Summary (संक्षेप में पूरी खबर) Noida Voter वेरिफिकेशन की रफ्तार धीमी पड़ गई है क्योंकि मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम उर्दू भाषा में दर्ज मिले हैं। बीएलओ को न नाम समझने में आसानी हो रही है, न ही पते और फोन नंबर के अभाव में मतदाताओं को ढूंढा जा रहा है। कई सेक्टरों में आधे से ज्यादा फॉर्म अभी अधूरे हैं। प्रशासन ने समस्या स्वीकार की है और समाधान प्रक्रिया शुरू की गई है।

Noida Voter वेरिफिकेशन की रफ्तार धीमी, उर्दू नामों से बीएलओ परेशान
Noida Voter में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान के दौरान इस बार बीएलओ को एक अनोखी और चुनौतीपूर्ण समस्या का सामना करना पड़ रहा है। शहर के कई सेक्टरों में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम सामने आए हैं, जिनके विवरण उर्दू में दर्ज हैं। नाम और पता पढ़ने में होने वाली यह दिक्कत पूरे सत्यापन अभियान को धीमा कर रही है।
कई जगहों पर फॉर्म आधे-अधूरे रह जा रहे हैं, जबकि मतदाताओं को खोजने में बीएलओ को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
घर-घर सत्यापन पर ब्रेक—उर्दू नामों ने फंसा दी प्रक्रिया
बीएलओ टीमों के अनुसार, मतदाता सूची में कई नाम पूरी तरह उर्दू में दर्ज हैं, जिनके साथ न तो स्पष्ट पता लिखा है और न ही फोन नंबर मौजूद है। ऐसे में मतदाताओं की पहचान करना ही मुश्किल नहीं, बल्कि पूरे रिकार्ड का मिलान भी अटक रहा है।
दैनिक जागरण की पड़ताल में भी कई सेक्टरों में यही स्थिति देखने को मिली, जहां मोबाइल ऐप और फोटोज़ के सहारे नाम समझने की कोशिश की जा रही है।
सेक्टर-70—आधे फॉर्म भी पूरे नहीं, उर्दू नाम सबसे बड़ी चुनौती
सुबह 11 बजे सेक्टर-70 के ए, बी, बीएच और बीएस ब्लॉक में कुल 2034 फार्म आवंटित थे, लेकिन सिर्फ 50% ही पूरे हो सके हैं।
बीएलओ संजीव कुमार के अनुसार:
- अनेक फॉर्म में नाम उर्दू में
- पते और फोन नंबर गायब
- लगभग 40 मतदाता अभी तक नहीं मिल पाए
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष अमित चौहान ने भी बताया कि टीम लगातार खोज रही है, लेकिन भाषा बाधा के कारण कई नाम पहचान में नहीं आ रहे।

सेक्टर-46—60% फॉर्म पूरे, फिर भी उर्दू नामों ने बढ़ाई मुश्किल
दोपहर 12 बजे तक यहां 3254 फॉर्म में से 60% सत्यापन पूरा हो सका।
बीएलओ टीम के मुताबिक:
- कई लोगों को अपना EPIC नंबर तक नहीं पता
- लगभग 20 फॉर्म उर्दू में, जिनसे पहचान करना मुश्किल
- लोगों की अनुपस्थिति भी बड़ी समस्या
सेक्टर-48—लोग मिले नहीं, नाम पढ़े नहीं; आधा काम अभी भी बाकी
यहां ए, बी, सी, के और डी ब्लॉक में लगभग 50% काम पूरा है।
करीब 30 नाम उर्दू में, जिनका पता लगाने में टीम विफल रही क्योंकि:
- घर पर लोग मिल नहीं रहे
- फोन नंबर कहीं दर्ज नहीं
- पता अधूरा
सेक्टर-50—अधूरे पते और बिना नंबर वाले फॉर्म बने रुकावट
दोपहर 1:15 तक बीएलओ टीम के मुताबिक:
- फॉर्म में उर्दू नाम
- पते अधूरे
- फोन नंबर गायब
- कम से कम 20 मतदाताओं का सत्यापन अटका

आखिर वोटर लिस्ट में उर्दू नाम आए कैसे? वजह जानकर चौंकेंगे
वोटर रजिस्ट्रेशन ऐप में भाषा चयन का विकल्प होता है। कई राज्यों में उर्दू का उपयोग अधिक होने के कारण यह भाषा भी उपलब्ध है।
संभावना है कि:
- मतदाता मूल रूप से ऐसे जिले से हों जहाँ उर्दू प्रयोग होती है
- उन्होंने पता बदला, लेकिन भाषा अपडेट नहीं की
- ऐसे नाम अब भी उर्दू में ही छपकर आ रहे हैं
प्रशासन का बयान—समस्या पहचान ली है, समाधान की प्रक्रिया शुरू
एडीएम वित्त एवं राजस्व अतुल कुमार के अनुसार:हमारे जिले की प्राथमिक भाषा उर्दू नहीं है, लेकिन कुछ मतदाता ऐसे क्षेत्रों के मूल निवासी हैं जहाँ उर्दू चलन में है। पता बदलने के बावजूद भाषा नहीं बदली गई, इसलिए लिस्ट में नाम उर्दू में दर्ज आए हैं।”उन्होंने आश्वासन दिया कि बीएलओ को आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं और सत्यापन जल्द ही पूरा कराया जाएगा।
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