संक्षेप (Summary): Galgotia Robot दिल्ली AI समिट में रोबोट डॉग विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर सियासी दबाव बढ़ गया है। समाजवादी पार्टी छात्र यूनियन ने ग्रेटर नोएडा में प्रदर्शन कर यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। पुलिस के आश्वासन के बाद ज्ञापन सौंपकर प्रदर्शन समाप्त किया गया, जबकि यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने गलती स्वीकार की है।
Galgotia Robot AI समिट से उठा विवाद, अब सियासत में बदला मुद्दा
दिल्ली में आयोजित AI Summit में गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित किए गए रोबोटिक डॉग का मामला अब केवल शैक्षणिक या तकनीकी विवाद नहीं रहा।
इंटरनेशनल स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बीच यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग ले चुका है।
सपा छात्र यूनियन का ग्रेटर नोएडा में जोरदार प्रदर्शन

गुरुवार को समाजवादी पार्टी की छात्र यूनियन, गौतम बुद्ध नगर के पदाधिकारियों ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
यूनिवर्सिटी गेट पर नारेबाजी करते हुए छात्रों ने आरोप लगाया कि इस घटना से भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी हुई है।
“यह देश के साथ धोखा है” – छात्र नेताओं का आरोप
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे जिला अध्यक्ष मोहित नागर और प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत भाटी ने कहा कि यूनिवर्सिटी की यह हरकत देश की छवि को ठेस पहुंचाने वाली है।
उन्होंने साफ शब्दों में मांग की कि यूनिवर्सिटी की मान्यता तुरंत रद्द की जाए, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ केस दर्ज हो और उन्हें जेल भेजा जाए।
छात्र नेताओं ने यहां तक कहा कि ऐसी यूनिवर्सिटी को बंद कर देना चाहिए।

पुलिस के आश्वासन के बाद सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। इसके बाद सपा छात्र यूनियन ने मेमोरेंडम सौंपते हुए अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
हालांकि यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने मानी गलती
विवाद बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से सफाई सामने आई है। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एनके गौड़ ने कहा कि मैनेजमेंट ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है।
उन्होंने कहा, “हम एक जिम्मेदार यूनिवर्सिटी हैं और कभी नहीं चाहते कि देश की इज्जत कम हो। फैकल्टी से शब्दों के चयन में गलती हुई है।”

“दोबारा ऐसी गलती नहीं होगी” – रजिस्ट्रार का बयान
एनके गौड़ नेQAQ
ड़ ने आगे कहा कि संबंधित फैकल्टी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रोफेसर नेहा को फिलहाल हटाया नहीं गया है, लेकिन उन्होंने भी अपनी गलती मान ली है और भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो, इसका आश्वासन दिया गया है।
शिक्षा और जिम्मेदारी पर खड़े हुए सवाल
यह पूरा मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि तकनीक के प्रदर्शन में शब्दों और प्रस्तुति की जिम्मेदारी कितनी अहम है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और सरकार इस विवाद पर आगे क्या कदम उठाती है।
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