Gautam Buddha Nagar: खानपुर गांव के स्कूल में बच्चों से मजदूरी कराए जाने का आरोप—शिक्षा विभाग से उच्च स्तरीय जांच की मांग
Gautam Buddha Nagar उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित ग्राम खानपुर का सरकारी प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालय इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। ग्रामीणों की ओर से आरोप लगाया गया है कि स्कूल के शिक्षकों द्वारा बच्चों को पढ़ाने के बजाय उनसे लेवर जैसा काम—जैसे सफाई, सामान ढोना, श्रम कार्य आदि—कराया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।यह मुद्दा अब प्रशासनिक स्तर तक पहुँच गया है, और इसी को लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिलाधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी को शिकायत पत्र भेजा गया है।
बच्चों से लेवर का काम—गांव में बढ़ी नाराज़गी, माता-पिता में रोष
ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय में पढ़ रहे छोटे-छोटे बच्चे, जिनका उद्देश्य सिर्फ शिक्षा प्राप्त करना है, उन्हें पढ़ाई कराने के बजाय बड़ों वाले मजदूरी कार्य दिए जा रहे हैं।
इनमें शामिल हैं:
- विद्यालय परिसर की सफाई
- कचरा उठाना
- शिक्षकों के निजी कार्य
- सामान ढोना
- स्कूल प्रबंधन से जुड़े अन्य श्रम कार्य
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि बच्चों के मानसिक, शैक्षणिक और शारीरिक विकास के साथ गहरा खिलवाड़ भी है।

शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन—गंभीर मामला
शिकायतकर्ताओं ने अपने पत्र में साफ लिखा है कि यह कार्रवाई शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 का खुला उल्लंघन है।
RTE के तहत:
- 6 से 14 वर्ष की आयु तक के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है
- किसी भी बच्चे से बाल श्रम या किसी तरह का काम करवाना प्रतिबंधित है
- शिक्षकों का प्राथमिक कर्तव्य शिक्षण है, अतिरिक्त काम लेना दंडनीय अपराध है
गौतम बुद्ध नगर जैसे शिक्षित और विकसित जिले में ऐसा मामला सामने आना शिक्षा प्रणाली के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों की बार-बार शिकायत—लेकिन कार्रवाई नहीं!
गांव वालों का कहना है कि पहले भी कई बार मौखिक रूप से शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन को शिकायत की गई, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।
कुछ अभिभावकों ने बताया कि शिक्षकों के खिलाफ बोलने पर बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की भी आशंका है।इसी कारण ग्रामीणों को मजबूर होकर यह मामला लिखित रूप से प्रशासन तक पहुंचाना पड़ा।
पत्र में मांगी गई कार्रवाई—जांच, निलंबन और निगरानी की मांग
शिकायत पत्र में प्रशासन से जो मांगें की गई हैं, वे इस प्रकार हैं:
उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
एक स्वतंत्र जांच टीम स्कूल जाकर स्थिति का आकलन करे।

दोषी शिक्षकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई हो
अगर आरोप सही पाए जाएं, तो संबंधित शिक्षकों को निलंबित किया जाए और विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाए।
स्कूल की नियमित निगरानी हो
एक विशेष मॉनिटरिंग टीम गठित की जाए जो समय-समय पर प्राथमिक विद्यालय की गतिविधियों की जांच करती रहे।
बच्चों के साथ हुए मानसिक और शारीरिक शोषण की जांच
बच्चों के बयान दर्ज कर यह पता लगाया जाए कि उन्हें कौन-कौन से कार्य करवाए जाते हैं।
ग्रामीणों की पीड़ा—हमने बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजा है, मजदूरी के लिए नहीं”
गांव के कई माता-पिता ने बताया कि वे मजदूरी करते हैं और चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ें।
एक अभिभावक का बयान था:हम अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं कि उनका भविष्य बने। अगर वही स्कूल उनसे मजदूरी कराए तो फिर हम किस पर भरोसा करें?”यह बयान गांव के माहौल और अभिभावकों में फैले गुस्से को स्पष्ट दर्शाता है।
स्कूल में शिक्षण स्तर पर भी सवाल—पढ़ाई कमजोर, बच्चों का भविष्य अंधेरे में
शिकायत में यह भी कहा गया है कि बच्चों से मजदूरी कराने की वजह से उनकी पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ा है।
कई बच्चे:
- बुनियादी गणित
- हिंदी भाषा
- सामान्य ज्ञान
- और अन्य विषयों में बेहद कमजोर पाए गए हैं
ऐसे में ग्रामीण प्रशासन से यह भी मांग कर रहे हैं कि स्कूल में शिक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा की जाए।
प्रशासन से उम्मीद—क्या होगी अगली कार्रवाई?
ग्रामीणों की लिखित शिकायत के बाद अब यह मामला जिला स्तर तक पहुंच चुका है।
अब तीन महत्वपूर्ण सवाल खड़े होते हैं:
क्या जिला प्रशासन तुरंत जांच टीम भेजेगा?
अगर आरोप सही साबित हुए तो क्या शिक्षक निलंबित होंगे?
क्या स्कूल में शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने के उपाय किए जाएंगे?
गौतम बुद्ध नगर जिला उत्तर प्रदेश में औद्योगिक और शैक्षणिक रूप से अग्रणी माना जाता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएँ जिले की छवि पर भी नकारात्मक असर डालती हैं।
विशेषज्ञों की राय—बाल श्रम और सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों से काम कराए जाने की शिकायतें देश के कई क्षेत्रों में मिलती रही हैं, लेकिन गौतम बुद्ध नगर जैसा शहरी जिला इससे अछूता नहीं रहेगा, यह चौंकाने वाली बात है।
उनके अनुसार:
- ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जरूरी है
- शिक्षकों की जवाबदेही तय हो
- स्कूल प्रबंधन पर भी निगरानी की जाए
- और नियमित निरीक्षण हों ताकि बच्चों का शोषण न हो
आगे की राह—क्या सुधरेगी स्कूल की व्यवस्था?
ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई कितनी तेजी से होगी, यह देखना अब महत्वपूर्ण होगा।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला सिर्फ खानपुर गांव का नहीं, बल्कि जिले की कई अन्य स्कूलों की व्यवस्थाओं को भी उजागर कर सकता है।कई संगठनों का कहना है कि यह अवसर है कि शिक्षा विभाग पूरे जिले में सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करे और व्यापक सुधार लाए।
यह भी पढ़ें
Bangladesh में आम चुनाव और जनमत संग्रह एक ही दिन: जुलाई चार्टर लागू करने पर बड़ा फैसला