jaishankar ने मॉस्को में मुस्कुराते हुए अमेरिका को दिया करारा जवाब
रूस संग रिश्तों को लेकर बड़ी बातें
jaishankar विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इन दिनों रूस दौरे पर हैं, जहां उन्होंने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने न केवल भारत-रूस संबंधों पर चर्चा की बल्कि अमेरिका की हालिया टैरिफ नीति पर भी बेबाक जवाब दिया।
विदेश मंत्रालय ने यात्रा को क्यों बताया अहम

नई दिल्ली से जारी बयान में विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य भारत और रूस की दीर्घकालिक और समय की कसौटी पर खरी उतरी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।
सरकार का मानना है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाई तक ले जाएगी।
रूस में जयशंकर की बैठक में क्या हुआ
मॉस्को में हुई इस अहम बैठक के दौरान जयशंकर और लावरोव ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की।
जयशंकर ने कहा
आज की बैठक ने हमें राजनीति, व्यापार, निवेश, रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क पर विचार साझा करने का अवसर दिया है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाले समय में दोनों देशों के नेता वार्षिक शिखर सम्मेलन में मुलाकात करेंगे और विशेष साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।
अमेरिकी टैरिफ पर जयशंकर का सधा जवाब
एक प्रेस वार्ता में जब एक पत्रकार ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ का जिक्र किया, तो जयशंकर ने मुस्कुराते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा –
- रूस से तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है, भारत नहीं।
- एलएनजी का सबसे बड़ा खरीदार यूरोपीय संघ है।
- रूस के साथ 2022 के बाद सबसे ज्यादा व्यापार उछाल भी भारत का नहीं है।
जयशंकर ने व्यंग्य करते हुए कहा कि अमेरिका खुद ही पिछले कुछ सालों से भारत से कहता आया है कि हमें विश्व ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए सबकुछ करना चाहिए, जिसमें रूस से तेल खरीदना भी शामिल है।
उन्होंने साफ किया कि भारत अमेरिका से भी तेल खरीद रहा है और उसकी मात्रा लगातार बढ़ रही है।
रूस का रुख और सहयोग के नए रास्ते
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस बैठक का मुख्य फोकस परिवहन, बैंकिंग और वित्तीय सहयोग को मजबूत करना है।
साथ ही, दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग कर व्यापार बढ़ाया जाएगा ताकि किसी तीसरे देश के दबाव से बचा जा सके।
ऊर्जा, कृषि और विज्ञान-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
क्यों अहम है यह दौरा
जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ दोगुना कर 50% तक कर दिया है।
इसमें रूसी तेल आयात पर 25% अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है।
ऐसे हालात में रूस संग भारत की करीबी और अमेरिका को जयशंकर का सीधा जवाब कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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