1. नए जीवन की ओर पहला कदम
Kerala की एक महिला रेश्मा सुरेश ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ऐसा वीडियो पोस्ट किया है जिसने सोशल मीडिया पर बड़ी संवेदनशील चर्चा छेड़ दी है। इसमें दिखाया गया है कि एक लड़की के पहले पीरियड्स यानी {\it menarche} के समय उसके परिवार ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से उसे सम्मानित किया — न सिर्फ एक व्यक्तिगत अनुभव बल्कि पूरे परिवार द्वारा मिलकर उसकी नारीत्व यात्रा को स्वीकार करने का भावुक क्षण। India Today
वीडियो में दिख रहा है कि दूध स्नान से शुरुआत हुई, उसके बाद फूलों की माला, आरती, हल्दी लेप, मिठाई-रस्में — और सबसे दिल छू लेने वाला दृश्य था उस लड़की के भाई का माथा चूमना और हाथ थामना। इस छोटे-से क्षण ने दर्शकों के दिलों को छू लिया। India Today
2. रस्मों का भाव और अर्थ
इस समारोह में हम देखते हैं विभिन्न पारंपरिक रंगों की झलक:

दूध स्नान-आरती
वीडियो में पहले दिखाया गया कि लड़की को दूध से स्नान कराया गया — यह शुद्धि और नए आरंभ का प्रतीक है। इसके बाद परिवार के सदस्यों ने आरती उतारी और फूलों की माला पहनाई। India Today
हल्दी लेप और मिठाई
इसके बाद हल्दी का लेप लगाया गया — यह रीति शुद्धता, सौभाग्य और बेटी के नारीत्व की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। अंत में मिठाई खिलाई गयी — उत्सव का प्रतीक। India Today
भाई-बहन का प्यार
वीडियो में भाई ने अपनी बहन का माथा चूमा, हाथ थामा और उसकी इस परिक्रमा में प्यार और समर्थन जताया। सोशल मीडिया-यूज़र्स ने इसे बहुत सुंदर और प्रेरणादायी बताया। India Today
3. सामाजिक और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य
यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि एक सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव का प्रतीक भी बन रही है — जहाँ पहली माहवारी को शर्म या छुपाने वाली बात की तरह नहीं देखा जा रहा, बल्कि एक उत्सव-मय, स्वीकारोक्ति-मूलक घटना के रूप में मनाया जा रहा है।
केरल की परंपरा
केरल में इस तरह की अवसर-संबंधित रस्मों के लिए शब्द हैं जैसे थिरंदु कल्याणम (Thirandukalyanam) जो लड़की के पहले मासिक चक्र के बाद मनायी जाती है। The Culture Gully+1
बदलती सोच
पहले-पहले यह समय अक्सर छुपाया जाता था, लड़की को कुछ दिनों के लिए अलग-थलग रखा जाता था। लेकिन अब उस वास्तविकता को स्वीकार कर, “नारीत्व का उत्सव” कहा जा रहा है। Avni Wellness+1
4. किन वजहों से यह वीडियो वायरल हुआ?
- भावनात्मक गहराई: परिवार के सदस्यों का स्नेह-भरा व्यवहार, भाई-बहन का प्यार, माँ-बाप की मुस्कान — ये सब दर्शकों को भावुक कर गए। India Today
- सकारात्मक संदेश: एक लड़की के पहले पीरियड्स को छुपाने की बजाय सम्मानित करने का संदेश सोशल-मीडिया में खूब सराहा गया। India Today
- रिवाइवल ऑफ ट्रैडिशन: परंपरागत रीति-रिवाजों को आधुनिक दृष्टिकोण से दिखाना, जहाँ विज्ञान-समय के बावजूद संस्कार-भाव बना हुआ है।
- वायरल संख्या: इस वीडियो को 69 लाख (6.9 मिलियन) से अधिक बार देखा जा चुका है। India Today
5. क्या हम सिर्फ उत्सव देख रहे हैं या कुछ और?
हाँ, यह सिर्फ उत्सव नहीं; इसके पीछे कुछ गहरे अर्थ भी छिपे हैं:
- स्वीकारोक्ति: माहवारी को अब “लाज की बात” नहीं बल्कि “जीवन-चक्र का हिस्सा” माना जा रहा है।
- समानता-भाषा: जब भाई सामने आता है, परिवार में पुरुष सदस्य भी इस प्रसंग में शामिल होते नजर आते हैं — यह संकेत है कि नारीत्व सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं।
- परंपरा vs पिछड़ापन: परंपरा बनी रही है लेकिन उसका ढांचा बदल रहा है — जहाँ पहले अलगाव-रीति थी, अब उत्सव-मय सहभागी भूमिका नजर आ रही है।
- शिक्षा-संवाद: यह अवसर एक तरह से संवाद का माध्यम बन जाता है जहाँ लड़कियों के लिए माहवारी-शिक्षा और आत्म-स्वीकृति की दिशा खुलती है।
6. आगे का विचार-विमर्श
- क्या इन पारंपरिक समारोहों को नए समय के अनुरूप और अधिक खुला, समावेशी बनाया जा सकता है?
- उत्सव के साथ-साथ माहवारी स्वास्थ्य, स्वच्छता और शिक्षा को भी जोड़ा जाना चाहिए।
- क्या हर परिवार में यह सोच बदल रही है या अभी भी बड़ी संख्या में माहवारी को छुपाने-वाली बात माना जाता है?
- मीडिया और सोशल-प्लेटफॉर्म्स इस तरह के सकारात्मक प्रसंगों को और बढ़ावा देंगे, तो माहवारी-टैबू कम होंगे।
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