Tuesday, March 3, 2026

Uttar Pradesh में शिशु देखभाल पर 1090 करोड़ रुपये खर्च, मृत्यु दर घटाने पर सरकार का फोकस

by Sujal
Uttar Pradesh के 75 जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और शिशु देखभाल के लिए 1090 करोड़ रुपये का बजट आवंटित। एसएनसीयू सुदृढ़ीकरण, प्रशिक्षण और अत्याधुनिक नर्सरी पर खर्च, शिशु मृत्यु दर कम करने का लक्ष्य।

संक्षेप (Summary) Uttar Pradesh सरकार ने शिशु देखभाल और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए 1090 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। एसएनसीयू सुदृढ़ीकरण, प्रशिक्षण और अत्याधुनिक नर्सरी निर्माण के जरिए शिशु मृत्यु दर कम करने पर फोकस किया गया है।

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गाजियाबाद समेत उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में शिशु देखभाल और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए 1090 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह फैसला शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।National Health Mission, उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने पहली बार बच्चों की देखभाल के लिए इतना बड़ा बजट आवंटित किया है। साथ ही धनराशि के पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग के सख्त निर्देश भी जारी किए गए हैं।

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Uttar Pradesh में शिशु देखभाल पर 1090 करोड़ रुपये खर्च, मृत्यु दर घटाने पर सरकार का फोकस 8

जिलों को सख्त निर्देश, नियमों के तहत होगा खर्च

सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बजट आवंटन संबंधी पत्र मिलने की पुष्टि की है। सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि धनराशि का उपयोग वित्तीय नियमों के तहत किया जाए।भुगतान के लिए एफएएमएस और एसएनए स्पर्श पोर्टल का अनिवार्य उपयोग करने को कहा गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।


एसएनसीयू और नर्सरी होंगी और मजबूत

मेरठ मंडल स्तर पर चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण के लिए 31 लाख रुपये का बजट अलग से दिया गया है।

  • जिला महिला अस्पताल में 18 बेड का SNCU सुदृढ़ किया जाएगा।
  • संयुक्त अस्पताल के पीकू-नीकू वार्ड में संसाधन बढ़ेंगे।
  • छह सीएचसी में अत्याधुनिक नर्सरी बनाई जाएंगी।
  • नए उपकरण और मेंटेनेंस के लिए भी बजट निर्धारित है।

मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों द्वारा चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण भी कराया जाएगा।


क्यों जरूरी था यह बड़ा निवेश?

जिले में हर साल 40 से अधिक शिशुओं की मौत नर्सरी में उपचार के दौरान हो रही है। घर पर होने वाली मौतों का आंकड़ा अलग है।अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती 1233 बच्चों में से 29 की मौत हुई। यह रिपोर्ट 28 फरवरी को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में रखी गई।


माहवार शिशु मृत्यु का आंकड़ा (अप्रैल 2025 – जनवरी 2026)

माहशिशु मृत्यु
अप्रैल3
मई2
जून2
जुलाई10
अगस्त3
सितंबर2
नवंबर4
दिसंबर0
जनवरी 20263

इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग को गंभीरता से कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है।

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लक्ष्य: शिशु मृत्यु दर में कमी

इस बजट का मुख्य उद्देश्य शिशु मृत्यु दर कम करना और आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) को प्रभावी ढंग से लागू करना है।सरकार का मानना है कि बेहतर उपकरण, प्रशिक्षित स्टाफ और मजबूत निगरानी प्रणाली से नवजात शिशुओं को समय पर उपचार मिलेगा और उनकी जान बचाई जा सकेगी।

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