्ता खर्च की मांग
Noida में बड़ा मेडिकल विवाद: फोर्टिस हॉस्पिटल पर गलत ऑपरेशन का आरोप
नोएडा। एक बार फिर देश के नामी अस्पतालों में से एक, फोर्टिस हॉस्पिटल विवादों में आ गया है। नोएडा के इस अस्पताल पर एक मरीज ने गलत ऑपरेशन करने का गंभीर आरोप लगाया है। मरीज का दावा है कि डॉक्टरों ने बिना उसकी सहमति के ऑपरेशन किया और इसके बाद हालत और बिगड़ गई। अब मरीज ने अस्पताल को कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें इलाज का पूरा खर्च और अधिवक्ता शुल्क की मांग की गई है।अस्पताल की ओर से कहा गया है कि उन्हें यह नोटिस प्राप्त हुआ है और वे वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं।
मरीज का आरोप: “बिना पूछे कर दिया ऑपरेशन, रिपोर्ट में भी गड़बड़ी”
मरीज ने अपने नोटिस में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने अस्पताल में सामान्य जांच के लिए भर्ती कराया था, लेकिन डॉक्टरों ने उसकी अनुमति लिए बिना ऑपरेशन कर दिया।
मरीज के अनुसार, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में यह बताया गया कि उसके शरीर में 53 सीसी का प्रोस्टेट है। लेकिन डॉक्टरों ने ऑपरेशन से पहले न तो परिवार को सूचित किया और न ही उसकी मंजूरी ली।

मरीज का कहना है —मुझे केवल दवा के लिए भर्ती किया गया था। डॉक्टरों ने बिना पूछे सर्जरी कर दी। इसके बाद मेरी हालत और बिगड़ गई। मुझे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से कष्ट झेलना पड़ा।”नाराज़ मरीज ने अपने वकील के जरिए फोर्टिस प्रबंधन को नोटिस भेजते हुए कहा है कि —अस्पताल को मेरा इलाज का पूरा खर्च, अधिवक्ता की फीस और मानसिक पीड़ा का मुआवज़ा देना होगा, नहीं तो कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाऊँगा।”
कानूनी नोटिस में क्या कहा गया?
मरीज द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस में विस्तार से बताया गया है कि कैसे अस्पताल ने मेडिकल एथिक्स की अवहेलना की। नोटिस में यह बातें लिखी गई हैं:
- अस्पताल ने बिना अनुमति के सर्जरी की।
- रिपोर्ट में मरीज की स्थिति को गलत तरीके से दिखाया गया।
- ऑपरेशन के बाद कोई सुधार नहीं हुआ, बल्कि दिक्कतें बढ़ीं।
- अस्पताल ने अब तक माफी नहीं मांगी और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया।
- इस पूरे मामले में मरीज को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक आघात भी झेलना पड़ा।

फोर्टिस हॉस्पिटल की प्रतिक्रिया
मामले पर फोर्टिस हॉस्पिटल प्रबंधन ने कहा —हमें एक क्लाइंट से कानूनी नोटिस प्राप्त हुआ है। हम इसकी जांच कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से उचित कानूनी जवाब दिया जाएगा।”अस्पताल की ओर से यह भी कहा गया कि वे मरीज की गोपनीयता (Patient Confidentiality) का पूरा ध्यान रखेंगे और बिना तथ्यों की पुष्टि किए कोई बयान नहीं देंगे।
कानूनी विशेषज्ञों की राय: बिना सहमति के ऑपरेशन करना गंभीर अपराध”
मेडिकल लॉ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि अस्पताल ने मरीज की या उसके परिजनों की सहमति लिए बिना सर्जरी की है, तो यह ‘मेडिकल नेग्लिजेंस’ (Medical Negligence) के दायरे में आता है।वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक त्रिपाठी कहते हैं —मरीज की अनुमति के बिना किसी भी सर्जिकल प्रक्रिया को अंजाम देना कानूनन गलत है। यह ‘कंसेंट वायलेशन’ (Consent Violation) माना जाएगा। ऐसे मामलों में अस्पताल पर मुआवजा, सस्पेंशन और लाइसेंस रद्द तक की कार्रवाई हो सकती है।”उन्होंने आगे कहा कि मरीज को अदालत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act) के तहत भी न्याय मिल सकता है।
मेडिकल नेग्लिजेंस के बढ़ते मामले: क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं?
देशभर में मेडिकल नेग्लिजेंस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
हाल के वर्षों में कई निजी अस्पतालों पर मरीजों ने लापरवाही और गलत इलाज के आरोप लगाए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सबसे बड़ी समस्या अस्पतालों की पारदर्शिता की कमी और मरीजों की जानकारी न देना है।2024 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 1,200 से अधिक मेडिकल लापरवाही के मामले उपभोक्ता अदालतों में दर्ज होते हैं, जिनमें से 60% में मरीजों के पक्ष में फैसला आता है।
नोएडा प्रशासन भी सतर्क
नोएडा जिला स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले का संज्ञान लिया है और कहा है कि यदि शिकायत आधिकारिक रूप से दी जाती है, तो स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल का निरीक्षण करेगी।
एक अधिकारी ने कहा —
हमने मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं। मरीज की लिखित शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
डॉक्टरों की राय: “बिना सहमति के कोई सर्जरी नहीं की जाती”
कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी बड़े अस्पताल में सर्जरी तभी होती है जब मरीज या उसके परिवार की लिखित अनुमति मिल जाती है।
दिल्ली के सर्जन डॉ. आर. मिश्रा ने कहा —
संभव है कि यहां कोई कम्युनिकेशन गैप हुआ हो। अगर मरीज को लगा कि उससे बिना पूछे ऑपरेशन किया गया, तो अस्पताल को पारदर्शिता से जवाब देना चाहिए। इससे दोनों पक्षों के बीच गलतफहमी दूर होगी।”
मरीजों के अधिकार क्या कहते हैं?
भारत में ‘पेशेंट राइट्स चार्टर’ (Patient Rights Charter) के तहत हर मरीज को यह अधिकार है कि —
- उसे अपनी बीमारी और इलाज की पूरी जानकारी दी जाए।
- किसी भी सर्जरी या उपचार के लिए उसकी सहमति अनिवार्य है।
- बिना अनुमति किसी भी प्रक्रिया को अंजाम देना कानूनी अपराध है।
- मरीज को अस्पताल से अपनी रिपोर्ट और रिकॉर्ड्स प्राप्त करने का अधिकार है।
यदि इन अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो मरीज स्टेट हेल्थ अथॉरिटी या कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज कर सकता है।
समाज में चर्चा: “बड़े अस्पतालों की जवाबदेही जरूरी
इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी फोर्टिस हॉस्पिटल की आलोचना शुरू हो गई है।
लोगों का कहना है कि नामी अस्पतालों में मरीजों के साथ लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।एक यूज़र ने लिखा —जब बड़े अस्पतालों में भी मरीज सुरक्षित नहीं हैं, तो आम लोग कहां जाएँ? पारदर्शिता और जिम्मेदारी जरूरी है।”