संक्षेप (Summary) नोएडा में बढ़ते प्रदूषण और AQI के 400 पार पहुंचने के बाद प्रशासन ने सभी स्कूलों में हाइब्रिड मोड लागू कर दिया है। अब बच्चों के लिए स्कूल आना अनिवार्य नहीं होगा—अभिभावक तय करेंगे कि बच्चे स्कूल जाएं या ऑनलाइन पढ़ाई करें।स्कूलों को ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरीकों से कक्षाएं चलानी होंगी।
अधिकतर अभिभावकों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
प्रदूषण बढ़ने के कारण—स्मॉग, निर्माण धूल, वाहन, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली का असर बताया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों को N95 मास्क और बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी है।
स्थिति और बिगड़ी तो स्कूल पूरी तरह ऑनलाइन मोड में भी जा सकते हैं।
Noida दिल्ली-एनसीआर में लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता के बीच नोएडा प्रशासन ने एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। जिले में प्रदूषण का स्तर कई दिनों से बेहद खराब श्रेणी में बना हुआ है, जिसके चलते नोएडा के सभी स्कूलों में हाइब्रिड मोड लागू कर दिया गया है। यानी अब बच्चे स्कूल आकर पढ़ सकते हैं या चाहें तो घर से ऑनलाइन क्लास कर सकते हैं—यह फैसला पूरी तरह अभिभावकों पर छोड़ दिया गया है।प्रशासन का यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है, और स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे दोनों मोड—ऑनलाइन और ऑफलाइन—के लिए समान रूप से शिक्षण सामग्री और कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करें।
क्यों लिया गया हाइब्रिड मोड का फैसला?
नोएडा में बीते दिनों वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई बार 400 के पार दर्ज किया गया। यह स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है और बच्चों, बुजुर्गों तथा अस्थमा के मरीजों के लिए अत्यंत हानिकारक है।
बच्चों के स्वास्थ्य को सबसे अधिक खतरा होता है क्योंकि:
- वे अधिक समय बाहर खेलते हैं
- उनका इम्यून सिस्टम विकसित हो रहा होता है
- प्रदूषित हवा फेफड़ों पर गंभीर असर छोड़ती है
इन्हीं कारणों से प्रशासन ने तत्काल बैठक कर स्कूलों के लिए हाइब्रिड व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया।
क्या है हाइब्रिड मोड—बच्चों को कैसे मिलेगी सुविधा?

हाइब्रिड मोड के तहत:
- स्कूल खुले रहेंगे, लेकिन उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी।
- अभिभावक चाहें तो बच्चे को घर से ऑनलाइन क्लास दिला सकते हैं।
- स्कूलों को अपने पाठ्यक्रम, असाइनमेंट और परीक्षाओं को दोनों तरीकों से उपलब्ध कराना होगा।
- शिक्षक एक ही समय पर कक्षा में मौजूद बच्चों और ऑनलाइन जुड़े छात्रों दोनों को पढ़ाएंगे।
यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक NOIDA में AQI सामान्य स्तर पर नहीं आ जाता।
अभिभावक और स्कूल क्या कह रहे हैं?
अभिभावकों की राहत
अधिकतर अभिभावक इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। उनका कहना है कि:
- “प्रदूषण से बच्चों की सांस फूल रही है।”
- “छोटे बच्चों को सुबह-सुबह मास्क पहनाकर भेजना मुश्किल हो रहा था।”
- “हाइब्रिड मोड बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।”

स्कूलों की तैयारी
नोएडा के कई स्कूल पहले से ही डिजिटल सुविधाओं से लैस हैं। कोविड-19 महामारी के समय स्कूलों ने ऑनलाइन सिस्टम को मजबूत बना लिया था, इसलिए इस बार हाइब्रिड व्यवस्था लागू करने में किसी बड़ी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा।
कुछ स्कूलों का कहना है कि:
- वे प्रतिदिन कक्षाओं की रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराएंगे
- असाइनमेंट दोनों मोड में दिए जाएंगे
- उपस्थिति को ऑनलाइन भी माना जाएगा
प्रदूषण की मौजूदा स्थिति—क्यों बिगड़ रही है हवा
गौतम बुद्ध नगर क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ने के कुछ प्रमुख कारण हैं:
- दिल्ली से आने वाला स्मॉग
- वाहनों का भारी दबाव
- निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल
- औद्योगिक उत्सर्जन
- पराली जलने का असर
नोएडा-कर्फ्यू (GRAP) के तहत कई प्रतिबंध पहले से लागू हैं, जिनमें निर्माण कार्य रोकना, पानी से सड़कों की धुलाई, और डीजल जेनरेटर बंद करना शामिल है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय—बच्चों को विशेष सावधानी की आवश्यकता
डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण के कारण:
- बच्चों को सांस लेने में दिक्कत
- आंखों में जलन
- एलर्जी
- खांसी
- तेज सिरदर्द
जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
पेडियाट्रिक डॉक्टरों की सलाह:
- बच्चों को N95 मास्क पहनाना
- घर में एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करना
- सुबह-शाम की बाहरी गतिविधियों से बचना
- पानी ज्यादा पिलाना
- इम्यूनिटी को मजबूत रखना
नोएडा प्रशासन का संदेश—‘बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि’
प्रशासन ने कहा:
हमारा पहला लक्ष्य बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य है। प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी रहने तक स्कूलों में हाइब्रिड मोड लागू रहेगा।”
अधिकारियों का कहना है कि स्कूल स्वयं यह सुनिश्चित करें कि:
- ऑनलाइन सामग्री समय पर उपलब्ध हो
- ऑफलाइन आने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण हो
- मास्क और सैनिटाइजर स्कूलों में उपलब्ध हों
क्या आगे भी बढ़ सकता है प्रतिबंध?
AQI के आधार पर GRAP (Graded Response Action Plan) का अगला चरण लागू हो सकता है, जिसके तहत:
- स्कूल पूरी तरह ऑनलाइन भी किए जा सकते हैं
- निर्माण गतिविधियाँ बंद होंगी
- वाहनों पर भी सीमाएं लग सकती हैं
अगर आने वाले दिनों में प्रदूषण कम नहीं हुआ तो प्रशासन और सख्त कदम उठा सकता है।
भविष्य की पढ़ाई—हाइब्रिड मॉडल का नया दौर?
नोएडा जैसे शहरी क्षेत्रों में यह सवाल उठ रहा है कि:
- क्या भविष्य में शिक्षा स्थायी रूप से हाइब्रिड रूप ले सकती है?
- क्या स्कूल नियमित रूप से दोनों मोड उपलब्ध कराएंगे?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाइब्रिड मॉडल बच्चों को तकनीक के अनुकूल बनाता है और इससे सीखने की प्रक्रिया में लचीलापन भी आता है।
हालांकि, लंबे समय तक ऑनलाइन मोड से बच्चों की एकाग्रता और सामाजिक विकास प्रभावित हो सकता है।