Chandigarh सतारा और अरुणाचल प्रदेश: चार सुसाइड, एक सवाल – आखिर हो क्या रहा है?
Chandigarh आत्महत्या कभी भी आसान निर्णय नहीं होती। इंसान तब यह कदम उठाता है जब उसे हर ओर से अंधेरा नजर आता है। समाज में कहा जाता है कि मजबूत लोग टूटते नहीं, लड़ते हैं लेकिन जब सिस्टम ही किसी इंसान को तोड़ दे, तब उसके पास बचता क्या है?
देश के तीन राज्यों – चंडीगढ़, सतारा और अरुणाचल प्रदेश – में हुए चार सुसाइड केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं ने सिर्फ संवेदनशील लोगों को ही नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अरुणाचल प्रदेश का मामला: 19 साल के युवक की मौत से उठा सरकारी सिस्टम पर सवाल
अरुणाचल प्रदेश की राजधानी इटानगर से आई खबर ने पूरे उत्तर-पूर्व को हिला दिया।
23 अक्टूबर को लेखी गांव में किराए के मकान में 19 वर्षीय गोमचु येकर का शव बरामद हुआ। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के नाम लिखे थे।
नोट में येकर ने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों ने लंबे समय तक उनका यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न किया।
उनके पिता टैगम येकर ने एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें आईएएस अधिकारी और पूर्व डिप्टी कमिश्नर तालो पोतों, तथा ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यकारी इंजीनियर लिक्वांग लोवांग पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया।
सुसाइड नोट में यह भी लिखा था कि उन्हें एक पद पर भर्ती कराने के नाम पर शारीरिक शोषण किया गया और जब वे एचआईवी पॉजिटिव हो गए तो उन्हें छोड़ दिया गया और ब्लैकमेल किया गया।
गोमचु ने लिखा कि अधिकारियों ने उन्हें एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद देने का वादा किया था, लेकिन वह भी झूठा निकला।

पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और राज्य प्रशासन ने दोनों अधिकारियों से जवाब तलब किया है। यह मामला सिर्फ एक युवक की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर छिपे भ्रष्टाचार और अमानवीय व्यवहार को उजागर करता है।
चंडीगढ़ डबल सुसाइड: रिश्वत कांड ने दो पुलिसकर्मियों की जान ले ली
हरियाणा में हुए दो आत्महत्याओं ने पुलिस विभाग को हिला कर रख दिया है।
पहले आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार, और फिर एएसआई संदीप लाठर — दोनों की खुदकुशी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
6 अक्टूबर को रोहतक में एएसआई संदीप लाठर ने आईपीएस पूरन कुमार के गनर सुशील को ढाई लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। पूछताछ में गनर ने कबूला कि वह यह रकम आईजी पूरन कुमार के निर्देश पर एक शराब कारोबारी से ले रहा था।
वीडियो रिकॉर्डिंग में भी यह बयान दर्ज किया गया था।
इस मामले के बाद आईपीएस पूरन कुमार का तबादला सुनारिया जेल में कर दिया गया। लेकिन अगले ही दिन — 7 अक्टूबर को, उन्होंने चंडीगढ़ स्थित अपने घर में फांसी लगा ली।
उनकी मौत के बाद मामला और गहराया।
13 अक्टूबर को, वही एएसआई संदीप लाठर, जिसने रिश्वत मामले का खुलासा किया था, उसने भी खुदकुशी कर ली।
संदीप के सुसाइड नोट में लिखा था कि वाई पूरन कुमार मेरी मौत के जिम्मेदार हैं। उन्होंने मुझे मानसिक रूप से तोड़ दिया।
नोट में पूरन कुमार को भ्रष्ट अफसर बताया गया। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।
डीजीपी, रोहतक एसपी और कई वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच टीम अब यह पता लगा रही है कि आखिर सिस्टम के अंदर इतना दबाव क्यों था कि दो पुलिसकर्मी अपनी जान दे बैठे।
सतारा सुसाइड केस: महिला डॉक्टर ने लिखा अब और नहीं सह सकती
महाराष्ट्र के सतारा जिले के फलटण कस्बे से आई खबर ने दिल दहला दिया।
28 वर्षीय महिला डॉक्टर, जो एक उप-जिला अस्पताल में कार्यरत थीं, ने एक होटल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
डॉक्टर ने अपनी हथेली पर सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर (PSI) पर रेप और एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था।
इसके अलावा, बाद में पुलिस को एक पत्र मिला, जिसमें एक सांसद और उनके पीए का नाम भी दर्ज था।
डॉक्टर के पिता ने खुलासा किया कि उनकी बेटी पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेरबदल के लिए भी दबाव डाला जा रहा था।
इस केस ने महाराष्ट्र के चिकित्सा और पुलिस सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर किया है।
राज्य सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन परिवार अब भी न्याय की प्रतीक्षा में है।
तीनों केसों में एक समानता: सिस्टम का दबाव
अरुणाचल का युवक हो, हरियाणा के पुलिस अफसर हों या महाराष्ट्र की महिला डॉक्टर — तीनों की आत्महत्या के पीछे एक चीज़ समान है — सिस्टम से लड़ते-लड़ते हार जाना।
तीनों मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों, सत्ता से जुड़े लोगों या प्रभावशाली वर्ग के नाम सामने आए हैं।
जब पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, जब शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती और जब उत्पीड़न अपनी सीमा पार कर जाता है — तब इंसान टूट जाता है।
देश में ऐसे कई मामले पहले भी सामने आए हैं, लेकिन इन चार मौतों ने यह सवाल फिर से खड़ा किया है —
क्या हमारा सिस्टम सच में इंसाफ देने के लिए बना है या दबाव बनाने के लिए?
समाज को क्या सीख लेनी चाहिए
हर आत्महत्या एक संदेश छोड़ती है — कि कहीं न कहीं हम समाज के तौर पर असफल हो रहे हैं।
जब तक हम मानसिक स्वास्थ्य, संवेदनशील जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर नहीं देंगे, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराती रहेंगी।
जरूरत है कि सरकार और समाज मिलकर ऐसे मामलों को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सुधार का अवसर मानें।
अगर आप भी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं…
आप अकेले नहीं हैं। मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि हिम्मत की निशानी है।
इन हेल्पलाइन पर तुरंत संपर्क करें —
- वंद्रेवाला फाउंडेशन फॉर मेंटल हेल्थ: 📞 9999666555 या 📧 help@vandrevalafoundation.com
- TISS iCall: ☎️ 022-25521111 (सोमवार से शनिवार – सुबह 8:00 से रात 10:00 तक)
या अपने नजदीकी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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