Wednesday, March 18, 2026

Prayagraj : मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित निशुल्क शिविर, तनाव और मोबाइल एडिक्शन पर मिले विशेषज्ञ सुझाव

by Vijendra Pathak

Prayagraj । प्रिमिला न्यूरो, ब्रेन एवं नशामुक्ति क्लीनिक में 15 नवम्बर 2025 को आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य और मानसिक परामर्श शिविर ने लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के वैज्ञानिक पहलुओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर दिया। शिविर का मुख्य फोकस तनाव, अवसाद, अनिद्रा, व्यवहारिक समस्याओं और बढ़ती मोबाइल एडिक्शन पर रहा, जिनमें हाल के वर्षों में तीव्र वृद्धि देखी जा रही है।आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही आवश्यक माना जा रहा है क्योंकि व्यक्ति की सोच, भावनाएँ और निर्णय क्षमता उसके संपूर्ण स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

शिविर का नेतृत्व न्यूरो एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. ए. के. मिश्रा और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. इशान्या राज ने किया। दोनों विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य के जैविक, मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक आयामों को सरल भाषा में समझाया।यह भी बताया गया कि मानसिक समस्याएँ केवल ‘कमजोरी’ नहीं होतीं, बल्कि दिमाग के कार्य, जीवनशैली, तनाव प्रबंधन और सामाजिक समर्थन से जुड़ी वास्तविक स्थितियाँ होती हैं।

डॉ. ए. के. मिश्रा की विशेष टिप्पणी

डॉ. मिश्रा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को अक्सर देर से पहचाना जाता है, जबकि शुरुआती संकेतों को समझकर ही इलाज अधिक प्रभावी हो सकता है। उन्होंने बताया कि लगातार बढ़ता तनाव, अनियमित नींद और अत्यधिक मोबाइल उपयोग दिमाग के “न्यूरोकेमिकल बैलेंस” को प्रभावित करता है, जिससे व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, भूलने की समस्या, सिरदर्द और उच्च रक्तचाप जैसे लक्षण बढ़ जाते हैं।उन्होंने शिविर में आए मरीजों को यह भी समझाया कि लगातार तनाव शरीर में कोर्टिसोल बढ़ाता है,डिजिटल ओवरयूज डोपामिन डिसरेगुलेशन पैदा करता है,और बिना इलाज के अवसाद धीरे-धीरे सोचने और निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर करता है।उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य की रोकथाम पर भी जोर देते हुए कहा कि नियमित दिनचर्या, उचित नींद, व्यायाम और डिजिटल डिटॉक्स मानसिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।डॉ. मिश्रा ने जागरूकता बढ़ाते हुए कहा कि समय पर निदान, दवा और मनोचिकित्सकीय परामर्श का संयोजन कई जटिल समस्याओं को हल कर सकता है। उन्होंने मरीजों के बी.पी., शुगर और न्यूरोलॉजिकल लक्षणों का मूल्यांकन किया और इनके मानसिक स्वास्थ्य से संबंधों की व्याख्या भी की।उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक रोग एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं, इसलिए सम्पूर्ण उपचार का दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

डॉ. इशान्या राज का मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन

डॉ. इशान्या राज ने तनाव और अवसाद के मनोवैज्ञानिक पैटर्न पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने लोगों को बताया कि अनिद्रा, मोबाइल एडिक्शन और चिंता अक्सर सोचने की शैली से जुड़ी होती हैं, और सही तकनीकों से इन्हें बदला जा सकता है।उन्होंने प्रतिभागियों को—ग्राउंडिंग तकनीकबॉडी स्कैन मेडिटेशनस्क्रीन टाइम रीस्ट्रक्चरिंगऔर नशा मुक्ति के लिए व्यवहार सुधार रणनीतियाँजैसे व्यावहारिक उपाय बताए।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सकारात्मक सोच, भावनाओं का स्वस्थ प्रबंधन, और परिवार का भावनात्मक समर्थन किसी भी व्यक्ति की मानसिक रिकवरी को कई गुना तेज कर सकता है।डॉ. इशान्या राज ने यह भी कहा कि परिवार में संवाद और सहयोग मानसिक स्वास्थ्य सुधार की प्रक्रिया को काफी आसान बना देता है।उन्होंने सुझाव दिया कि घरों में ‘नो-फोन टाइम’, बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय और तनाव के समय खुलकर बातचीत की आदत मानसिक संतुलन बनाए रखने में उपयोगी है।

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Health Camp In Prayagrraj
Prayagraj : मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित निशुल्क शिविर, तनाव और मोबाइल एडिक्शन पर मिले विशेषज्ञ सुझाव 8

शिविर में मिला व्यापक मनोवैज्ञानिक लाभ

शिविर में आए लोगों ने तनाव, अवसाद, अनिद्रा, व्यवहारिक कठिनाइयों और मोबाइल एडिक्शन से संबंधित समस्याओं के लिए मुफ्त मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन करवाया। कई लोगों ने स्वीकार किया कि उन्हें पहली बार यह समझ आया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल भावनाओं का विषय नहीं है, बल्कि मस्तिष्क के कार्य, विचारों के ढांचे और दिनचर्या की आदतों से जुड़ा एक वैज्ञानिक क्षेत्र है।कई प्रतिभागी इस बात से आश्चर्यचकित रहे कि नियमित स्क्रीन टाइम और परिवार में तनाव का बच्चों के मानसिक विकास पर कितना गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

लोगों की प्रतिक्रिया

प्रतिभागियों ने आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे शिविर शहर में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गलत धारणाओं को दूर करने में मदद करते हैं। कई अभिभावकों ने मोबाइल एडिक्शन और बच्चों के व्यवहार संबंधी मुद्दों पर विशेषज्ञों से महत्वपूर्ण सुझाव लिए।लोगों ने इच्छा जताई कि ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित हों ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सही जानकारी पहुंच सके।

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शिविर का आयोजन स्थल

शिविर का आयोजन तारा मार्केट, साईं धाम अपार्टमेंट के सामने, जगमल हाटा, राजरूपपुर रोड स्थित प्रिमिला न्यूरो, ब्रेन एवं नशामुक्ति क्लीनिक में किया गया।आयोजकों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना हर परिवार की जिम्मेदारी है और समय पर मदद लेने से जीवन की गुणवत्ता बदल सकती है।“मानसिक स्वास्थ्य ही असली संपत्ति है। सही जानकारी और समय पर कदम, दोनों जरूरी हैं।

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