संक्षेप: Board Exam 2026 नजदीक हैं, ऐसे में सही समय प्रबंधन से तनाव कम किया जा सकता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार परीक्षा से पहले के 15 दिन रिवीजन और अभ्यास के लिए होते हैं। संतुलित पढ़ाई, पर्याप्त नींद और मोबाइल से दूरी रखकर छात्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं
Board Exam 2026 मेरठ। सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड की परीक्षाएं अब बेहद नजदीक हैं।

इसी माह से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं। ऐसे में परीक्षार्थियों के मन में समय की कमी, पढ़ाई का दबाव और परीक्षा को लेकर तनाव बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। सही समय प्रबंधन और संतुलित दिनचर्या अपनाकर इस तनाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र की मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ. मनीषा तेवतिया और केंद्र के प्रवक्ता डॉ. शिवराज सिंह लगातार बोर्ड परीक्षार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने “समय प्रबंधन और बोर्ड परीक्षा” विषय पर एक वेबिनार आयोजित कर छात्रों को परीक्षा से पहले की सही रणनीति समझाई
समय प्रबंधन का असली मतलब क्या है?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार समय प्रबंधन का अर्थ यह नहीं है कि छात्र दिन-रात पढ़ाई करें। असली समय प्रबंधन यह है कि उपलब्ध समय का सही और संतुलित उपयोग किया जाए। यह तय होना चाहिए कि किस विषय को कब पढ़ना है, कितना पढ़ना है और कब अभ्यास करना है। बिना योजना के पढ़ाई करने से थकान और तनाव बढ़ता है, जबकि सही योजना से कम समय में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
बोर्ड परीक्षा के दिनों में क्यों जरूरी है समय प्रबंधन?

परीक्षा के अंतिम दिनों में सिलेबस बड़ा होता है और समय सीमित। ऐसे में बिना समय प्रबंधन के छात्र या तो जरूरत से ज्यादा पढ़ने लगते हैं या फिर घबराकर पढ़ाई छोड़ देते हैं। दोनों ही स्थितियां नुकसानदेह हैं। सही समय प्रबंधन छात्रों को संतुलित बनाए रखता है।
समय प्रबंधन से छात्रों को क्या-क्या लाभ मिलते हैं?
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि सही समय प्रबंधन से
- मानसिक तनाव कम होता है
- आत्मविश्वास बढ़ता है
- पढ़ाई व्यवस्थित रहती है
- परीक्षा में गलतियां कम होती हैं
शांत और व्यवस्थित मन ही परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर पाता है।
बोर्ड परीक्षा के लिए अपनाएं 15 दिन की रणनीति
विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षा से पहले के 15 दिन नए सिलेबस पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि रिवीजन और अभ्यास के लिए होते हैं। इस दौरान छात्रों को अपनी कमजोरियों पर ध्यान देना चाहिए और पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास करना चाहिए।
इन आसान सुझावों को बनाएं अपनी आदत
- दिन में दो से तीन विषय ही पढ़ें
- एक कठिन, एक मध्यम और एक हल्का विषय चुनें
- सुबह के समय कठिन विषय पढ़ें, क्योंकि एकाग्रता अधिक होती है
- शाम को प्रश्नों का अभ्यास करें
- हर 40 मिनट की पढ़ाई के बाद 5 मिनट का ब्रेक लें
- पढ़ाई के समय मोबाइल फोन दूर रखें
- रोजाना कम से कम 7 घंटे की नींद जरूर लें
देर रात तक पढ़ने से स्मरण शक्ति कमजोर होती है और अगले दिन की पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
मोबाइल फोन सबसे बड़ा ध्यान भटकाने वाला
छात्रों के सवाल पर मनोवैज्ञानिकों ने बताया कि पढ़ाई के समय मोबाइल फोन पास रखने से ध्यान बार-बार टूटता है। हर बार ध्यान भटकने के बाद दोबारा फोकस बनने में लगभग 20 मिनट लगते हैं। इसलिए पढ़ाई के समय मोबाइल फोन पूरी तरह दूर रखना जरूरी है।
एक ही विषय पूरे दिन पढ़ना सही या गलत?
विशेषज्ञों के अनुसार पूरे दिन एक ही विषय पढ़ने से मानसिक थकान बढ़ती है। दिन में दो या तीन विषय पढ़ना ज्यादा प्रभावी और लाभकारी होता है।
कठिन विषयों से डरें नहीं, समझकर पढ़ें
फिजिक्स जैसे कठिन विषयों को रटने की बजाय समझकर पढ़ना चाहिए। सूत्रों का अर्थ समझें और हर अध्याय के बाद प्रश्नों का अभ्यास जरूर करें। वहीं अंग्रेजी जैसे विषय के लिए रोजाना 30 से 40 मिनट का अभ्यास पर्याप्त होता है।
परीक्षा का तनाव ऐसे करें कम

- एक समय में सिर्फ एक विषय पर ध्यान दें
- पूरे सिलेबस को एक साथ सोचकर घबराएं नहीं
- रोज छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर पढ़ाई करें
छात्रों और अभिभावकों के लिए मुफ्त सहायता
डॉ. मनीषा तेवतिया और डॉ. शिवराज सिंह ने बताया कि यदि बोर्ड परीक्षा की तैयारी को लेकर छात्रों या अभिभावकों को किसी भी तरह की परेशानी है, तो वे पीएमश्री राजकीय इंटर कॉलेज, बेगमपुल रोड स्थित मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में कार्य दिवसों में संपर्क कर सकते हैं। यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है।
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