संक्षेप (Summary):Greater Noida के दनकौर क्षेत्र के दलेलगढ़ गांव में तीन साल का मासूम देवांश खेलते समय 10 फुट गहरे तालाब में गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने अवैध खनन, जलकुंभी और सुरक्षा इंतजामों की कमी को हादसे का कारण बताया। पहले भी तालाब की घेराबंदी और सफाई की मांग की गई थी, लेकिन लापरवाही के चलते एक और मासूम की जान चली गई।
Greater Noida
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली। दनकौर क्षेत्र के दलेलगढ़ गांव में शनिवार शाम तीन साल के देवांश की तालाब में डूबने से मौत हो गई। यह हादसा ऐसे वक्त हुआ है, जब नोएडा सेक्टर-150 में गड्ढे में गिरकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत का मामला अभी लोगों के जेहन से उतरा भी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए जाते, तो एक और घर उजड़ने से बच सकता था।
खेलते-खेलते मौत के मुंह में चला गया देवांश

दलेलगढ़ गांव में करीब 10 फुट गहरे तालाब के पास खेलते-खेलते देवांश अचानक पानी में गिर गया। वह अपनी मां अंजलि के साथ बुलंदशहर के सिकंदराबाद से नाना के घर आया हुआ था। गांव के मंदिर में 41 दिनों की पूजा के समापन पर भंडारे का आयोजन था और पूरा परिवार उसी कार्यक्रम में व्यस्त था। इसी बीच यह दर्दनाक हादसा हो गया।
आधे घंटे बाद मिली तालाब में तैरती टोपी
जब काफी देर तक देवांश दिखाई नहीं दिया, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। करीब आधे घंटे बाद तालाब में उसकी टोपी तैरती दिखी। ग्रामीणों की मदद से बच्चे को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मासूम की सांसें थम चुकी थीं।

अवैध खनन ने तालाब को बना दिया मौत का कुंआ
ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब में वर्षों से अवैध खनन किया जा रहा था। इसी वजह से इसकी गहराई लगातार बढ़ती चली गई और आज यह 10 फुट से भी ज्यादा गहरा हो चुका है। तालाब में जलकुंभी फैली हुई है और किनारों पर न तो बैरिकेडिंग है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। लोगों का कहना है कि यह जगह बच्चों के लिए लंबे समय से जानलेवा बनी हुई थी।
पहले भी दी गई थीं शिकायतें, नहीं हुई सुनवाई
ग्रामीणों के अनुसार, सेक्टर-150 की घटना के बाद उन्होंने तालाब की सफाई और चारों ओर तारबंदी कराने के लिए प्राधिकरण से छह से अधिक बार शिकायत की थी। लेकिन हर बार फाइलें आगे बढ़ने के बजाय ठंडे बस्ते में चली गईं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा घेरा बना दिया जाता, तो देवांश की जान बच सकती थी।
प्राधिकरण का जवाब: जमीन निजी बताकर झाड़ा पल्ला
हादसे के बाद संबंधित प्राधिकरण की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने बताया कि यह तालाब सरकारी नहीं है और जमीन गांव के एक किसान के नाम दर्ज है। इस पर ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब पहले शिकायतें की गई थीं, तब जमीन की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई। गांव के बीचोंबीच स्थित इस तालाब के आसपास घनी आबादी है और छोटे बच्चे अक्सर यहीं खेलते रहते हैं।
शोक में डूबा परिवार, गांव में आक्रोश
देवांश के नाना पिछले 41 दिनों से गांव के मंदिर में पूजा कर रहे थे। शनिवार को उसी पूजा का समापन था, लेकिन खुशियों का माहौल पल भर में मातम में बदल गया। मां अंजलि बेसुध हैं और पिता राकेश का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि सिस्टम की लापरवाही ने उनका इकलौता बेटा छीन लिया।
एक हादसा नहीं, चेतावनी है यह घटना
ग्रामीणों का कहना है कि देवांश की मौत सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि चेतावनी है। अगर तालाबों, खुले गड्ढों और खतरनाक जगहों पर समय रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, तो ऐसे हादसे दोहराते रहेंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मासूम की मौत से कोई सबक लेता है या फिर फाइलों में ही इंसाफ दबकर रह जाएगा।
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