Aligarh में मंदिरों की दीवारों पर ‘I Love Mohammad’, इलाके में मचा हड़कंप
Aligarh में शनिवार को सुबह-सुबह लोगों की नींद उस वक्त उड़ गई जब उन्होंने देखा कि शहर के चार मंदिरों की दीवारों पर किसी ने स्प्रे पेंट से बड़े अक्षरों में लिखा था — “I Love Mohammad.”
यह देखते ही इलाके में तनाव फैल गया। कई लोग मौके पर जमा हो गए और पुलिस को इसकी सूचना दी गई। शुरुआत में यह मामला सांप्रदायिक रंग लेता दिखाई दिया, लेकिन पुलिस की जांच ने इस कहानी का पूरा रुख ही बदल दिया।
जांच में निकली चौंकाने वाली सच्चाई
घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी नीरज जादौन ने जांच टीम गठित की। शुरू में हिंदू समुदाय की ओर से मुस्लिम पड़ोसियों पर शक जताया गया और शिकायत भी दर्ज कराई गई।
लेकिन पुलिस को घटनास्थल पर कुछ अजीब लगा — सभी मंदिरों पर “I Love Mohammad” की स्पेलिंग गलत थी। यही गलती पुलिस को सोचने पर मजबूर कर गई।
एसएसपी ने बताया, “जब हमने शब्दों को देखा तो पाया कि हर जगह एक जैसी स्पेलिंग की गलती थी। यह किसी ऐसी भाषा में नहीं लिखा गया था जो किसी मुस्लिम व्यक्ति द्वारा सामान्यतः इस्तेमाल की जाती हो।”

टेक्निकल सर्विलांस ने किया पर्दाफाश
इसके बाद पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस और CCTV फुटेज की मदद ली। जांच में पता चला कि पास के ही गांव के चार युवक — जिशांत कुमार, आकाश कुमार, दिलीप कुमार, और अभिषेक सारस्वत — रात में मंदिरों की दीवारों पर स्प्रे पेंट से यह नारे लिख रहे थे।
इन चारों का अपने मुस्लिम पड़ोसियों के साथ संपत्ति विवाद चल रहा था। साजिश के तहत उन्होंने यह सोचकर दीवारों पर “I Love Mohammad” लिखा ताकि पड़ोसी फंस जाएं और पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर ले।
पुलिस ने ऐसे खोला राज
पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से स्प्रे कैन और अन्य उपकरण बरामद किए गए।
एसएसपी जादौन ने बताया, “ये चारों आरोपी पड़ोसियों को बदनाम करने की नीयत से काम कर रहे थे। लेकिन स्पेलिंग की गलती और सीसीटीवी जांच ने इन्हें बेनकाब कर दिया।”
किन धाराओं में हुई कार्रवाई
चारों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है —
- धारा 299/351(2) (शांति भंग करने का प्रयास),
- धारा 192/197/229/61(2),
- BNS और 7 CLA एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई है।
सभी को जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने कहा कि आगे की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या किसी अन्य व्यक्ति की इसमें भूमिका थी।

स्पेलिंग की गलती बनी जांच की कुंजी
इस मामले में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि स्पेलिंग मिस्टेक ने पुलिस को सच्चाई तक पहुंचा दिया।
बरेली में कुछ महीने पहले इसी तरह के मामले में “I Love Mohammad” सही स्पेलिंग में लिखा गया था। वहीं अलीगढ़ में हर जगह एक जैसी गलती थी।
पुलिस को शक हुआ कि यह किसी बाहरी व्यक्ति का काम नहीं बल्कि अंदरूनी विवाद से जुड़ा मामला हो सकता है।
पड़ोसियों के बीच पुराना विवाद था कारण
जांच में सामने आया कि आरोपियों का अपने मुस्लिम पड़ोसियों के साथ जमीन और घर की सीमा को लेकर झगड़ा चल रहा था। कई बार दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हो चुकी थी।
इसी नाराजगी में आरोपियों ने यह साजिश रची ताकि पड़ोसी जेल जाएं और वे इलाके में “सहानुभूति” पा सकें।
पुलिस ने लोगों से अपील की
अलीगढ़ पुलिस ने कहा कि कोई भी व्यक्ति धार्मिक स्थलों या समुदायों को लेकर अफवाहें न फैलाए।
एसएसपी नीरज जादौन ने कहा —
“हम किसी भी धर्म या समुदाय को बदनाम करने वाली हरकत को बर्दाश्त नहीं करेंगे। अपराध चाहे किसी ने भी किया हो, सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
शहर में शांति बनाए रखने के प्रयास
पुलिस और प्रशासन ने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात की। मंदिरों की दीवारों पर लिखे शब्दों को तुरंत मिटा दिया गया और धार्मिक नेताओं से भी शांति बनाए रखने की अपील की गई।
स्थानीय लोगों ने पुलिस की तत्परता की सराहना की, जिसने मामले को भड़कने से पहले ही सुलझा लिया।
लोगों की प्रतिक्रियाएं
घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई।
कई लोगों ने कहा कि “धर्म के नाम पर झूठे मुकदमे दर्ज करवाने वाले लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।”
वहीं कुछ लोगों ने पुलिस की सतर्कता की सराहना की और कहा कि “अगर पुलिस ने सूझबूझ नहीं दिखाई होती तो अलीगढ़ में बड़ा तनाव फैल सकता था।”
विश्लेषण: सोशल मीडिया युग में अफवाहों से सावधान रहें
यह मामला एक महत्वपूर्ण सबक देता है कि किस तरह छोटी-सी साजिश बड़े साम्प्रदायिक तनाव में बदल सकती है।
अगर पुलिस ने जांच में जल्दबाज़ी की होती, तो निर्दोष लोग फंस सकते थे। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक तकनीक और विवेकपूर्ण जांच आज के समय में कितनी जरूरी है।
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