संक्षेप में पूरी खबर (Short Summary): Greater Noida में STF ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। गिरोह बिल्डरों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर 10 बैंकों से 100 करोड़ से ज्यादा का लोन हड़प चुका था। पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार कर 126 पासबुक, 170 डेबिट कार्ड, 45 आधार, लग्जरी कारें और 220 बैंक खातों के रिकॉर्ड बरामद किए हैं।
Greater Noida में 100 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश STF की बड़ी कार्रवाई

Greater Noida में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो बिल्डरों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से करोड़ों का लोन हासिल कर रहा था। यह नेटवर्क पिछले कई महीनों से अलग-अलग राज्यों में सक्रिय था और लगभग 10 बैंकों को 100 करोड़ रुपए से अधिक का चूना लगा चुका था।पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से इस धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे।
बिल्डरों से मिलकर होता था पूरा खेल फर्जी प्रोफाइल पर लोन
STF की जांच में सामने आया कि यह गिरोह चंडीगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली और यूपी के कई जिलों में बिल्डरों के साथ मिलकर फर्जी प्रोफाइल तैयार करता था। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक से होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य फंडिंग ली जाती थी।लोन स्वीकृत होते ही गिरोह के सदस्य फ्लैट और रकम लेकर गायब हो जाते थे। इससे बैंक भारी नुकसान झेल रहे थे।
8 आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद
अपर पुलिस अधीक्षक STF (नोएडा यूनिट) राजकुमार मिश्रा ने बताया कि निरीक्षक सचिन कुमार और टीम ने कार्रवाई कर जिन 8 आरोपियों को पकड़ा है, उनके नाम हैं—रामकुमार, नितिन जैन, मोहम्मद वसी, शमशाद आलम, इंद्र कुमार कर्मकार, अनुज यादव, अशोक कुमार उर्फ दीपक जैन उर्फ रिंकी और ताहिर हुसैन।गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस को भारी मात्रा में दस्तावेज मिले, जिनमें शामिल हैं:
- 126 पासबुक
- 170 डेबिट कार्ड
- 45 आधार कार्ड
- 27 पैन कार्ड
- 15 आईडी कार्ड
- 5 वोटर आईडी
- 26 मोबाइल फोन
- 3 लैपटॉप
- 3 लग्जरी कारें
- दर्जनों होम और पर्सनल लोन से जुड़े दस्तावेज
- कई मकानों के बैनामा

STF ने बताया कि इनके 10 बैंकों में लगभग 220 अकाउंट का पता चला है, जिन्हें तत्काल प्रभाव से फ्रीज किया जा रहा है।
कैसे करते थे करोड़ों की ठगी? STF की पूछताछ में बड़ा खुलासा
पूछताछ में आरोपियों ने माना कि वे फर्जी पहचान बनाकर विभिन्न बैंकों में लोन के लिए आवेदन करते थे।
पहले ये लोग बिल्डरों से सांठगांठ कर फर्जी खरीदार दिखाते, फिर उन्हीं दस्तावेजों पर लोन पास करवाते और बाद में रकम निकालकर फरार हो जाते थे।
STF का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैल चुका है और इसमें कई बिल्डरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
सूरजपुर कोतवाली में FIR दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।