Thursday, February 5, 2026

स्ट्रोक का साइलेंट किलर: स्मोकिंग से ज्यादा खतरनाक है वायु प्रदूषण

by भारतीय Tv
स्ट्रॉक के लिए जिम्मेदार है वायु प्रदूषण

हाल के समय में वायु प्रदूषण ने वैश्विक स्वास्थ्य के लिए चिंता का एक बड़ा विषय बना दिया है। इस बढ़ते प्रदूषण के कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही हैं, और हाल ही में एक अध्ययन ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। यह अध्ययन बताता है कि वायु प्रदूषण अब दुनियाभर में स्ट्रोक का दूसरा सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर बन गया है, जो धूम्रपान से भी अधिक खतरनाक है।

अध्ययन की प्रमुख बातें

द लांसेट न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में 204 देशों के डेटा का गहराई से विश्लेषण किया गया है, जिसमें 1990 से 2021 तक स्ट्रोक से होने वाली मौतों और उनके कारणों का जिक्र किया गया है। यह अध्ययन ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) अध्ययन का एक हिस्सा है, जिसने वायु प्रदूषण के प्रभावों को व्यापक रूप से दर्शाया है।

वैश्विक स्थिति

अध्ययन में पाया गया है कि लैटिन अमेरिका, मध्य एशिया, और अफ्रीका के साथ-साथ दक्षिण एशिया में बाहरी वायु प्रदूषण स्ट्रोक से होने वाली मौतों के लिए एक उच्च जोखिम कारक बना हुआ है। इन क्षेत्रों में, घरेलू वायु प्रदूषण की वजह से भी स्ट्रोक से जुड़ी मौतें और विकलांगताएं अधिक हैं। इसके विपरीत, पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका में यह समस्या कम देखी जाती है।

धूम्रपान से बड़ा खतरा

इस अध्ययन का एक और डराने वाला पहलू यह है कि वायु प्रदूषण का प्रभाव धूम्रपान से कहीं ज्यादा है। अध्ययन में पाया गया है कि उच्च सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर के बाद वायु प्रदूषण दुनियाभर में स्ट्रोक से संबंधित मौतों और विकलांगताओं के लिए दूसरा सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। वायु प्रदूषण से स्ट्रोक का खतरा 16.6% था, जबकि धूम्रपान से यह केवल 13.3% रहा।

संख्यात्मक आंकड़े

वर्ष 2021 में दुनिया में कुल 11.9 मिलियन नए स्ट्रोक के मामले सामने आए। यह आंकड़े इस बढ़ते खतरे की गंभीरता को दर्शाते हैं और यह स्पष्ट करते हैं कि वायु प्रदूषण के प्रभावों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

वायु प्रदूषण से न केवल स्ट्रोक, बल्कि अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे हृदय रोग, सांस की बीमारियाँ, और अन्य क्रॉनिक रोग। यह स्थिति और भी चिंताजनक है क्योंकि वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, और इसका प्रभाव सभी आयु वर्ग के लोगों पर पड़ रहा है।

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