संक्षेप (Summary) : Bihar Election 2025 के रुझानों में NDA पूरे राज्य में भारी बढ़त बनाते दिख रहा है। अंग, भोजपुर, मगध, मिथिलांचल, सीमांचल और तिरहुत—छहों क्षेत्रों में NDA ने शानदार प्रदर्शन किया है। कई जगहों पर उसे 2020 की तुलना में 7 से 27 सीटों तक का बड़ा फायदा हुआ है।वहीं महागठबंधन को हर क्षेत्र में भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं का बड़ा समर्थन, युवाओं का झुकाव और जातीय समीकरणों में बदलाव ने NDA को यह बढ़त दिलाई है। रुझानों के अनुसार यह 2010 जैसी ऐतिहासिक जीत हो सकती है।
Bihar Election विधानसभा चुनाव 2025 के रुझानों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। एनडीए जिस तरह से हर क्षेत्र में बड़ी बढ़त बनाते हुए दिखाई दे रहा है, वह यह संकेत है कि 2010 की तरह एक बार फिर राज्य में उसकी ऐतिहासिक वापसी हो रही है।दूसरी ओर, महागठबंधन का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। कई ऐसे इलाके जहां पिछले चुनाव में महागठबंधन की मजबूत पकड़ थी, वहां भी उसे भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।राज्य के छह प्रमुख क्षेत्रों—अंग प्रदेश, भोजपुर, मगध, मिथिलांचल, सीमांचल और तिरहुत—में लगभग एक जैसी तस्वीर उभर रही है:
NDA का कब्ज़ा और महागठबंधन का पतन।
अंग प्रदेश में NDA की सुनामी—27 में से 25 सीटों पर बढ़त
अंग प्रदेश, जिसे राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है, वहां इस बार NDA ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है।
- कुल सीटें: 27
- NDA लीड: 25 सीटें
- महागठबंधन लीड: 2 सीटें
2020 की तुलना में NDA को यहां 7 सीटों का लाभ हुआ है, जबकि महागठबंधन को 6 सीटों का नुकसान झेलना पड़ा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यहां NDA को मिला यह समर्थन विकास, कानून-व्यवस्था और जातीय संतुलन वाले उम्मीदवारों का परिणाम है।

भोजपुर में NDA का दबदबा—46 में से 38 सीटें NDA के खाते में
भोजपुर, पारंपरिक रूप से राजनीतिक रूप से जागरूक और सक्रिय क्षेत्र माना जाता है। इस बार यहां की तस्वीर पूरी तरह NDA के रंग में रंगी दिख रही है।
- कुल सीटें: 46
- NDA लीड: 38 सीटें
- महागठबंधन लीड: 7 सीटें
2020 की तुलना में NDA को यहां 27 सीटों का फायदा हुआ है।
महागठबंधन के लिए यह सबसे बड़ा झटका है क्योंकि उसे यहां 27 सीटों का नुकसान हुआ है।भोजपुर में यह परिणाम यह दिखाता है कि जनता ने महागठबंधन के खिलाफ व्यापक असंतोष जताया है।
मगध क्षेत्र में भी NDA का मजबूत प्रदर्शन—47 में से 38 सीटों पर लीड
मगध क्षेत्र का चुनावी प्रभाव राज्य की राजनीति पर गहरा पड़ता है।
2025 में NDA ने यहां भी शानदार प्रदर्शन किया है।
- कुल सीटें: 47
- NDA लीड: 38 सीटें
- महागठबंधन लीड: 9 सीटें
2020 की तुलना में NDA को 21 सीटों का फायदा हुआ है, जबकि महागठबंधन को भी 21 सीटों का नुकसान झेलना पड़ा है।मगध में महिलाओं, पहली बार वोट करने वाले युवाओं और EBC समुदाय का झुकाव NDA की तरफ जाना इस बढ़त का मुख्य कारण माना जा रहा है।

मिथिलांचल में भी NDA का दबदबा—50 में से 41 सीटों पर बढ़त
मिथिलांचल, जो हमेशा से राजनीतिक रूप से संवेदनशील और निर्णायक क्षेत्र माना जाता है, वहां NDA और मजबूत स्थिति में है।
- कुल सीटें: 50
- NDA लीड: 41 सीटें
- महागठबंधन लीड: 9 सीटें
2020 की तुलना में NDA को यहां 8 सीटें मिलीं, और महागठबंधन को इतनी ही 8 सीटों का नुकसान हुआ है।
यह परिणाम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मिथिलांचल में अल्पसंख्यक फैक्टर भी काफी प्रभावी माना जाता है, लेकिन इस बार NDA की बढ़त यहां भी साफ दिख रही है।
सीमांचल में भी NDA की वापसी—24 में से 14 सीटों पर बढ़त
सीमांचल हमेशा से महागठबंधन का मजबूत गढ़ रहा है।
एग्जिट पोल में भी उम्मीद जताई गई थी कि यह इलाका महागठबंधन के पक्ष में जाएगा।

लेकिन रुझानों ने सारी भविष्यवाणियों को गलत साबित कर दिया।
- कुल सीटें: 24
- NDA लीड: 14 सीटें
- महागठबंधन लीड: 4 सीटें
2020 की तुलना में NDA को 2 सीटों का फायदा हुआ है।
महागठबंधन को यहां 3 सीटों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यह परिणाम संकेत देता है कि सीमांचल में भी जातीय समीकरण बदल रहे हैं और युवा वोटर नई दिशा में झुक रहे हैं।
तिरहुत क्षेत्र में NDA का सबसे बड़ा धमाका—49 में से 48 सीटों पर लीड
तिरहुत क्षेत्र में राजनीति की हवा पूरी तरह NDA के पक्ष में बह रही है।
यहां का परिणाम इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू है।
- कुल सीटें: 49
- NDA लीड: 48 सीटें
- महागठबंधन लीड: 1 सीट
2020 की तुलना में NDA को 17 सीटों का लाभ मिला है।
महागठबंधन को यहां भी 17 सीटों का नुकसान हुआ है।
तिरहुत में OBC, EBC और महिलाओं की बड़ी संख्या में NDA की ओर झुकाव इस जीत की सबसे मजबूत वजह मानी जा रही है।
छहों क्षेत्रों में एक ही तस्वीर—NDA की लहर, महागठबंधन का पतन
अगर छहों क्षेत्रों की तस्वीर को एक साथ देखा जाए, तो यह साफ होता है कि:
- NDA का कारवां पूरे बिहार में तेजी से बढ़ा
- महागठबंधन हर इलाके में कमजोर साबित हुआ
- 2010 जैसी बड़ी जीत की पूरी संभावना दिख रही है
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में तीन प्रमुख कारणों ने इस चुनाव की दिशा तय की:
महिलाओं का अभूतपूर्व समर्थन
सीधा प्रभाव NDA को मिला।
युवाओं की निराशा और नए विकल्प की तलाश
महागठबंधन के पुराने नेतृत्व को इसका नुकसान हुआ।
जातीय समीकरणों में बदलाव
EBC, अतिपिछड़ा और दलित समुदाय का वोट NDA की ओर झुका




