Wednesday, February 4, 2026

Noida छात्र सुसाइड केस: नियमों की अनदेखी, प्राइवेट हॉस्टलों की अव्यवस्था ने छीनी छात्र की जान

by Sujal
Noida के छात्र सुसाइड केस ने शैक्षणिक संस्थानों और प्राइवेट हॉस्टलों की लापरवाही उजागर कर दी। मोटी फीस के बावजूद सुरक्षा, भोजन और नियमों का अभाव सामने आया।

संक्षेप में खबर: Noida छात्र सुसाइड केस ने शैक्षणिक संस्थानों और प्राइवेट हॉस्टलों की लापरवाही उजागर कर दी है। झांसी निवासी बीटेक छात्र उदित सोनी से 1.60 लाख रुपये हॉस्टल फीस लेने के बावजूद उसे परिसर से दूर प्राइवेट हॉस्टल में रखा गया, जहां सुरक्षा, भोजन और नियमों की भारी कमी थी। छात्रों का आरोप है कि अव्यवस्थाओं और हॉस्टल संचालक की प्रताड़ना से परेशान होकर छात्र ने आत्मघाती कदम उठाया। घटना के बाद छात्रों ने हंगामा कर तोड़फोड़ की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

Noida छात्र सुसाइड केस ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल

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गौतमबुद्ध नगर में पढ़ाई करने आए एक छात्र की आत्महत्या ने शैक्षणिक संस्थानों और प्राइवेट हॉस्टलों की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। विभिन्न राज्यों और जिलों से आने वाले छात्र बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं, लेकिन हॉस्टल व्यवस्था में फैली अव्यवस्थाएं उनके लिए मानसिक तनाव का कारण बनती जा रही हैं।

Noida Khabar (73)

मोटी फीस, फिर भी नहीं मिली नियमों के अनुसार सुविधा

झांसी निवासी बीटेक छात्र उदित सोनी से हॉस्टल के नाम पर करीब 1.60 लाख रुपये फीस जमा कराई गई थी। इसके बावजूद जिस यूनिवर्सिटी में वह पढ़ता था, वहां के परिसर में उसे रहने की सुविधा नहीं दी गई। प्रबंधन ने उसे कई किलोमीटर दूर स्थित प्राइवेट हॉस्टल में ठहरा दिया, जो नियमानुसार गलत है।

प्राइवेट हॉस्टलों में न सुरक्षा, न व्यवस्था

जिस टीजेड और ईजेड हॉस्टल में उदित रह रहा था, वहां सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं थे। छात्रों ने बताया कि न तो एंट्री-एग्जिट की सही निगरानी होती थी और न ही समय का रिकॉर्ड रखा जाता था। सिर्फ इतना कहा जाता था कि रात 10 बजे से पहले लौट आना है। ऐसे में छात्रों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे थी।

खाने की गुणवत्ता और समय दोनों पर सवाल

हॉस्टल में रहने वाले छात्रों का कहना है कि उन्हें न तो समय पर खाना मिलता था और न ही तय मेनू के अनुसार। गुणवत्ता भी बेहद खराब थी। कई बार शिकायत करने के बावजूद हॉस्टल प्रबंधन ने कोई सुधार नहीं किया।

संस्थानों के वादे, हकीकत कुछ और

छात्रों का आरोप है कि दाखिले के समय शैक्षणिक संस्थान सभी सुविधाएं देने का वादा करते हैं। लेकिन फीस जमा होते ही उन्हें उन्हीं प्राइवेट हॉस्टलों में भेज दिया जाता है, जिनसे संस्थानों का अनुबंध होता है। मजबूरी में छात्रों को वहीं रहना पड़ता है, चाहे हालात कितने भी खराब क्यों न हों।

मानसिक दबाव बना आत्मघाती कदम की वजह?

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छात्रों का कहना है कि लगातार अव्यवस्थाएं, हॉस्टल संचालक का गलत व्यवहार और कथित प्रताड़ना ने उदित सोनी को मानसिक रूप से तोड़ दिया। इन्हीं हालातों से परेशान होकर उसने आत्मघाती कदम उठाया।

देर रात तक छात्रों का हंगामा, जमकर तोड़फोड़

घटना के बाद हॉस्टल में गुस्से का माहौल बन गया। रात करीब 11:30 बजे तक डेढ़ घंटे छात्रों ने जमकर हंगामा किया। हॉस्टल के बाहर खड़ी बसों के शीशे तोड़े गए और इमारत पर पथराव किया गया। आसपास के हॉस्टलों में रहने वाले छात्र भी मौके पर पहुंच गए।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

छात्रों ने हॉस्टल संचालक और वार्डन पर गंभीर आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते नियमों का पालन कराया जाता और अव्यवस्थाएं दूर की जातीं, तो शायद एक होनहार छात्र की जान बच सकती थी।

यह मामला न सिर्फ एक छात्र की मौत का है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है, जहां शिक्षा के नाम पर नियमों को दरकिनार कर छात्रों की जिंदगी दांव पर लगाई जा रही है।

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