संक्षेप में खबर: Yuvraj Mehta सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद भी सुरक्षा इंतजाम अधूरे हैं। निर्माणाधीन बेसमेंट में भरे पानी के पास 100 मीटर तक सड़क धंसी हुई है, जहां से रोजाना वाहन गुजर रहे हैं। न बैरिकेडिंग है, न रिफ्लेक्टर और न ही स्ट्रीट लाइट, जिससे किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।
Yuvraj Mehta नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। निर्माणाधीन बेसमेंट में भरे पानी में डूबकर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया था। हालांकि, इसके बावजूद मौके पर आज भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस जगह हादसा हुआ, उससे भी ज्यादा खतरनाक हालात बेसमेंट के दूसरे किनारे बने हुए हैं, जहां सड़क करीब 100 मीटर तक टूटकर पानी में धंस चुकी है।

हादसे के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
युवराज मेहता की मौत के बाद सेक्टर-150 का टी-प्वाइंट और निर्माणाधीन बेसमेंट लगातार चर्चा में है। बताया जा रहा है कि बेसमेंट में करीब 30 फीट तक पानी भरा हुआ है। हादसे के समय यहां न तो बैरिकेडिंग थी और न ही डिवाइडर या रिफ्लेक्टर लगे थे। घने कोहरे में दृश्यता कम होने के कारण इंजीनियर सड़क और पानी के बीच फर्क नहीं कर पाए और हादसे का शिकार हो गए।
दुखद यह है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
100 मीटर तक सड़क धंसी, हर पल जान का खतरा

बेसमेंट के दूसरे किनारे बनी सर्विस रोड की हालत और भी भयावह है। करीब 100 मीटर लंबाई में सड़क टूटकर सीधे पानी में जा गिरी है। अब सड़क और पानी के बीच कोई स्पष्ट गैप नहीं बचा है।
इसके बावजूद इस रोड से दिन-रात वाहन गुजर रहे हैं। थोड़ी सी चूक या कम दृश्यता किसी भी वक्त एक और जानलेवा हादसे का कारण बन सकती है।
अधिकारियों की मौजूदगी, लेकिन अधूरी कार्रवाई
हादसे के बाद एसआईटी टीम और अलग-अलग विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। हालांकि, सुरक्षा उपाय सिर्फ घटनास्थल के सामने वाले हिस्से तक ही सीमित कर दिए गए।

जिस सर्विस रोड की हालत सबसे ज्यादा खतरनाक है, उसे लगभग नजरअंदाज कर दिया गया। न वहां बैरिकेडिंग कराई गई और न ही किसी तरह की चेतावनी व्यवस्था की गई।
न लाइट, न चेतावनी, न बैरिकेडिंग
इस खतरनाक सर्विस रोड के आसपास स्ट्रीट लाइट तक नहीं लगी हैं। सड़क किनारे पानी में उगी बड़ी-बड़ी झाड़ियां खतरे को और छिपा देती हैं। रात के समय या कोहरे में यहां से गुजरना किसी जुए से कम नहीं है।
हैरानी की बात यह है कि न तो रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं, न दुर्घटना की आशंका से जुड़े चेतावनी बोर्ड, और न ही किसी तरह की स्थायी बैरिकेडिंग।

सवालों के घेरे में प्रशासन
युवराज मेहता की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसी की जान जाने के बाद ही प्रशासन जागता है, और वह भी अधूरा?
जब एक तरफ हादसे की वजह साफ तौर पर सुरक्षा इंतजामों की कमी बताई जा रही है, तो दूसरी तरफ उसी जगह और भी ज्यादा खतरनाक हालात बने रहना गंभीर चिंता का विषय है।
कब खत्म होगा जानलेवा खतरा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक पूरे इलाके में ठोस बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, स्ट्रीट लाइट और चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए जाते, तब तक हादसों का खतरा बना रहेगा।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी और युवराज मेहता की कुर्बानी का इंतजार कर रहा है, या समय रहते इस जानलेवा खतरे को खत्म किया जाएगा।