Summary (संक्षेप में पूरी खबर) Noida सेक्टर-143 में 5 साल के बच्चे की सांस की समस्या इतनी बढ़ गई कि डॉक्टरों को उसके टॉन्सिल और एडिनॉइड्स निकालने पड़े। परिवार सिरसा से नोएडा आने के बाद से बच्चे की लगातार बिगड़ती सेहत से परेशान था। नाक बंद, तेज खर्राटे और सांस न ले पाने जैसी समस्या सामान्य बन गई थी।
होम्योपैथी और एलोपैथी—दोनों से इलाज करवाने पर भी आराम नहीं मिला।डॉक्टरों ने बताया कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से एडिनॉइड्स और टॉन्सिल बढ़ जाते हैं, जिससे बच्चों में सांस की दिक्कत गंभीर हो जाती है। पिछले हफ्ते बच्चे का ऑपरेशन गुड़गांव में हुआ। परिवार ने प्रदूषण को इसकी सबसे बड़ी वजह बताया और कहा कि वे अब साफ हवा की तलाश में नई जगह देखने पर मजबूर हैं।
Noida में 5 साल के बच्चे की सांसें थमीं! प्रदूषण ने बढ़ाई परेशानी, टॉन्सिल हटाने तक पहुँचा मामला

दिल्ली–एनसीआर का बढ़ता प्रदूषण बच्चों की जिंदगी पर लगातार हमला कर रहा है। इसका ताज़ा मामला नोएडा सेक्टर-143 में सामने आया, जहां एक 5 साल के बच्चे की सांस लेने की समस्या इतनी गंभीर हो गई कि डॉक्टरों को उसके बढ़े हुए टॉन्सिल और एडिनॉइड्स निकालने पड़े।परिवार का दावा है कि बच्चे की बिगड़ती सेहत के पीछे नोएडा की प्रदूषित हवा ही सबसे बड़ी वजह है।
नोएडा में आने के बाद लगातार बिगड़ती सेहत
बच्चे की मां साक्षी पाहवा ने बताया कि परिवार पहले हरियाणा के सिरसा में रह रहा था। लेकिन नोएडा में शिफ्ट होते ही बच्चे की एलर्जी, नाक बंद रहने और सांस लेने में दिक्कत की समस्या तेजी से बढ़ने लगी।
साक्षी ने कहा—नाक हमेशा बंद रहती थी, टॉन्सिल सूज जाते थे, बच्चा ठीक से सांस नहीं ले पाता था। कोई दवा असर नहीं कर रही थी।

दवाओं से नहीं मिली राहत, बार-बार बढ़ते लक्षण
बच्चे के पिता सचिन कंबोज ने बताया कि उन्होंने होम्योपैथी, एलोपैथी और कई तरह के इलाज करवाए, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं आया।
वे बताते हैं—
“प्रदूषण और धूल की वजह से उसकी हालत और खराब होती गई। वह रात में ठीक से सो भी नहीं पाता था।”
डॉक्टरों का बड़ा खुलासा: प्रदूषित हवा बढ़ा रही बच्चे की बीमारी
गुड़गांव के अस्पताल में बच्चे की जांच के बाद पता चला कि लंबे समय तक
धूल
खराब एयर क्वालिटी
एलर्जन
के संपर्क में रहने से बच्चे के एडिनॉइड्स और टॉन्सिल असामान्य रूप से बढ़ गए थे, जिससे उसके एयर-पैसेज में रुकावट बन रही थी।रिपोर्ट में टर्बिनेट हाइपरट्रॉफी, बढ़े हुए एडिनॉइड्स और टॉन्सिल के कारण गंभीर सांस की समस्या दर्ज की गई।
नींद में जोरदार खर्राटे, नाक पूरी तरह बंद – सर्जरी ही थी एकमात्र उपाय
डॉक्टरों के अनुसार बच्चे की नींद में
- बहुत तेज खर्राटे आते थे
- सांस रुकने जैसी स्थिति बनती थी
- नाक पूरी तरह ब्लॉक हो जाती थी

ऐसे में ऑपरेशन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।पिछले हफ्ते गुड़गांव के एक निजी अस्पताल में बच्चे का ऑपरेशन किया गया।
परिवार ने प्रदूषण को ठहराया जिम्मेदार
मां साक्षी और पिता सचिन का कहना है कि नोएडा की जहरीली हवा ने उनके बच्चे की सेहत बुरी तरह प्रभावित की।
अब परिवार साफ हवा और बेहतर माहौल की तलाश में नए विकल्प देख रहा है।
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