Sunday, March 22, 2026

Ex-IPS विमला गुंज्याल बनीं देश के प्रथम गांव की सरपंच, रच दिया इतिहास

by Sarita Kumari
Ex-IPS अधिकारी विमला गुंज्याल बनीं देश के प्रथम गांव गूंजी की निर्विरोध ग्राम प्रधान। प्रशासनिक अनुभव और ग्रामीणों के विश्वास के साथ गांव में विकास की नई उम्मीद। जानिए उनकी प्रेरणादायक यात्रा।

Ex-IPS: उत्तराखंड के लिपुलेख बॉर्डर पर स्थित गूंजी गांव की कमान अब पूर्व आईपीएस अधिकारी विमला गुंज्याल के हाथों में, देश के पहले गांव की पहली महिला प्रधान बनकर रचा नया कीर्तिमान।

निर्विरोध चुने जाने के बाद अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में विमला गुंज्याल ने बताया कि उन्होंने ग्रामीणों के अनुरोध पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि अब वह गांव की सफाई, विकास कार्यों और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए एक सुनियोजित योजना के तहत काम करेगी।

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में स्थित भारत –

चीन सीमा के निकट बसे गांव गूंजी ने इतिहास रच दिया है। इस सीमांत क्षेत्र के लिए यह पल गौरव का है, क्योंकि देश के “वाइब्रेट विलेज” कार्यक्रम में शामिल किसी भी गांव में पहली बार पूर्व आईपीएस अधिकारी विमला गुंज्याल को निर्विरोध ग्राम प्रधान चुना गया है। विमला गुंज्याल, जो कि उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड पुलिस विभाग में 35 वर्षों तक सेवा देने के बाद 2025 में आईजी विजिलेंस के पद से सेवानिवृत हुईं, अब अपने गांव के विकास के लिए समर्पित हो गई है। उन्हें 2019 में राष्ट्पति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया गया था। ग्रामीणों के आग्रह पर उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अब गांव की सेवा को अपनी नई जिम्मेदारी बताया है।

Ex-Ips
पूर्व आईपीएस विमला गुंज्याल बनीं देश के प्रथम गांव की सरपंच, रच दिया इतिहास

कैसे बनी निर्विरोध ग्राम पंचायत?

उत्तराखंड में पंचायत चुनाव दो चरणों में – 24 और 28 जुलाई को – आयोजित होने है। इसी सिलसिले में शनिवार को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि थी। ग्राम गूंजी में शुरू में प्रधान पद के लिए पांच अन्य ग्रामीणों ने भी नामांकन पत्र खरीदे थे। लेकिन जैसे ही गुरुवार को पूर्व आईपीएस अधिकारी विमला गुंज्याल धारचूला पहुंची, शुक्रवार को गांव के मिलन केंद्र में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई। इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विमला गुंज्याल के खिलाफ कोई भी उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं करेगा। ग्रामीणों की एकता और सम्मान भाव ने उन्हें निर्विरोध प्रधान बना दिया।

शनिवार को नामांकन प्रक्रिया की अंतिम तिथि तक किसी ने भी प्रधान पद के लिए पर्चा दाखिल नहीं किया। इस बारे में जानकारी देते हुए निर्वाचन अधिकारी प्रमोद मिश्रा ने बताया “जब बाकी पांच संभावित उम्मीदवारों ने विमला गुंज्याल के पक्ष में अपने नामांकन वापस ले लिए तो उन्हें ग्राम गूंजी की निर्विरोध प्रधान घोषित कर दिया गया।”

गांव गूंजी के इतिहास में पहली बार हुआ है किसी प्रधान को निर्विरोध चला गया है। आजादी के बाद यह एक अभूतपूर्व घटना है। सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल, हरीश गुंज्याल सहित कई स्थानीय लोगों ने इस क्षण को गांव के लिए ऐतिहासिक और गर्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि यह न सिर्फ गांव की एकजुटता को दर्शाता है, बल्कि विमला गुंज्याल के प्रति लोगों के विश्वास और सम्मान का प्रतीक भा है।

सेवानिवृत के बाद लिया बड़ा निर्णय

निर्विरोध ग्राम पंचायत चुने जाने के बाद अपने निवास पर मीडिया से बातचीत में विमल गुंज्याल ने कहा कि उन्होंने ग्रामीण के आग्रह और विश्वास को देखते हुए चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनका लक्ष्य गांव की स्वच्छता सतत विकास और उपलब्ध संसाधनों के कुशल प्रबंधन परियोजना बंद रूप से काम करना होगा। विमला गुंज्याल ने कहा की सेवा की भावना से प्रेरित होकर उन्होंने यह नई जिम्मेदारी स्वीकार की है।

परिवार भी समाज सेवा के पथ पर अग्रसर

विमला गुंज्याल
पूर्व आईपीएस विमला गुंज्याल बनीं देश के प्रथम गांव की सरपंच, रच दिया इतिहास

विमला गुंज्याल ही नहीं, उनका पूरा परिवार समाज सेवा से जुड़ा हुआ है। उनके पति अशोक गुंज्याल, खादी ग्रामोद्योग आयोग में डिप्टी डायरेक्टर के पद से सेवानिवृत हो चुके हैं और वर्तमान में सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी बड़ी बेटी अर्पिता गुंज्याल वकील हैं, जबकि दूसरी बेटी ने इंजीनियरिंग के बाद अपना निजी व्यवसाय शुरू किया है। वहीं उनका बेटा शिवांग गुंज्याल एक डॉक्टर है और चिकित्सा के माध्यम से समाज की सेवा कर रहे हैं। यह परिवार अपने अपने क्षेत्र में योगदान देते हुए जनसेवा की भावना को जीवंत बनाए हुए है।

Ex-Ips-Vimla-Gunjyal-Elected-Unopposed

गूंजी गांव की क्यों रही देश भर में चर्चा?

उत्तराखंड की व्यास घाटी में स्थित गूंजी गांव इन दिनों सुर्खियों में हैं। इसका कारण है केंद्र सरकार की ‘ वाइब्रेंट विलेज’ योजना, जिसमें यह सीमावर्ती गांव शामिल है। यह योजना खासतौर पर भारत- चीन सीमा से सटे क्षेत्रों में बसे गांव के समग्र विकास और स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है, ताकि न केवल सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके बल्कि वहां की जनसंख्या में स्थायित्व और सशक्तिकरण भी आए। ऐसे में एक ईमानदार और अनुभवी पूर्व आईपीएस अधिकारी विमला गुंज्याल का निर्विरोध ग्राम प्रधान बनाना न केवल गांव के लिए, बल्कि योजना की सफलता के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि और प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है

विमला गुंज्याल के आने से गांव में उमंग और उम्मीद

देश के प्रथम गांव की सरपंच
पूर्व आईपीएस विमला गुंज्याल बनीं देश के प्रथम गांव की सरपंच, रच दिया इतिहास

विमला गुंज्याल के निर्विरोध ग्राम प्रधान चुने जाने के बाद गूंजी गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों में उम्मीद और उत्साह दोनों नज़र आ रहे हैं। पूर्व प्रधान सुरेश गुंज्याल, सभासद संगीता गुंज्याल, हीरा गुंज्याल समेत कई स्थानीय लोगों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि विमला गुंज्याल के नेतृत्व में अब गांव को विकास की नई दिशा और गति मिलेगी। उनका प्रशासनिक अनुभव और समाज सेवा के प्रति समर्पण गांव के भविष्य को उज्ज्वल बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।

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