
Kishtwar जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चशोती गांव में बृहस्पतिवार को दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच अचानक बादल फटने की घटना ने इलाके को दहला दिया। मचैल माता मंदिर जाने वाले रास्ते पर यह हादसा उस समय हुआ, जब श्रद्धालुओं के लिए लगाए गए लंगर में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। देखते ही देखते पानी और मलबे की तेज धारा ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।
60 लोगों की मौत कई अब भी लापता

अब तक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस आपदा में कम से कम 60 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं। प्रशासन ने 160 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है। चशोती गांव किश्तवाड़ मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित है, जिससे राहत दलों को पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ा।
राहत कार्य में जुटी सेना की 300 जवानों की टुकड़ी
सेना के व्हाइट नाइट कोर के 300 जवान राहत और बचाव कार्य में दिन-रात लगे हुए हैं। 60-60 कर्मियों वाली पांच टुकड़ियां प्रभावित क्षेत्र में लगातार खोज और बचाव अभियान चला रही हैं। मेडिकल टीम, राहत सामग्री और बचाव उपकरण घटनास्थल पर पहुंचा दिए गए हैं। सेना का कहना है कि प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और लापता लोगों की तलाश करना है।

पीएम मोदी और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लिया हालात का जायजा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस त्रासदी पर गहरा शोक जताया और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से बात कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता का भरोसा दिया।
21 शवों की हुई पहचान व्हाट्सऐप ग्रुप से मदद
प्रशासन ने मृतकों की पहचान के लिए आधुनिक तरीका अपनाते हुए एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया। इसमें बरामद शवों की तस्वीरें साझा की गईं, जिसके जरिए अब तक 21 शवों की पहचान हो चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि इससे परिवारों को अपने प्रियजनों की पहचान करने में तेजी से मदद मिली।

प्रभावित परिवारों को मिल रही है सहायता
सरकारी एजेंसियां, सेना और स्थानीय स्वयंसेवक मिलकर प्रभावित परिवारों को भोजन, आश्रय और चिकित्सा सहायता प्रदान कर रहे हैं। हालांकि, इलाके में अब भी कई जगह मलबा और पानी जमा होने के कारण राहत कार्य में चुनौतियां बनी हुई हैं।
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