ED जब्त करता है करोड़ों लेकिन वो पैसा आखिर जाता कहां है?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) जब किसी बड़े आर्थिक अपराध का पर्दाफाश करता है, तो करोड़ों रुपये की रकम जब्त करता है। लेकिन ये सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है कि ED द्वारा जब्त की गई राशि जाती कहां है? क्या ये पैसा सरकार के खजाने में जाता है या किसी और को मिलता है?
सुप्रीम कोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, SG ने दी अहम जानकारी

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में पहली बार इस रहस्य से पर्दा उठा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में बताया कि ED अब तक ₹23,000 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग की राशि पीड़ितों को लौटा चुका है। SG ने साफ किया कि जब ED मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में धन जब्त करता है, तो वह राज्य के खजाने में नहीं जाता, बल्कि उन लोगों को वापस दिया जाता है जो इन वित्तीय अपराधों के शिकार होते हैं।
मुख्य न्यायाधीश की पीठ के सामने पेश की गई जानकारी
यह अहम बयान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की विशेष पीठ के समक्ष दिया गया। यह पीठ भूषण स्टील एंड पावर लिमिटेड (BSPL) केस से जुड़ी पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
भूषण स्टील केस बना सुनवाई की वजह
दरअसल, दो मई को सुप्रीम कोर्ट ने JSW स्टील की समाधान योजना को खारिज करते हुए इसे आईबीसी कानून का उल्लंघन करार दिया था और BSPL के परिसमापन का आदेश दिया था। इसके बाद 31 जुलाई को इस फैसले को वापस ले लिया गया और पुनर्विचार याचिकाओं पर दोबारा सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान एक वकील ने ED की जांच का जिक्र किया, जिस पर CJI ने चुटकी लेते हुए कहा ED यहां भी मौजूद है।
SG बोले यह फैक्ट आज तक किसी अदालत में नहीं बताया गया
इस टिप्पणी के जवाब में SG तुषार मेहता ने कहा
मैं एक तथ्य बताना चाहता हूं जो आज तक किसी अदालत में नहीं कहा गया—ED ने अब तक ₹23,000 करोड़ जब्त कर पीड़ितों को लौटाए हैं
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह राशि सरकारी खजाने में नहीं जाती, बल्कि सीधे उन व्यक्तियों तक पहुंचाई जाती है जो मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराधों से प्रभावित होते हैं।
सजा की दर पर भी उठा सवाल, CJI ने जताई चिंता
इस दौरान CJI ने सवाल उठाया कि ED द्वारा दर्ज मामलों में सजा की दर कितनी है? इस पर SG ने जवाब दिया कि सजा की दर कम है क्योंकि देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में कई खामियां हैं। CJI ने इस पर कटाक्ष करते हुए कहा,
आप दोष सिद्ध न होने के बावजूद वर्षों से आरोपियों को बिना सुनवाई सजा देने में सफल रहे हैं
नेताओं पर छापों में मिली इतनी नकदी कि मशीनें बंद हो गईं!

SG ने अदालत को बताया कि कुछ नेताओं के ठिकानों पर छापों के दौरान इतनी अधिक नकदी मिली कि नोट गिनने वाली मशीनें बंद हो गईं। कई बार ED को नई मशीनें मंगानी पड़ीं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में अक्सर यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म पर झूठे विमर्श फैलाए जाते हैं
CJI बोले हम विमर्श नहीं कानून के आधार पर फैसला करते हैं”
SG की बातों पर CJI ने जवाब दिया कि वे समाचार चैनल नहीं देखते, केवल अखबार की सुर्खियां पढ़ते हैं और अदालतें किसी सोशल मीडिया विमर्श के आधार पर नहीं चलतीं
ED की कार्यप्रणाली पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की कई पीठें, खासतौर पर विपक्षी नेताओं से जुड़े मामलों में ED की कार्यप्रणाली की आलोचना कर चुकी हैं। 21 जुलाई को भी शीर्ष अदालत ने कहा था कि “ED सारी हदें पार कर रहा है।”
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