संक्षेप (Summary):jewelry के यमुना प्राधिकरण सेक्टर-28 में उत्तर भारत के पहले सेमीकंडक्टर संयंत्र की नींव रखी गई। एचसीएल-फॉक्सकॉन की संयुक्त इकाई द्वारा 4,000 करोड़ रुपये के निवेश से हर माह 3.60 करोड़ चिप का उत्पादन होगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे भारत को चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की ऐतिहासिक पहल बताया।
jewelry की धरती पर इतिहास: उत्तर भारत के पहले सेमीकंडक्टर प्लांट की नींव

जेवर/नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर-28 में शनिवार को उत्तर भारत के पहले सेमीकंडक्टर संयंत्र की नींव रखी गई। इस मौके पर केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिकी व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे देश के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत को चिप निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
हर महीने 3.60 करोड़ चिप, हजारों को मिलेगा रोजगार
इस सेमीकंडक्टर संयंत्र को एचसीएल और फॉक्सकॉन की संयुक्त इकाई मैसर्स इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड स्थापित कर रही है। इस परियोजना पर करीब 4,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। संयंत्र के पूरी तरह चालू होने के बाद लगभग 3,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। यहां स्मॉल पैनल ड्राइवर आईसी, डिस्प्ले इंटीग्रेटेड सर्किट समेत कई आधुनिक चिप्स का निर्माण होगा, जिससे विदेशों पर निर्भरता कम होगी।
“नाखून पर पूरी रामचरितमानस लिखने जैसा काम है चिप बनाना”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने चिप के महत्व को बेहद सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि दस करोड़ की मशीन भी बिना सौ रुपये की एक चिप के बेकार हो जाती है। चिप बनाना इतना जटिल काम है कि यह हाथ के अंगूठे के नाखून पर पूरी रामचरितमानस लिखने जैसा है। उन्होंने गर्व से कहा कि अब यह कठिन कार्य जेवर की धरती पर होने जा रहा है।
सेमीकंडक्टर से खुलेगा मैन्युफैक्चरिंग का नया रास्ता
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिस देश में सेमीकंडक्टर निर्माण होता है, वहां कई तरह की मैन्युफैक्चरिंग अपने आप विकसित होने लगती है। एक छोटी सी चिप में 500 करोड़ तक कंपोनेंट तैयार करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है, जो इस संयंत्र में संभव होगा। उन्होंने बताया कि देश की 18 संस्थाओं में छात्रों को चिप डिजाइनिंग और उत्पादन से जोड़ा जा रहा है, ताकि भविष्य के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार हो सके।
एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स में भारत की बढ़ती पहचान
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि हाल ही में हुए एआई समिट में 128 देशों के प्रतिनिधियों ने भारत की सोच और दूरदर्शिता को समझा। इसमें 86 देशों ने साझा दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बन चुका है। जहां पहले यह क्षेत्र लगभग शून्य था, वहीं आज इसका आकार 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उत्तर प्रदेश बना इलेक्ट्रॉनिक्स हब
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश के कुल मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का 50 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में हो रहा है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में प्रदेश की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है। सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू होने के बाद हर महीने 3 करोड़ 60 लाख चिप का उत्पादन किया जाएगा, जो यूपी को तकनीकी मानचित्र पर और मजबूत करेगा।
यूपी से सिलीगुड़ी तक बनेगा नॉर्दर्न कॉरिडोर
रेलवे से जुड़े विकास कार्यों पर बोलते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को रेलवे बजट में 20 हजार करोड़ रुपये दिए हैं और प्रदेश में 92 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। भविष्य में दिल्ली से वाराणसी और पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन चलाने की योजना है, जिससे यूपी नॉर्दर्न कॉरिडोर का अहम हिस्सा बनेगा।
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